सोने में कितना निवेश आपके पोर्टफोलियो को मजबूती दे सकता है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के क्षेत्रीय CEO सचिन जैन बताते हैं कि सोना कैसे एक भरोसेमंद वित्तीय संपत्ति बन रहा है और कैसे भारत सोने के कारोबार का हब बन सकता है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

सोना हमेशा से भारतीय परिवारों के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा रहा है लेकिन अब इसकी भूमिका तेजी से बदल रही है. पहले सोने का इस्तेमाल मुख्य रूप से आभूषण, विरासत और परिवार की संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए होता था लेकिन अब यह निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने वाला एक प्रमुख वित्तीय साधन भी बनता जा रहा है.

इंडिया टुडे स्मार्ट मनी फाइनेंशियल कॉन्क्लेव में आयोजित एक फायरसाइड चैट (एक अनौपचारिक संवाद या चर्चा जिसमें मॉडरेटर और गेस्ट अपने-अपने विचार साझा करते हैं) के दौरान वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के क्षेत्रीय CEO सचिन जैन ने कहा कि पिछले तीन दशकों में ग्लोबल गोल्ड मार्केट में बड़ा बदलाव आया है.

इसकी वजह निवेश की बढ़ती मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां हैं. इससे सोने के इस्तेमाल का तरीका भी काफी बदल गया है. जैन ने कहा, "30 साल पहले केंद्रीय बैंक सोने के शुद्ध विक्रेता थे और सोने का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आभूषण बनाने में होता था. आज स्थिति बदल गई है और अलग-अलग क्षेत्रों तथा देशों में सोने की मांग बढ़ी है."

उन्होंने बताया कि हर साल इस्तेमाल होने वाले कुल सोने में लगभग 20 फीसद केंद्रीय बैंक खरीदते हैं, करीब 30 प्रतिशत आभूषण बनाने में इस्तेमाल होता है, लगभग 43 फीसद वित्तीय निवेश के लिए और 6-7 फीसद तकनीक, खासकर स्मार्टफोन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में उपयोग होता है. जैन के मुताबिक, भारत, चीन और मध्य-पूर्व जैसे विकासशील देश अब दुनिया में होने वाली कुल सोने की खपत का लगभग 74 फीसद हिस्सा रखते हैं.

सोने के वित्तीय साधन के रूप में बढ़ते इस्तेमाल ने इसे दुनिया की सबसे अधिक खरीदी-बेची जाने वाली संपत्तियों में शामिल कर दिया है. जैन ने कहा, "पिछले साल सोने में वित्तीय निवेश की मांग 6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा रही. यानी हर दिन करीब 18,70,000 करोड़ रुपए मूल्य के सोने का कारोबार हुआ. इससे सोना दुनिया की सबसे अधिक खरीदी-बेची जाने वाली संपत्ति बन गया. ऐसे में सोने की नई भूमिका और उसकी अहमियत नजरअंदाज नहीं की जा सकती."

वैश्विक कर्ज बढ़ने से सोने की भूमिका मजबूत हो रही है

पिछले साल सोने ने 56 से ज्यादा बार रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की और भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली संपत्तियों में शामिल रहा. हालांकि जैन का मानना है कि इसके पीछे असली वजह कुछ और है.

उन्होंने कहा, "सोने की अहमियत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह दुनिया में बढ़ता कर्ज और खासकर अमेरिका का कर्ज है." वैश्विक कर्ज 37 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का उल्लेख करते हुए जैन ने कहा कि अब कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.

उन्होंने कहा, "वैश्विक रिजर्व के लिए भरोसा अब सोने की ओर बढ़ रहा है." उन्होंने बताया कि केंद्रीय बैंक और बड़े संस्थागत निवेशक लगातार सोना खरीद रहे हैं.

भारत की सबसे बड़ी 'सोने की खान' घरों के अंदर है

भारत में लोगों का सोने से गहरा भावनात्मक रिश्ता है लेकिन जैन का मानना है कि देश का सबसे बड़ा अवसर घरों में रखे सोने का बेहतर उपयोग करना है. उन्होंने कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी सोने की खान वास्तव में लोगों के घरों में रखा सोना है."

जैन के अनुसार, उनका उद्देश्य लोगों से उनके गहने लेना नहीं है, बल्कि ऐसे तरीके विकसित करना है जिससे घरों में पड़ा निष्क्रिय सोना आय का स्रोत बन सके और मालिकों का उस पर अधिकार भी बना रहे. उन्होंने कहा, "यह सोना देने की बात नहीं है. सवाल यह है कि इस सोने का उपयोग उत्पादक तरीके से कैसे किया जाए."

उन्होंने माना कि पहले की गोल्ड मोनेटाइजेशन योजनाएं अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं. उनका सुझाव है कि भविष्य की योजनाएं तकनीक आधारित, सरल और पेशेवर तरीके से संचालित होनी चाहिए. जैन ने यह भी बताया कि भारत के घरों में मौजूद कुल सोने का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गहनों के बजाय सोने की ईंटों और सिक्कों के रूप में है जिन्हें वित्तीय उत्पादों में शामिल करना ज्यादा आसान है.

जैन के मुताबिक, "बार और सिक्कों के साथ आपका रिश्ता मुख्य रूप से वित्तीय होता है."

गोल्ड ETF की लोकप्रियता बढ़ रही है

जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोना शामिल करना चाहते हैं, उन्हें जैन भावनात्मक नहीं बल्कि तार्किक तरीके से निवेश करने की सलाह देते हैं. उन्होंने कहा, "वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल हमेशा यह सलाह देती है कि अगर आपके निवेश पोर्टफोलियो का 10 से 15 फीसद हिस्सा पूरी तरह सोच-समझकर सोने में लगाया जाए, तो इससे पोर्टफोलियो की सेहत बेहतर होती है."

निवेश के विभिन्न विकल्पों में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) सबसे मजबूत विकल्पों में से एक बनकर उभर रहे हैं, क्योंकि ये नियामकीय निगरानी में होते हैं, इनके पीछे वास्तविक सोना होता है और इनमें आसानी से खरीद-बिक्री की जा सकती है. जैन ने बताया कि भारत में गोल्ड ETF के तहत प्रबंधन वाली संपत्ति (AUM) दो साल में लगभग दोगुनी हो गई है. 2024 की शुरुआत में यह करीब 40 टन थी, जो 2026 की शुरुआत तक बढ़कर 98 टन हो गई. उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि ETF जैसे उत्पाद अब तेजी से आगे बढ़ने वाले हैं."

डिजिटल गोल्ड भी तेजी से लोकप्रिय हुआ है और करीब 14 करोड़ भारतीय इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, जैन का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए इसका नियमन जरूरी है. उन्होंने कहा, "डिजिटल गोल्ड उद्योग खुद भी नियमन की मांग कर रहा है. वे चाहते हैं कि उन पर नियम लागू हों."

2047 के भारत के विजन में सोने की भूमिका

भविष्य की ओर देखते हुए जैन का मानना है कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में सोना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए देश में सोने के खनन को लाभदायक बनाना होगा, आभूषण निर्यात बढ़ाना होगा, सोने से जुड़े पर्यटन को बढ़ावा देना होगा और पूरे क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता लानी होगी.

हीरा उद्योग में भारत की सफलता का उदाहरण देते हुए जैन ने कहा कि भारत के पास दुनिया का 'ज्वैलर टू द वर्ल्ड' बनने की क्षमता है. उन्होंने कहा, "हमने हीरे के निर्यात में दुनिया में अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन सोने के मामले में ऐसा नहीं कर पाए हैं. इसमें बड़ी संभावनाएं हैं."

उन्होंने कहा कि अभी तक ध्यान मुख्य रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीयों की जरूरतें पूरी करने पर रहा है लेकिन अब इस सोच को बदलने की जरूरत है. उनके अनुसार, यह लक्ष्य तभी हासिल होगा जब कारीगरों की कामकाजी परिस्थितियां बेहतर हों, डिजाइन में इनोवेशन बढ़े और भारतीय जूलरी ब्रांड दुनिया भर में अपनी पहचान बनाएं.

जैन का यह भी मानना है कि भविष्य में भारत को वैश्विक सोना मूल्य तय करने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा, "सोने की कीमत तय करने में भारत की लगभग कोई भूमिका नहीं है. हमें केवल कीमत स्वीकार करने वाला नहीं बल्कि कीमत तय करने वाला देश बनना चाहिए."

जैन के अनुसार, जैसे-जैसे सोना तकनीक आधारित संपत्ति बनता जाएगा, उसमें निवेश करना और आसान होगा. उन्होंने कहा, "सोना पूरी तरह आसानी से खरीदा-बेचा जा सकेगा, 24 घंटे उपलब्ध रहेगा और पूरी तरह असली होगा. यह किसी भी आधुनिक निवेश साधन की बराबरी करेगा."

खास बातें-

- सोना अब केवल आभूषण नहीं, बल्कि एक वित्तीय संपत्ति बन रहा है. दुनिया में सोने की कुल खपत का 43 फीसद हिस्सा अब निवेश के लिए इस्तेमाल होता है.
- केंद्रीय बैंक अब बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं जबकि 30 साल पहले वे शुद्ध विक्रेता थे.
- भू-राजनीतिक तनाव से ज्यादा अब वैश्विक कर्ज सोने की मांग बढ़ाने की बड़ी वजह बन रहा है. देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल निवेश पोर्टफोलियो का 10-15 फीसद हिस्सा सोने में रखने की सलाह देती है, ताकि जोखिम कम हो और निवेश में संतुलन बना रहे.
- भारत का सबसे बड़ा अप्रयुक्त सोना लोगों के घरों में रखा हुआ है, जिसे बेहतर वित्तीय उत्पादों के जरिए उपयोग में लाया जा सकता है.
- गोल्ड ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं क्योंकि वे नियामकीय निगरानी में हैं. वास्तविक सोने से जुड़े हैं और उनमें आसानी से निवेश व खरीद-बिक्री की जा सकती है. इसलिए वे छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं.
- अगर भारत विनिर्माण, कारीगरों के कल्याण, डिजाइन क्षमता और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करे, तो वह दुनिया का 'जूलर टू द वर्ल्ड' बन सकता है.
- भारत को वैश्विक सोना बाजार में केवल कीमत स्वीकार करने वाला नहीं, बल्कि कीमत तय करने वाला देश बनने का लक्ष्य रखना चाहिए.

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