भारत में कब-कब सोने की खरीद पर सख्ती हुई और इसका असर क्या पड़ा?

भारत अक्सर आर्थिक संकट के समय में सोने के आयात को कम करने के लिए उस पर लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ा देता है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

भारत सरकार ने तेजी से बढ़ रहे चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के लिए सोने के आयात को कम करने का फैसला किया है. इसके लिए सरकार ने सोने के आयात पर लगने वाले शुल्क को 6 फीसद से बढ़ाकर 15 फीसद कर दिया है.

इनमें 10 फीसद मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) और 5 फीसद कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) शामिल है. सरकार का यह कदम यह जाहिर करता है कि कच्चे तेल के बाद सबसे अधिक आयात की जाने वाली वस्तु सोना है.

यही कारण है कि अब सरकार ने इन दोनों पर होने वाले विदेशी मुद्रा व्यय को कम करने का फैसला लिया है. वास्तव में सोने के आयात पर कुल कर इससे भी ज्यादा लगता है. 15 फीसद प्रभावी आयात शुल्क के साथ-साथ खरीदारों को 3 फीसद एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (IGST) भी देना पड़ता है, जिससे कुल टैक्स की राशि पहले के 9.18 फीसद से बढ़कर 18.45 फीसद हो जाती है.

सोने पर लगने वाले टैक्स में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब भारत कई तरह के बाहरी दबावों का सामना कर रहा है. पश्चिम एशिया जंग के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं. रुपए में लगातार गिरावट हो रही है. वित्त वर्ष 2026 में देश के सोने और चांदी के आयात बिल में साल दर साल 26.7 फीसद की वृद्धि होकर 102.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.  

इन सबका तत्काल प्रभाव घरेलू बाजार में दिखाई देने लगा है. 13 मई को 24 कैरेट सोने की कीमत एक ही कारोबारी सत्र में 13,910 रुपए बढ़कर 1,67,890 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई. हालांकि, इस उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि  ऊंची कीमतों और शुल्कों के कारण सोने की मांग में 10-15 फीसद की गिरावट आ सकती है लेकिन आयात का कुल मूल्य ज्यादा रहने की उम्मीद है.

सरकार ने सोना के आयात के नियमों को भी सख्त कर दिया है. एडवांस अथॉराइजेशन स्कीम (Advance Authorisation Scheme) के तहत अब बिना ड्यूटी वाले सोने के आयात को प्रति आवेदन 100 किलोग्राम तक सीमित कर दिया गया है. साथ ही, पहली बार आवेदन करने वालों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (कारखाने) की अनिवार्य फिजिकल जांच का सामना करना पड़ेगा.

सरकार ने ये सभी कदम कानूनी खामियों से जुड़े लूप एंड होल्स को बंद करने और UAE रूट से CEPA का फायदा उठाकर होने वाले गलत मुनाफे को रोकने के लिए उठाए हैं. यह पहली बार नहीं है, जब भारत सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करने और बाहरी आर्थिक कमजोरियों को नियंत्रित करने के लिए सोने के आयात पर पाबंदियाँ बढ़ाई हैं.

कीमती धातुओं के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ऑगमॉंट (Augmont) की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी पिछले उन मौकों के बारे में बताती हैं, जब सरकार ने सोने के आयात पर सख्ती की थी. साथ ही यह भी समझाती हैं कि उन उपायों का सोने की खपत, तस्करी, निवेशकों के व्यवहार और पूरे अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा था.

2012: शुल्क की व्यवस्था में बदलाव

क्या बदलाव हुए: 2012 से पहले भारत में सोने पर प्रति 10 ग्राम ₹300 का फ्लैट (निश्चित) आयात शुल्क लगता था. सरकार ने इसे बदलकर मूल्य-आधारित (ad valorem) प्रणाली कर दी और 2 फीसद शुल्क लगा दिया. उस समय के भावों में यह शुल्क लगभग दोगुना बोझ बन गया था.

उस वक्त के हिसाब से देखें तो शुल्क में बढ़ोतरी खुद में ज्यादा नहीं थी लेकिन यह एक बड़े नीतिगत बदलाव की शुरुआत थी. सरकार अब आयात शुल्क को मैक्रोइकोनॉमिक टूल (बड़ी आर्थिक नीति का हथियार) के रूप में इस्तेमाल करने लगी.

इसका असर क्या हुआ: उस समय भारत हर साल 800 टन से ज्यादा सोना आयात करता था. घरेलू MCX पर सोने के दाम अंतरराष्ट्रीय COMEX भावों के बहुत करीब रहते थे. चूंकि शुल्क अभी भी कम था, इसलिए तस्करी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. यह कदम ज्यादातर राजस्व व्यवस्था को ठीक करने के लिए लिया गया था, न कि सोने की मांग को कम करने के लिए. इसलिए खपत और आयात पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं हुआ.  

2013: सोने के आयात पर तीन बार शुल्क वृद्धि

क्या बदलाव हुए: 2013 में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. भारतीय करेंसी रुपया लगातार कमजोर हो रहा था. देश से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जा रही थी. सरकार ने एक ही साल में सोने के आयात शुल्क तीन बार बढ़ाया. जनवरी में 4 फीसद से 6 फीसद, जून में बढ़ाकर 8 फीसद और अगस्त में 10 फीसद कर दिया.

जुलाई 2013 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने विवादास्पद 80:20 योजना लागू की. इसके तहत आयात किए गए सोने का कम से कम 20 फीसद हिस्सा अनिवार्य रूप से फिर से विदेश निर्यात करना जरूरी था, तभी नया सोना आयात करने की अनुमति मिलती थी. RBI ने कंसाइनमेंट आयात के नियम भी और सख्त कर दिए थे.

इसका असर क्या हुआ: इन पाबंदियों का आधिकारिक आयात पर तुरंत बहुत बड़ा असर पड़ा. 2013 के दूसरे आधे में सोने का आयात करीब 70 फीसद घटकर प्रति तिमाही सिर्फ 90 टन रह गया. जबकि पिछले दो सालों में औसतन 225 टन आयात होता था. हालांकि, आपूर्ति की इस कमी ने तस्करी और सोने के प्रीमियम (अतिरिक्त भाव) को बहुत बढ़ा दिया.

घरेलू बाजार में सोने के दाम आसमान छूने लगे. 28 अगस्त 2013 को MCX पर सोना प्रति 10 ग्राम ₹35,074 तक पहुंच गया, जो पिछले महीने से लगभग 25 फीसद ज्यादा था. यह उस समय MCX सोने का सबसे बड़ा मासिक उछाल था. इस तेजी को रुपए की गिरावट ने और बढ़ावा दिया. अगस्त के अकेले महीने में रुपया डॉलर के मुकाबले 13 फीसद कमजोर हो गया था.

2019: शुल्क 10 फीसद से बढ़ाकर 12.5 फीसद किया गया

क्या बदलाव हुए: भारत सरकार ने राजस्व बढ़ाने और कर-से-GDP अनुपात में गिरावट के बीच आयात को कम करने के लिए 75 उत्पादों पर व्यापक शुल्क वृद्धि का फैसला लिया. इसी फैसले के तहत सोने पर सीमा शुल्क 10 फीसद से बढ़ाकर 12.5 फीसद कर दिया.

इसका असर क्या हुआ: सोने के आयात पर तत्काल प्रभाव पड़ा. अगस्त 2019 में भारत का सोने का आयात पिछले वर्ष की तुलना में 73 फीसद घटकर मात्र 30 टन रह गया, जो तीन वर्षों में सबसे कम था. ऐसा इसलिए क्योंकि घरेलू कीमतें उस समय के रिकॉर्ड उच्च स्तर 39,770 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई थीं.

मूल्य के हिसाब से अगस्त में आयात 62 फीसद घटकर 1.37 अरब डॉलर रह गया, जो अगस्त 2016 के बाद सबसे कम था. इसके बाद सोने पर डीलरों ने भारी छूट देना शुरू कर दिया, जो कभी-कभी आधिकारिक घरेलू कीमतों से 37 डॉलर प्रति औंस तक कम थी.

इसी बीच, तस्करी को लेकर चिंताएं फिर से उभर आईं. उद्योग विशेषज्ञों ने बताया कि ज्यादा टैक्स लगने के कारण सोने के आयात के अनौपचारिक चैनल (तस्करी या गैरकानूनी तरीके से सोने का आयात) एक बार फिर से बढ़ने लगे. वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में सीमा शुल्क अधिकारियों के जरिए जब्त किए गए सोने में पिछले वर्ष की तुलना में 23 फीसद की वृद्धि हुई थी.

2022: शुल्क 10.75 फीसद से बढ़कर 15 फीसद हो गया  

क्या बदलाव हुए:1 जुलाई 2022 को रूस के जरिए यूक्रेन पर हमला और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बाद अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव के चलते भारत ने सोने पर आयात शुल्क में एक बार फिर भारी वृद्धि की. 2022 की पहली छमाही में रुपया डॉलर के मुकाबले 6 फीसद कमजोर हुआ और भारत की चालू खाता बाजार दर (CAD) में तेजी से वृद्धि हुई.

भारत में सोने के आयात शुल्क में 4.25 फीसद की वृद्धि हुई. अब शुद्ध सोने (refined gold) पर उपभोक्ताओं को 18.45 फीसद टैक्स चुकाना पड़ता था जबकि पहले यह 14.07 फीसद था. मूल सीमा शुल्क (Basic Customs Duty) को 12.5 फीसद कर दिया गया जबकि कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) 2.5 फीसद पहले की तरह ही बना रहा.  

इसका असर क्या हुआ: विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के अनुमान के मुताबिक, इस शुल्क बढ़ोतरी से 2022 में थोड़े समय के लिए उपभोक्ता मांग में लगभग 28 टन की कमी आई.

आयात के आंकड़ों ने भी इस बात की पुष्टि की. मई 2022 में भारत ने 107 टन सोना आयात किया था लेकिन शुल्क बढ़ने के बाद तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में आयात कम ही रहा. हालांकि, जैसा पहले से होता रहा है, इस बार भी वैसा ही हुआ. प्रभावी टैक्स 18 फीसद से ऊपर जाने के कारण तस्करी फिर बढ़ गई. एजेंसियों ने गैरकानूनी तरीके से लाए जा रहे सोने की ज्यादा मात्रा पकड़े जाने की बात कही.  

2024: शुल्क 15 फीसद से घटाकर 6 फीसद कर दिया गया

क्या बदलाव हुए: केंद्रीय बजट 2024-25 में सोने पर कुल सीमा शुल्क 15 फीसद से घटाकर 6 फीसद कर दिया गया. यह सोने के आयात पर लगने वाले टैक्स में अब तक की सबसे बड़ी कटौती थी. जून 2013 के बाद अब सोने पर सबसे कम टैक्स लगने लगा. सोने पर (अपरिष्कृत सोने पर) सीमा शुल्क 14.35 फीसद से घटकर 5.35 फीसद हो गया. ये बदलाव 24 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए.

इसका असर क्या हुआ: इसका असर तुरंत देखने को मिला. घरेलू सोने की कीमतों में महीने दर महीने 6 फीसद की गिरावट आई, जबकि अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची बनी रहीं. अंतरराष्ट्रीय कीमतें साल-दर-साल आधार पर 10 फीसद अधिक रहीं. घरेलू सोना, जो लगातार पांच महीनों से कम कीमत पर बिक रहा था, घोषणा के तुरंत बाद ही प्रीमियम पर पहुंच गया.

आयात की मात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई. अगस्त 2024 में सोने के आयात में 221 फीसद की बढ़ोतरी हुई. ऐसा इसलिए क्योंकि त्योहारी सीजन की मांग और शुल्क में कटौती के चलते सोने का स्टॉक फिर से भरा गया. वित्त वर्ष 2025 में कुल आधिकारिक सोने के आयात में 8 फीसद की वृद्धि हुई, जिससे पता चलता है कि तस्करी में काफी कमी आई.

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने फरवरी 2025 में इस बात की पुष्टि की कि जुलाई 2024 में शुल्क में कटौती के बाद सोने की तस्करी में काफी कमी आई.

Read more!