अब जापान भी आजमा रहा 'क्रिकेट कूटनीति'

भारत में जापानी दूतावास में मंत्री (राजनीतिक) नोरियाकी आबे ने India Today Indo-Japan Conclave में कहा कि खेल 'सॉफ्ट पावर' का बड़ा जरिया बन चुके हैं

नोरियाकी आबे
नोरियाकी आबे

जब लोग जापान की सॉफ्ट पावर की बात करते हैं तो उन्हें जापानी कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवेल्स, एनिमेटेड कार्टून, एनिमेटेड फिल्म, फैशन, खाना और टेक्नोलॉजी की याद आती हैं. हालांकि अब क्रिकेट जापान को दूसरे देशों से जोड़ने वाला एक बड़ा माध्यम बनता जा रहा है.

नोरियाकी आबे भारत में जापानी दूतावास में मंत्री (राजनीतिक) हैं. उन्होंने 22 मई को दिल्ली में इंडिया टुडे के India Today Indo-Japan Conclave में कहा कि ब्रिटिश लोग 1863 के दौरान क्रिकेट को योकोहामा लाए. 1868 में जापान में पहला क्रिकेट क्लब बना लेकिन बाद में बेसबॉल ही यहां का मुख्य खेल बन गया.

1980 के दशक में अपने देश लौटे जापानी छात्रों ने क्रिकेट को एक लोकप्रिय खेल के रूप में दोबारा स्थापित करने में मदद की. करीब 4 साल बाद 1984 में जापान क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना हुई और यह 1989 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का सदस्य बन गया. उन्होंने कहा कि क्रिकेट अब जापान में हाशिये का खेल नहीं है. इसी कारण यहां 8,000 खिलाड़ी और 14 उच्च स्तरीय क्रिकेट मैदान हैं.

ये बातें 'सॉफ्ट पावर: द न्यू इंडिया-जापान कल्चरल ब्रिज' सत्र के दौरान नोरियाकी आबे ने कही है. आबे ने आगे कहा, "जापान में क्रिकेट का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि यहां की टीम में हर देश के लोग शामिल हैं. जापान की टीमों में भारत, न्यूजीलैंड, नेपाल और बांग्लादेश के खिलाड़ी शामिल हैं."

नोरियाकी आबे के मुताबिक, जापान की क्रिकेट टीम को इस विविधता से लाभ मिल रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि क्रिकेट सीमाओं के पार समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच करीबी संबंध हैं, फिर भी दोनों देशों ने अभी तक कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच नहीं खेला है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि 2027 से पहले ऐसा होने की पूरी संभावना है. खासकर तब, जब भारत और जापान राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे.

वैसे तो क्रिकेट ही एकमात्र ऐसा खेल नहीं है जिसमें भारत और जापान मिलकर काम कर रहे हैं. जूडो, रग्बी और तैराकी जैसे खेलों में भी दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग है. गुजरात और ओडिशा में जापानी कोच रग्बी में युवा खिलाड़ियों को ट्रेंड कर रहे हैं. इसी तरह लखनऊ में जापानी कोच पैरा जूडो में भारतीय खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं.

आबे ने जापान के इंडो-पैसिफिक विजन के बारे में बताया. जापान चाहता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र खुला, स्वतंत्र और नियम-आधारित हो, जहां सभी छोटे-बड़े देशों का सम्मान हो. उन्होंने कहा कि क्रिकेट इस पूरे क्षेत्र को बहुत आसानी से जोड़ता है. जहां-जहां भारतीय समुदाय रहता है वहां क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा बन जाता है और खेल बिना शब्दों के कूटनीति बन जाता है.

आबे ने बताया कि इस साल नागोया एशियन गेम्स में क्रिकेट खेला जाएगा और 2028 में यह ओलंपिक में भी शामिल होगा. उन्होंने कहा कि अब क्रिकेट कोई मामूली खेल नहीं बल्कि दुनिया के भविष्य का खेल बन चुका है.
 
इस पूरे मामले में एक्सपर्ट की राय है कि भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं है. यह पूरे समाज की भावनाओं का हिस्सा बन चुका है. जापान के बच्चे अब क्रिकेट खेलने में बहुत उत्साह और रुचि दिखा रहे हैं. यहीं भारत की भूमिका आती है. जापान के लिए भारत क्रिकेट का महान देश होने के साथ-साथ सीखने और प्रेरणा का बड़ा स्रोत भी है.

भारत ने क्रिकेट को लेकर दुनिया का सबसे बेहतरीन खेल इकोसिस्टम बना लिया है. चाहे कोचिंग हो, नई प्रतिभाओं को तराशना हो, स्टेडियम-इंफ्रास्ट्रक्चर हो, बिजनेस हो या लोगों का जोश.

यही कारण है कि क्रिकेट अब जापान और भारत के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु बन रहा है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सॉफ्ट पावर कूटनीति का अनोखा हथियार भी साबित हो सकता है. जापान की अनुशासन और ट्रेनिंग की शैली भारतीय खेल जगत को प्रभावित कर रही है. यह पदक और रैंकिंग से बहुत आगे की बात है.

खेल सॉफ्ट पावर का सबसे बेहतरीन रूप है. इसमें इंसान एक-दूसरे से जुड़ते हैं, जो सिर्फ साझा मेहनत, हार न मानने की भावना, विनम्रता, टीम वर्क, सम्मान और होड़ के जरिए ही संभव है. ये मूल्य खेल के साथ-साथ कूटनीति में भी बहुत काम आते हैं.

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