दिल्ली में AQI 400 के पार, अब यहां एक दिन सांस लेना 30 सिगरेट फूंकने जितना जहरीला!

दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले 39 केंद्रों में से 19 ने आज AQI को ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया है

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

28 नवंबर को दिल्ली की वायु गुणवत्ता खतरनाक रूप से गंभीर श्रेणी के करीब पहुंच गई है. राजधानी के कई निगरानी स्टेशनों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का स्तर 400 से ऊपर दर्ज किया.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली शहर का ओवरऑल AQI सुबह 6 बजे 384 था, जो बहुत खराब श्रेणी में है. इसके अलावा, दिल्ली के 39 में से 19 निगरानी केंद्रों पर AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज किया गया.

इन सबके बावजूद कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये खबर छपने लगी है कि दिल्ली में अब सांसों पर गहराया संकट छंटने लगा है. हवा की क्वालिटी में जरा सा सुधार होते ही दिल्ली में GRAP-3 की पाबंदियां हटा दी गई.

इसमें कोई दो राय नहीं कि दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पिछले सप्ताह 3 दिन सही था. लेकिन, क्या अभी यह कहना सही है कि अब संकट छंटने लगा है? कितने AQI तक हवा को साफ माना जाता है? इन सवालों के जवाब जानते हैं.

क्या ये कहा जा सकता है कि दिल्ली में सांसों पर गहराया संकट छंटने लगा है?

दिल्ली में हवा की गुणवत्ता को लेकर ये कहना अभी सही नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली सरकार ने AQI में सुधार होते ही 26 नवंबर को GRAP-III प्रतिबंध हटाने का निर्देश दिया. इस आदेश के बमुश्किल 48 घंटे बाद, दिल्ली-NCR के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी गई.

सिर्फ दिल्ली नहीं बल्कि नोएडा की वायु गुणवत्ता भी गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है. इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा (380), गाजियाबाद (351) और गुरुग्राम (318) बेहद खराब श्रेणी में बने हुए हैं. दिल्ली और इसके आसपास के इलाके में प्रदूषण के हॉटस्पॉट में तेजी से वृद्धि देखी गई है.

आनंद विहार (411), बवाना (414), चांदनी चौक (407), नरेला (407), जेएलएन स्टेडियम (401), बुराड़ी (402), अशोक विहार (417) और आया नगर (402) AQI है.

कितने AQI तक हवा को साफ माना जाता है?

CPCB के अनुसार AQI का स्तर 0 से 50 ‘अच्छा', 51 से 100 ‘संतोषजनक', 101 से 200 ‘मध्यम', 201 से 300 ‘खराब', 301 से 400 ‘बेहद खराब' और 401 से 500 ‘गंभीर' माना जाता है. इस समय दिल्ली के कई इलाके में हवा गंभीर श्रेणी में है. यह बच्चों और बुजुर्गों के हेल्थ पर सीधे असर करता है.

दिल्ली की हवा में एक दिन में सांस लेना कितने सिगरेट के बराबर है?

गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ फेफड़े रोग विशेषज्ञ अरविंद कुमार के मुताबिक, जब वायु गुणवत्ता 450-500 के बीच होती है, तो यह शारीरिक रूप से 25-30 सिगरेट पीने के बराबर होती है. उन्होंने आगाह किया कि इतने ज्यादा प्रदूषण से गर्भ में मौजूद बच्चों, बुजुर्गों समेत सभी आयु वर्ग के लोगों को खतरा है.

ठंडा के मौसम में ही हवा इतनी प्रदूषित क्यों होती है?

इसके लिए दिल्ली की लोकेशन काफी हद तक जिम्मेदार है. पंजाब-हरियाणा-दिल्ली-उत्तर प्रदेश और बिहार तक की एक पट्टी में सर्दियों के दौरान हवा गर्म होकर धरती से ऊपर नहीं उठ पाती . इसके कारण धरती की सतह पर जितनी भी सॉलिड चीजें या कहें ठोस कण हैं. ये जमीन से 50 से 100 मीटर ऊपर उठकर एक लॉकेबल लेयर बना लेते हैं. मतलब ये है कि ये हवा वायुमंडल के निचले लेवल पर ही लॉक रहती है.

इस लेयर के नीचे की जमीन के पास की हवा ठंडी होती है और ठंडी हवा में मूवमेंट न के बराबर होता है. प्रदूषण के पार्टिकल भी इसी हवा में मिल जाते हैं. यही कारण है कि सर्दियों में प्रदूषण बढ़ता है.

चूंकि दिल्ली में आबादी के दबाव और सड़कों पर बड़ी संख्या के कारण आम दिनों में भी वायु प्रदूषण रहता है, लेकिन सर्दियों में यह गंभीर से खतरनाक स्थिति तक पहुंच जाता है.

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