सिम बाइंडिंग क्या है, यह WhatsApp-Telegram यूज करने के तरीके को कैसे बदलने वाला है?

भारत सरकार ने सिम बाइंडिंग को लेकर एक नया नियम लागू करने की तैयारी कर ली है, जिसके बाद देश में कई बड़े मैसेजिंग और सोशल कम्युनिकेशन ऐप्स के इस्तेमाल करने का तरीका बदल जाएगा

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

30 नवंबर को भारत सरकार ने मैसेजिंग ऐप को लेकर सिम बाइंडिंग पर एक अहम आदेश जारी किया है. सरकार के इस फैसले से कई बड़े मैसेजिंग और सोशल कम्युनिकेशन ऐप्स के इस्तेमाल करने का तरीका बदल जाएगा.

इसमें WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat, JioChat, Arattai और Josh जैसे लोकप्रिय ऐप्स शामिल हैं. अगर आप भी इन्हें इस्तेमाल करते हैं तो आने वाले महीनों में आपका भी अनुभव बदलने वाला है.

सरकार ने मैसेजिंग ऐप्स को लेकर जारी अपने इस आदेश में क्या कहा है?

अभी मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ इंस्टॉलेशन के वक्त मोबाइल नंबर का एक बार वेरिफिकेशन करते हैं. इसके बाद ऐप सिम हटाने या नंबर बंद होने पर भी चलता रहता है. बस इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए. लेकिन, अब सरकार ने आदेश जारी कर कहा है कि वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स मोबाइल में एक्टिव सिम कार्ड के बिना नहीं चल पाएंगे.

सिर्फ मोबाइल या ब्राउजर में भी मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल करने का अनुभव बदलेगा?

वेब ब्राउजर यानी लैपटॉप या डेस्कटॉप के जरिए लॉगिन करने वाले यूजर के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है. अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हर छह घंटे में यूजर को लॉगआउट करना होगा. इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगिन हो सकेगा.

क्या मैसेजिंग ऐप्स इस्तेमाल के लिए नंबर एक्टिव होना जरूरी है?

हां, नंबर एक्टिवेट होने पर ही इन ऐप्स का प्रयोग किया जा सकेगा. अगर आपके मोबाइल में लगा सिम बंद हो गया है या एक्टिव नहीं हो तो इसे इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.

भारत सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है?

सरकार का दावा है कि इससे साइबर ठगों का पता लगाने में मदद मिलेगी. सिम-बाइंडिंग से स्पैम, फर्जी कॉल और धोखाधड़ी पर लगाम लगने की उम्मीद है.

क्या लैपटॉप या सिस्टम में ऐप्स के इस्तेमाल में कोई बदलाव होगा?

लैपटॉप-डेस्कटॉप पर मैसेजिंग ऐप को हर छह घंटे में दोबारा QR कोड से लॉगिन करना होगा. ऐप तभी चलेगा जब फोन में एक्टिव SIM लगी होगी. अगर SIM बंद हो गई या हटा दी गई, तो कंप्यूटर और मोबाइल दोनों पर ऐप तुरंत बंद हो जाएगा. इस नियम को लागू करने के लिए कंपनियों को तीन महीने का समय दिया गया है.

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