चीन में सत्ता के शीर्ष पर उठा-पटक; भारत के लिए इसे अनदेखा करना क्यों है मुश्किल?

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के पोलितब्यूरो सदस्य मा शिंगरुई के खिलाफ चल रही जांच का असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीमा पर भी दिख सकता है. ऐसे में भारत को सतर्क रहने की जरूरत है

 शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

चीन की बेहद सख्ती से नियंत्रित राजनीतिक व्यवस्था में किसी शीर्ष नेता के खिलाफ जांच अक्सर साधारण भ्रष्टाचार से कहीं अधिक बड़ी और गंभीर बात होती है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के शक्तिशाली पोलितब्यूरो के सदस्य मा शिंगरुई के खिलाफ चल रही जांच का मामला भी कुछ ऐसा ही है.

मा शिंगरुई के खिलाफ इस जांच को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे करीबी लोगों के बीच बढ़ते तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना ने चीन की सेना में प्रभावशाली लेकिन गोपनीय नेटवर्क के बारे में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मा शिंगरुई ने शी जिनपिंग के शासनकाल में तेजी से तरक्की की. उन्होंने हांगकांग से सटे उप-प्रांतीय शहर शेन्ज़ेन के पार्टी सेक्रेटरी के रूप में कार्य किया, फिर ग्वांगदोंग के गवर्नर बने. 2021 में उन्हें शिनजियांग का पार्टी सेक्रेटरी नियुक्त किया गया, जिसे चीन के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पदों में से एक माना जाता है.

अक्टूबर 2022 में मा शिंगरुई को प्रमोट कर पोलितब्यूरो में शामिल किया गया, जिससे उन्हें सत्ता के सर्वोच्च स्तर पर जगह मिल गई. उन्होंने CCP द्वारा स्थापित केंद्रीय ग्रामीण कार्य नेतृत्व समूह के उप प्रमुख का पद भी संभाला था, जो CCP का एक महत्वपूर्ण नीतिगत तंत्र है.

हालांकि, इस महीने 3 अप्रैल को चीनी सरकारी मीडिया ने घोषणा की कि मा शिंगरुई पार्टी अनुशासन और देश के कानूनों के गंभीर उल्लंघन के लिए जांच के दायरे में हैं. इस घोषणा में उन्हें “कॉमरेड” नहीं कहा गया और न ही यह स्पष्ट किया गया कि जांच को शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिली है या नहीं. चीन की राजनीति में ऐसे छोटे-छोटे विवरण बहुत मायने रखते हैं.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह जांच महज एक नियमित अनुशासनात्मक कार्रवाई से कहीं आगे है. उनके मुताबिक, यह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जरिए पार्टी, सेना और दोनों को जोड़ने वाले नेटवर्क पर कंट्रोल करने के निरंतर प्रयासों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.

कई विश्लेषक इसे मा शिंगरुई को शीर्ष स्तर यानी राष्ट्रपति की ओर से मिल रही सुरक्षा के खत्म होने के रूप में देख रहे हैं. 2022 में हुए 20वें पार्टी कांग्रेस के बाद से वे जांच का सामना करने वाले तीसरे मौजूदा पोलितब्यूरो सदस्य हैं. अन्य दो केंद्रीय सैन्य आयोग के वरिष्ठ अधिकारी थे, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को नियंत्रित करता है. इस कार्रवाई का पैटर्न यह दिखाता है कि अब उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी पूरी सुरक्षा नहीं मिल रही है.

मा शिंगरुई के मामले को और भी गंभीर बनाने वाली बात यह है कि उनकी पत्नी रोंग ली पर आरोप है कि उन्होंने हांगकांग में रजिस्टर्ड एक कंपनी के जरिए बहुत महंगी बीमा पॉलिसियां चीन के सीनियर अधिकारियों के परिवारों को दी थीं. इससे उनके परिवार ने चीन के ताकतवर वर्गों में अपना प्रभाव बनाया और इस तरह उनके बीच एक अनौपचारिक संबंधों का नेटवर्क बन गया.

आरोप है कि मा शिंगरुई और उनकी पत्नी ने पारंपरिक रिश्वतखोरी के बजाय भ्रष्टाचार का एक नया मॉडल अपनाया. इस मॉडल के तहत उन्होंने पारिवारिक संबंधों और वित्तीय साधनों के जरिए प्रभाव का एक जटिल नेटवर्क तैयार किया. इस जटिल व्यवस्था के कारण जांच एजेंसियों के लिए भ्रष्टाचार का पता लगाना बेहद मुश्किल और राजनीतिक रूप से बहुत खतरनाक हो जाता है.

आरोप है कि मा शिंगरुई दंपति इसी नेटवर्क के माध्यम से देश के बड़े सरकारी रणनीतिकारों और सैन्य खरीद से जुड़े उच्च अधिकारियों तक पहुंचे. यह नेटवर्क भविष्य में शी जिनपिंग की केंद्रीकृत सत्ता की परियोजना के लिए एक सीधी चुनौती बन सकता था. माना जा रहा है कि शी जिनपिंग ने इसे भांपते ही कार्रवाई करने का फैसला कर लिया.

मा शिंगरुई की पृष्ठभूमि इस मामले को एक और पेचीदा पहलू बना देती है. राजनीति में आने से पहले उन्होंने चीन के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग में काम किया था. इससे वे उस गुट में शामिल हो गए, जिसे कुछ लोग 'एयरोस्पेस गुट' कहते हैं. यह सैन्य अनुसंधान, रक्षा कंपनियों और PLA से घनिष्ठ संबंध रखने वाले अधिकारियों का एक नेटवर्क है.

ये संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जैसे कि सैन्य खरीद, फायनेंस और देश के बड़े रणनीतिकारो से जुड़े हैं. इस नेटवर्क के लोगों के संभावित संबंधों को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं, जिनके राजनीतिक तौर पर बड़े लोगों के साथ  घनिष्ठ संबंध थे.

इसी बीच, पूर्व प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ को शी जिनपिंग के प्रति वफादार इकाइयों के बजाय PLA के संयुक्त स्टाफ विभाग के माध्यम से सुरक्षा प्रदान की गई है. सरकार के इस फैसले ने सेना के भीतर नियंत्रण को लेकर नए संदेह पैदा कर दिए हैं. चीन पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाक्रमों पर भारत को विशेष ध्यान देना चाहिए.

चीन के सैन्य-संबद्ध राजनीतिक तंत्र में अस्थिरता, गुटबाजी या भ्रष्टाचार का कोई भी संकेत क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा कर सकता है. खासकर तब जब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लगातार अपनी तैनाती बनाए हुए है.

अगर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान वास्तव में रक्षा तंत्र से जुड़े चीनी अधिकारियों को प्रभावित कर रहा है, तो इसका असर हथियार खरीद श्रृंखला, कमान व्यवस्था के भरोसे और सैन्य आधुनिकीकरण की गति पर पड़ सकता है. इन सभी का सीधा प्रभाव चीन की LAC के पास की तैयारियों पर दिख सकता है.

साथ ही, भारत को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि शी जिनपिंग के इन कार्रवाई का ऐतिहासिक रूप से दोहरा उद्देश्य रहा है. पहला भ्रष्टाचार को खत्म करने का और दूसरा अपने प्रतिद्वंद्वी को रास्ते से हटाने का. इस तरह मा शिंगरुई का मामला केवल भ्रष्टाचार से कहीं ज्यादा चीनी राज्य की राजनीतिक और सैन्य संरचना पर नियंत्रण से संबंधित हो सकता है.

चीन के जानकारों का कहना है कि सत्तावादी प्रणालियों में इस तरह की आंतरिक उथल-पुथल अक्सर बाहरी रणनीतिक संकेत देती है. इसमें घरेलू अनिश्चितता बढ़ने के बावजूद विदेशों में अपनी ताकत प्रदर्शित करने के उद्देश्य से आक्रामक सैन्य संदेश देना शामिल है. ऐसे में यह जांच महज बीजिंग से जुड़ी भ्रष्टाचार की एक और कहानी नहीं है. यह चीन के सैन्य-राजनीतिक गठजोड़ में संभावित तनावों की एक झलक है. इस आंतरिक सत्ता संघर्षों का क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है.

भारत के लिए, यह घटनाक्रम न केवल जमीनी स्तर पर PLA की गतिविधियों पर, बल्कि चीनी व्यवस्था के भीतर होने वाले उन राजनीतिक उथल-पुथल पर भी कड़ी नजर रखने की आवश्यकता को जाहिर करता है. ऐसा इसलिए ताकी बीजिंग के रणनीतिक निर्णय प्रभावित हो सकते हैं.

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