Climate India Report 2025 : इस साल के पहले 9 महीनों में करीब हर दिन मौसम बिगड़ा रहा!

Climate India Report 2025 के मुताबिक इस साल जलवायु परिवर्तन के लिहाज से कई रिकॉर्ड टूटे हैं

लू से बचने के लिए आज हे अपनाएं ये उपाय
इस साल की फरवरी बीते 124 साल में सबसे गर्म फरवरी रही

चेन्नई और आंध्र प्रदेश जैसे असामान्य भौगोलिक क्षेत्रों में बादल फटना या पूर्वोत्तर भारत में सूखा - ये असामान्य मौसमी घटनाए अब रोज़मर्रा की हक़ीक़त बनती जा रही हैं. दरअसल, लगभग हर दिन देश का कोई न कोई हिस्सा चरम मौसम का सामना कर रहा है- यह निष्कर्ष सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और डाउन टू अर्थ के ‘क्लाइमेट इंडिया 2025’  रिपोर्ट में निकला है. 

यह रिपोर्ट हर साल होने वाली चरम मौसमी घटनाओं का वार्षिक आकलन है. अब इसे इस संदर्भ में समझिए कि 2025 के पहले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) में भारत ने 99 फीसदी दिनों तक चरम मौसमी घटनाओं का सामना किया. इनमें लू और शीत लहर, बिजली गिरना और तूफान, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन शामिल थे. 

साल 2025 ने कई जलवायु रिकॉर्ड भी तोड़े. जनवरी 1901 के बाद भारत का पांचवां सबसे सूखा महीना था, जबकि फरवरी 124 साल में सबसे गर्म फरवरी रही. सितंबर में देश ने उस महीने के लिए सातवां सबसे अधिक औसत तापमान दर्ज किया. यह पैटर्न संयोग नहीं था: 2024 में देश ने 366 में से 322 दिन यानी पूरे साल के 88 फीसदी दिन जलवायु में परिवर्तन के झटके झेले. यह 2023 के 318 दिन और 2022 के 314 दिन से अधिक था. जनवरी से सितंबर 2025 के बीच सबसे ज्यादा जानलेवा रही भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन- इनसे 2,440 मौतें हुईं.  इसके बाद बिजली और तूफान (1,456), बादल फटना (135), लू (21) और बर्फबारी (12) रही. 

चरम मौसमी घटनाओं के बढ़ने का मुख्य कारण 1957 में माप शुरू होने के बाद से मानवीय गतिविधियों के चलते वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की वैश्विक औसत सांद्रता में अभूतपूर्व वृद्धि है. ये चरम मौसमी घटनाएं न सिर्फ़ बार-बार हो रही हैं, बल्कि उनकी तीव्रता और भौगोलिक फैलाव भी बढ़ रहा है. केरल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर सहित 15 राज्यों में 100 या उससे अधिक दिन चरम मौसम रहा. नतीजतन, मानवीय और आर्थिक नुकसान तेज़ी से बढ़ रहा है. 

इन घटनाओं से 4,064 लोगों की जान गई, 94.7 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, 99,533 मकान नष्ट हुए और लगभग 58,982 पशु मारे गए. सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश में (532), उसके बाद आंध्र प्रदेश (484) और झारखंड (478) में हुईं. 

2022 से मानसून भारत का सबसे विनाशकारी मौसम बना हुआ है- सबसे ज्यादा चरम मौसमी दिन इसी दौरान पड़ते हैं. 2025 में हुई 4,064 मौतों में से 3,007 मौतें मानसून में हुईं. CSE की पर्यावरण संसाधन टीम की कार्यक्रम निदेशक किरण पांडेय कहती हैं, “मानसून के दौरान तापमान में वृद्धि विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यह मानसून तंत्र की मूल गतिशीलता को बाधित करती है. इससे बाढ़ से लेकर सूखे तक अनियमित और चरम मौसमी घटनाएं होती हैं, जो कृषि, खाद्य सुरक्षा और जन स्वास्थ्य को खतरे में डालती हैं.”

CSE की डायरेक्टर जनरल और डाउन टू अर्थ की एडिटर सुनीता नारायण कहती हैं, “इस पैमाने को देखते हुए हमें दुनिया को कई चीजों में कमी लाने की जरूरत तुरंत समझानी होगी.  हमें वायुमंडल में डाली जा रही CO₂ की मात्रा कम करनी होगी, क्योंकि अब जिस पैमाने की आपदाएं हम देख रहे हैं, उनके साथ किसी भी लिहाज से अनुकूलन (adaptation) संभव नहीं रह जाएगा.” 

वे आगे कहती हैं, “हमें पैमाने को समझना होगा- बेलेम (ब्राजील के इसी शहर में जलवायु परिवर्तन पर COP30 की बैठक हुई थी)  जिस पैमाने की बात कर रहे हैं, उस पैमाने पर पूरी दुनिया को एकजुट होना होगा. लेकिन साथ ही यह भी समझना होगा कि आगे भी ऐसी आपदाएं बढ़ेंगी, इसलिए हमें उसी हिसाब से काम करना है.” किरण पांडेय इसी बात को आगे बढ़ाती हैं, “हमें विकास की फिर से कल्पना करनी होगी. हम सब कुछ सिर्फ़ जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों पर नहीं थोप सकते.”

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