गिरगिट के डिफेंस से डेमोक्रेसी में प्रतिरोध तक, क्या है मिमिक्री की थ्योरी और इतिहास?
लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के निलंबन के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री की और राहुल गांधी ने इसका वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसे लेकर काफी विवाद छिड़ा हुआ है

एक पेड़ पर गिरगिट चढ़ रहा है. चढ़ते वक्त उसका रंग हरा है, लेकिन चढ़ाई पूरी होते-होते वह धब्बेदार भूरे रंग में बदल जाता है. साइंस इसे मिमिक्री (Mimicry) कहता है. विज्ञान की यह कहानी कला के क्षेत्र में भी प्रचलित है. कलाकार किसी अन्य एक्टर से लेकर नेता तक की मिमिक्री करते हैं. उनके हाव-भाव और बोलने के ढंग की नकल करते हैं. ऐसा ही जब संसद परिसर में तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने किया तो राजनीतिक गलियारे में विवाद और बहस शुरू हो गई.
लोकसभा और राज्यसभा से विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया था. निलंबन के बाद सांसद संसद की सीढ़ी पर बैठकर विरोध जता रहे थे. इनमें कल्याण बनर्जी भी बैठे थे. वे अचानक उठे और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की मिमिक्री करने लगे. इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी वीडियो बनाते दिखे. मिमिक्री खत्म हुई और विवाद शुरू. सभापति जगदीप धनखड़ ने इसे जाट समाज और किसान के बेटे का अपमान बताया. कल्याण बनर्जी के खिलाफ दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई.
राजनीतिक विवाद के बीच यह सवाल उठने लगे कि क्या संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति की मिमिक्री जायज है? इस सवाल का जवाब सीधे-सीधे देना मुश्किल है. हालांकि इस बहाने मिमिक्री के साइंस और आर्ट पर जरूर कुछ दिलचस्प बातें साझा की जा सकती हैं.
लैटिन में एक शब्द है मिमिकस (Mimicus) और ग्रीक में मिमिकोज (Mimikos) दोनों का ही अर्थ है 'नकल'. इससे बना 'मिमिक्री' जिसका अर्थ है नकल करना. जीव विज्ञान में मिमिक्री की थ्योरी पर सबसे पहली बातचीत 1862 में सुनने को मिलती है. हेनरी बेट्स नाम के वैज्ञानिक ने छोटे-छोटे जीव-जंतुओं के सर्वाइवल के तौर-तरीकों पर अध्ययन किया और मिमिक्री की थ्योरी दी.
बेट्स के मुताबिक इको सिस्टम में कुछ जीव ऐसे होते हैं जिन्हें कोई अन्य जीव खा जाता है. खाने वाले को 'प्रिडेटर' कहते हैं और जिसे खाया जाता है उसे 'प्रे'. प्रिडेटर से अपनी सुरक्षा के लिए प्रे नकल करता है यानी कि मिमिक्री करता है. प्रे ऐसे जीवों की मिमिक्री करता है जिन्हें नहीं खाया जा सकता है. प्रे जहां रहते हैं उस बैकग्राउंड की भी मिमिक्री करने लगते हैं, जैसा कि गिरगिट पेड़ पर चढ़ते हुए कर रहा था.
हेनरी बेट्स और दूसरे वैज्ञानिक मिमिक्री को विकास क्रम या इवॉल्यूशन (Evolution) में एक अहम पड़ाव मानते हैं. बेट्स की थ्योरी के आधार पर ये कहा जाता है कि इंसानों ने भी अपने शुरुआती दौर में दूसरे जानवरों से खुद को बचाने के लिए मिमिक्री की. जैसे आप एक कहानी याद कीजिए- दो लड़के जंगल में जाते हैं. एक पेड़ पर चढ़ना जानता था, दूसरे में ये गुण नहीं था. सामने आ धमकता है शेर. एक लड़का तो बचने के लिए पेड़ पर चढ़ गया. दूसरा वहीं ज़मीन पर लेट गया और अपनी सांसें रोक लीं जिससे वो बच जाता है. ये बेसिकली एक लाश की मिमिक्री है.
विज्ञान की तरकीब से आर्ट ने अपनी चमक बढ़ाई. दूसरे के हाव-भाव, उसके बोलने के तरीके, चलने के ढंग को कॉपी करके वैसी ही एक्टिंग की जाने लागी. ह्यूमर से भरा ये आर्ट मिमिक्री है, और इसे साधने वाले लोग मिमिक्री आर्टिस्ट बने. जैसे कि जॉनी लिवर, राजू श्रीवास्तव और ऐसे ही अन्य कई नाम. अमिताभ की भारी आवाज़ से लेकर लालू प्रसाद यादव की लटपटाई बोली तक की मिमिक्री हुई और खूब तालियां बजीं.
लोकतंत्र में प्रतिरोध और आलोचना के लिए कई तरीके आजमाए जाते हैं. इनमें एक टूल मिमिक्री भी है. मशहूर कार्टूनिस्ट राजेंद्र धोड़पकर कहते हैं, "मिमिक्री या ह्यूमर से भरा कोई भी तरीका किसी को भी बराबरी में लाने का, उसे मनुष्य होने का बोध कराने का, या कहें कि ज़मीन पर ले आने का तरीका है. इसलिए लोग कभी-कभी इससे चिढ़ते भी हैं." क्या मिमिक्री करने से किसी का अपमान होता है? राजेंद्र धोड़पकर मानते हैं, "मजाक करने से किसी का अपमान नहीं होता. लोकतंत्र में इतना संकीर्ण नहीं होना चाहिए. मिमिक्री में हम थोड़ा बढ़ा-चढ़ाकर नकल उतारते हैं, इसमें कभी-कभी ज्यादा भी हो जाता है लेकिन अपमान जैसी बात नहीं है."
कार्टूनिस्ट मंजुल याद करते हैं, "अस्सी के दशक में जॉनी लिवर को हमने पहली बार मिमिक्री करते हुए सुना. ऑडियो कैसेट आया था जिसमें जॉनी लिवर में अलग-अलग फिल्म स्टार्स की मिमिक्री करते थे. वो कोई अपमान के भाव में नहीं होता था. पॉलिटिकली बात करें तो अमेरिकन शो में राष्ट्रपति की मिमिक्री होती है, उन पर मजाक किया जाता है. लेकिन चीन में ऐसा नहीं होता."
मिमिक्री को लेकर विवादों पर मंजुल कहते हैं, "बहुत पहले एक बार जॉनी लिवर पर मुकदमा हुआ कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम की पार्टी में देश के राष्ट्रगान का मजाक बना दिया. हाल के दिनों में कपिल शर्मा के शो में एक आर्टिस्ट द्वारा मिमिक्री को लेकर केस हुआ. ऐसे में एक सोसायटी के तौर पर हमें समझना होगा कि हो सकता है कि आपका इतना दमन हो रहा कि और कोई रास्ता नहीं है प्रतिकार करने का. ऐसे में चलिए मिमिक्री के जरिए हंस ही लेते हैं."
राजेंद्र धोड़पकर मिमिक्री के इतिहास को पौराणिक कथाओं में नारद के जिक्र से जोड़ते हैं, "समाज में विदूषक हमेशा से रहे हैं. नारद का भी किस्सा है. ये लोग व्यंग्य कसते थे. इसमें कम-ज्यादा मिमिक्री ही होती थी." आर्ट हो या साइंस, मिमिक्री अपने मूल स्वभाव में एक जैसा ही है. जब हम साइंस की थ्योरी देखते हैं तो मिमिक्री की जड़ में डिफेंस दिखता है और जब आर्ट फॉर्म के तौर पर देखते हैं तो आलोचना और हास्य का मिला-जुला रूप दिखता है.