बजट 2025 को विधानसभा चुनावों, संघ और एनडीए के सहयोगियों ने कैसे प्रभावित किया?
बीजेपी के लोकसभा चुनाव में उम्मीद से कमतर प्रदर्शन के बाद हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों से हासिल आत्मविश्वास के बीच इस बार के केंद्रीय बजट पर लोगों की खास नजर थी

इस बार के केंद्रीय बजट में एक बड़े सुधारवादी एजेंडा, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भावनाओं का ख्याल रखा गया है, के साथ ही विधानसभा चुनावों और गठबंधन की मजबूरियों की छाप साफ-साफ देखी जा सकती है. लोकसभा चुनावो में बीजेपी के निराशाजनक प्रदर्शन लेकिन उसके बाद हरियाणा और महाराष्ट्र की जीत से हासिल आत्मविश्वास के बीच सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी थीं.
इस बजट में कुछ खास चीजों का ध्यान रखा गया है, मसलन इनकम टैक्स में छूट के माध्यम से वेतनभोगी वर्ग को भारी राहत प्रदान करना, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) को प्रोत्साहन देना, रेहड़ी-पटरी वालों, किसानों और अन्य लोगों को अधिक और आसान पूंजी तक पहुंच प्रदान करना और दो भविष्योन्मुखी क्षेत्रों - क्लीन-टेक मैन्युफैक्चरिंग और अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना शामिल हैं.
चाहे बजट 2025 की ऊपर लिखी घोषणाएं हों या बीमा में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) या दुर्लभ और जीवनरक्षक दवाओं सहित अलग-अलग उत्पादों पर सीमा शुल्क को कम करने और छूट देने की दो बड़ी घोषणाएं, सारी प्लानिंग RSS और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर की गई. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन की स्थापना और एमएसएमई के लिए निवेश और टर्नओवर सीमाओं को संशोधित करने सहित संघ की कई मांगों को स्वीकार किया. इसके अलावा, उन्होंने फार्म गेट और किसानों की बाजार तक पहुंच के तौर-तरीकों में सुधारों के साथ कृषि क्षेत्र को खोलने की दिशा को बनाए रखा. फिलहाल कुछ किसान यूनियन पंजाब में विरोध कर रही हैं और MSP के लिए कानूनी प्रावधानों की मांग कर रही हैं, मगर इसका कोई भी समाधान बजट 2025 में नहीं मिला.
सहयोगियों के साथ संबंध
जिस बात ने सबका ध्यान खींचा, वह थी चुनावी राज्य बिहार में घोषित परियोजनाएं. बिहार में एनडीए की सहयोगी दल जनता दल (यूनाइटेड) सरकार की अगुवाई कर रही है. पिछले बजट से उलट, आंध्र प्रदेश के लिए कोई बड़ी सौगात नहीं थी, जहां बीजेपी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली सरकार में जूनियर पार्टनर है. मोदी सरकार का अस्तित्व 12 जेडी(यू) और 16 टीडीपी सांसदों के समर्थन पर काफी हद तक निर्भर है.
बिहार को मिथिलांचल क्षेत्र में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना, मखाना बोर्ड, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान और मौजूदा दो हवाई अड्डों के विस्तार के साथ-साथ आईआईटी पटना के लिए वित्तीय सहायता मिली है. ये परियोजनाएं सीधे तौर पर उन इलाकों को प्रभावित करेंगी जहां बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की पारंपरिक रूप से मजबूत उपस्थिति रही है. हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने राज्य के लिए सड़क संपर्क, बिजली और बाढ़ प्रबंधन या विशेष श्रेणी का दर्जा देने के लिए 59,000 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की थी, लेकिन ये बजट परियोजनाएं भी कोई छोटी रकम नहीं हैं.
बजट पेश होने से एक पखवाड़ा पहले, बीजेपी नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तथा वित्तमंत्री सम्राट चौधरी राज्य की कुछ खास मांगों के साथ नई दिल्ली में थे. बजट 2025 में दरभंगा हवाई अड्डे को बेहतर बनाने, राजगीर और भागलपुर में नए हवाई अड्डे बनाने और रक्सौल हवाई अड्डे को वित्तपोषित करने का प्रावधान किया गया है. बीजेपी को लगता है कि राज्य के उत्तरी हिस्से को प्रभावित करने वाली इनमें से कई परियोजनाएं पार्टी के लिए मददगार होंगी.
प्रोजेक्ट दिल्ली
5 फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव का भी बजट पर काफी असर पड़ा है. बीजेपी का लक्ष्य इनकम टैक्स में भारी छूट और कारोबार को आसान बनाने के लिए किए गए सुधारों से सीधे फायदा उठाना है. भले ही नए टैक्स स्लैब, जिसने 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स-फ्री कर दिया है, व्यापक स्तर पर खपत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए गए हैं मगर बीजेपी इसे दिल्ली के मिडिल क्लास के लिए एक 'तोहफे' के रूप में परोसने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी.
मिडिल क्लास बीजेपी का प्रमुख वोट बैंक रहा है और पिछले दो सालों से RSS और उसके सहयोगी संगठन लोगों को अपने बढ़ते खर्चों को पूरा करने के लिए अधिक नकदी उपलब्ध कराने के उपायों की मांग कर रहे थे.
पिछले साल लोकसभा चुनाव के निराशाजनक नतीजों की बीजेपी की समीक्षा और संघ की राय से यह संकेत मिला था कि मिडिल क्लास के वोट बैंक में इस बात को लेकर नाराजगी है कि टैक्स स्लैब लोगों की जमीनी आर्थिक स्थिति के हिसाब से सही नहीं हैं. साथ ही, पिछले कुछ सालों में इनकम टैक्स में किए गए बदलाव सिर्फ कहने मात्र के रहे. पिछले दो वित्त वर्षों में टैक्स कलेक्शन (डायरेक्ट और इनडायरेक्ट दोनों) लक्ष्य से अधिक रहा है.
इनकम टैक्स में छूट का राजनीतिक असर सबसे पहले दिल्ली चुनाव में दिख सकता है, जहां बीजेपी अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली आम आदमी पार्टी (आप) के साथ कड़ी टक्कर में है. सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली में 53 प्रतिशत मिडिल क्लास ने 2020 में आप को वोट दिया था. बीजेपी को उनके 39 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से कहीं अधिक था.
सीतारमण ने पिछले कुछ सालों में शुरू किए गए टीसीएस/टीडीएस कम्प्लाइंस को खत्म करने के लिए सुधारों का भी वादा किया, जो मध्यम और छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया था.
संघ का हाथ
सीतारमण की ओर से किए गए नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन और क्लीन-टेक मैन्युफैक्चरिंग की घोषणा में संघ परिवार की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है. संघ से संबद्ध स्वदेशी जागरण मंच (SJM) पिछले एक दशक से इस मुद्दे को आगे बढ़ा रहा है. एसजेएम ने हाल ही में भारत जलवायु मंच का समर्थन किया था, जो घरेलू निर्माताओं को अपनी चिंताओं को सक्रिय रूप से उठाने के लिए गोलबंद करता है. SJM विश्व स्तरीय उत्पादों की भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक तर्कसंगत नजरिए की भी मांग कर रहा था और उसकी दलील है कि भारत कच्चे तेल के आयात पर जो खर्च करता है, जल्दी है क्लीन-टेक इम्पोर्ट के लिए किया जाने वाला खर्चा उससे ज्यादा हो जाएगा. इसके अलावा SJM ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाने के लिए एक मिशन जैसा रवैया अपनाने की भी बात कही थी.
SJM बीमा में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं सहित अलग-अलग उत्पादों पर टैरिफ बाधाओं को कम करने से नाखुश है. SJM इन दवाओं के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम की मांग कर रहा था. हालांकि, सीतारमण ने यह शर्त रखी कि 100 प्रतिशत एफडीआई का विकल्प चुनने वाली बीमा कंपनियों को भारत में पॉलिसी प्रीमियम का निवेश करना होगा. हालांकि यहां सोचने वाली बात है कि इन नियम-कायदों का पालन हो रहा है कि नहीं, इसकी निगरानी कैसे की जाएगी, लाभांश को कैसे वापस किया जाएगा और पुनर्बीमा (जब एक बीमा कंपनी दूसरी बड़ी कंपनी से अपना बीमा कराती है) कैसे होगा. भारत में पुनर्बीमा क्षमता बहुत अधिक नहीं है और विदेशी खिलाड़ियों का वर्चस्व है. मंत्रालय फिलहाल मसौदा बीमा विधेयक पर काम कर रहा है.
भारतीय मजदूर संघ की ओर से पहचान पत्र, ई-श्रम पोर्टल पंजीकरण और पीएम जन आरोग्य योजना के तहत गिग वर्कर्स (स्विगी, जेप्टो जैसी कंपनियों के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग) के लिए स्वास्थ्य सेवा की मांग की गई थी और बजट 2025 में इसे शामिल भी किया गया. स्ट्रीट वेंडर्स के लिए पीएम स्वनिधि योजना को फिर से शुरू करने की मांग, बैंकों से बढ़े हुए ऋण, 30,000 रुपये की सीमा वाले यूपीआई-लिंक्ड क्रेडिट कार्ड और क्षमता निर्माण सहायता को भी सीतारमण ने समर्थन दिया.
पिछले साल जून में लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीद से कम प्रदर्शन के बाद से संघ मोदी सरकार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मुखर आलोचना कर रहा था. तब से नीति निर्धारण के साथ-साथ बीजेपी के कामकाज पर भी संघ का प्रभाव बढ़ गया है.
बजट में घोषित एमएसएमई वर्गीकरण को फिर से तैयार करना, संघ से जुड़े एक अन्य संगठन लघु उद्योग भारती (एलयूबी) की लंबे समय से मांग रही है. एमएसएमई वर्गीकरण के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमा को 2.5 और 2 गुना बढ़ा दिया गया है. यह पूंजी तक पहुंच को और आसान बनाने के अलावा उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों के लिए 5 लाख रुपये की सीमा के साथ कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड शुरू करने की प्रतिबद्धता (पहले वर्ष में 10 लाख कार्ड जारी किए जाएंगे) और 10,000 करोड़ रुपये के नए योगदान के साथ स्टार्ट-अप के लिए एक नया फंड ऑफ फंड स्थापित करने की प्रतिबद्धता के साथ है.
एसजेएम और एलयूबी दोनों ही टिकाऊ और नई तरह के खिलौनों के लिए एक वैश्विक केंद्र स्थापित करने पर जोर दे रहे थे. इसकी शुरुआत SJM की ओर से चीनी आयात को रोकने के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं की मांग से हुई, जिसे उन्होंने 2018 में हासिल कर लिया. इस बार भारत में क्लस्टर स्थापित करने के लिए जोर दिया गया.
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