कनाडा स्टूडेंट वीजा में कटौती क्यों कर रहा है और भारतीय छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
कनाडा में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है और पिछले 5 वर्षों में दस लाख से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए वहां गए हैं

प्रतीकात्मक तस्वीर
पंजाब में एक मजाक खूब चलता है, जिसमें लोग ये नहीं पूछते कि 12वीं के बाद क्या करोगे, बल्कि ये पूछते हैं कि कनाडा कब जा रहे हो?लेकिन अब कनाडा ने घोषणा की है कि वो अंतरराष्ट्रीय छात्र वीजा में कटौती करेगा. भारत में इसका असर कुछ हद तक पंजाब पर देखने को मिल सकता है, क्योंकि विदेशों में पढ़ाई के लिए पंजाब के छात्रों की पहली पसंद कनाडा ही है.
कनाडाई इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने 22 जनवरी को कहा है कि 2024 के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा में 35% की कटौती की जाएगी. कटौती के बाद इस साल 3,64,000 नए स्टडी परमिट जारी होने की संभावना है. पिछले साल यानी 2023 में नवंबर तक लगभग 5 लाख 80 हजार नए स्टडी परमिट जारी किए गए थे.
हालांकि, फिलहाल ये कटौती 2 सालों के लिए ही है और सिर्फ डिप्लोमा या ग्रेजुएशन कोर्स पर ही लागू होगी. पहले से पढ़ने वाले या स्टडी परमिट रिन्यू करवाने वाले छात्रों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा.
जो बदलाव हुए हैं उनमें एक महत्वपूर्ण चीज ये है कि ओपन वर्क परमिट अब केवल मेडिकल-लॉ जैसे प्रोफेशनल कोर्स और केवल मास्टर या डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के जीवनसाथी के लिए होंगे. ग्रेजुएशन और कॉलेज के छात्र ओपन वर्क परमिट के जरिए पति या पत्नी को साथ नहीं ले जा पाएंगे.
बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए नए स्टडी परमिट आवेदकों की वित्तीय क्षमता डिमांड में भी बढ़ोतरी की गई है.पहले स्टडी परमिट के लिए 10,000 कनाडियन डॉलर की आर्थिक क्षमता दिखानी होती थी, जिसे बढ़ाकर अब 20,635 डॉलर कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इससे कनाडा में रहने का खर्च उठाने के लिए छात्र अच्छी स्थिति में होंगे.
साथ ही शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसने के लिहाज से फैसला किया गया है कि 1 सितंबर से उन छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट वर्क परमिट नहीं दिया जाएगा जो करिकुलेम लाइसेंसिंग एरेंजमेंट (जहां एक निजी कॉलेज को सरकारी कॉलेज का पाठ्यक्रम पढ़ाने का लाइसेंस दिया गया है) वाले कॉलेजों में एडमिशन लेंगे.
कनाडा अंतरराष्ट्रीय छात्रों का हब
2021 के आंकड़ों के अनुसार, कनाडा की आबादी लगभग 3.8 करोड़ है और इसमें से करीब 22 फीसदी यानी 83 लाख लोग आप्रवासी हैं. यहां का हर चौथा व्यक्ति दूसरे देश का है और इसमें एक बड़ी संख्या विदेशी छात्रों की है. 2022 में कनाडा में कुल विदेशी छात्रों की संख्या 8 लाख से ज्यादा थी, जबकि एक दशक पहले यही संख्या 2 लाख के करीब थी. 2022 में, पहली बार ऐसा हुआ कि एक ही साल में कनाडा की आबादी में 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़ गए, लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा बाहरी लोगों का था. 2023 में कनाडा की आबादी 4 करोड़ पहुंच गई है.
तेजी से आबादी बढ़ने के चलते कनाडा में घरों की कमी महसूस होने लगी है और स्टूडेंट परमिट में कटौती के पीछे यही सबसे बड़ा कारण है. कनाडा में घर का किराया पिछले दो सालों में 22% तक बढ़ गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते घर बनाना या खरीदना महंगा हो गया है. कनाडा की नेशनल हाउंसिंग एजेंसी- द कनाडा मॉर्गेज एंड हाउसिंग कॉर्पोरेशन का अनुमान है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए 2030 तक 35 लाख नए घरों की जरूरत पड़ेगी.
हालांकि, स्टूडेंट परमिट में हो रही कटौती हर राज्य में एकसमान नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग राज्यों के हिसाब से अलग-अलग होगी. ओंटारियो जैसे कुछ राज्यों में विदेशी छात्रों की संख्या 50% तक कम की जा सकती है.
भारत पर क्या असर?
कनाडा में विदेशों से पढ़ने आने वालों में सबसे ज्यादा संख्या भारतीय छात्रों की है. कनाडा में आप्रवासन, शरणार्थियों और कनाडाई नागरिकता से संबंधित मामलों को देखने वाले सरकारी विभाग IRCC के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में दस लाख से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ाई के लिए कनाडा गए हैं. कनाडा में दुनिया भर से आप्रवास करने वाले छात्रों में से 40% सिर्फ भारत से हैं. स्टडी वीजा के साथ कनाडा में रहने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2018 में 1,71,505 से बढ़कर 2019 में 2,18,540, 2020 में 1,79,510, 2021 में 2,16,500 और 2022 में 3,19,000 हो गई है.
2019 में यहां कुल 6,37,860 अंतर्राष्ट्रीय छात्र थे, जिनमें 4 लाख नए स्टडी परमिट वाले थे. कोविड-19 महामारी के चलते 2020 में इस संख्या में गिरावट देखी गई, लेकिन 2021 में फिर नए परमिट वाले छात्र 4,44,260 हो गए और 2022 में ये आंकड़ा और बढ़कर 5,51,405 हो गया. एक साल में नए परमिट की संख्या एक लाख बढ़ी. 2022 में कुल स्टडी परमिट में से करीब 41% केवल भारतीयों को जारी किए गए थे. 2023 के पहले 6 महीनों में भी ये आंकड़ा 40% के करीब रहा. इस लिस्ट में भारत के बाद दूसरे नंबर पर नाइजीरिया है जहां से इतने ही समय में करीब 43 हजार छात्र कनाडा गए. इसी से अंतर समझा जा सकता है कि भारत से कितने ज्यादा लोग कनाडा जा रहे हैं.
इमिग्रेशन सर्विस एजेंसी द एक्सिस ओवरसीज के डायरेक्टर जगमोहन सिंह इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं कि पंजाब और गुजरात से सबसे ज्यादा छात्र कनाडा जाते हैं. गुजरात के लोगों की पहली पसंद फिर भी अमेरिका है, लेकिन पंजाब के छात्रों के मन में 12वीं के बाद पहला ख्याल कनाडा का ही आता है. ऐसे में स्टडी वीजा में कटौती करने से छात्रों की संख्या घटना तय है और उनके आत्मविश्वास में भी कमी आ सकती है.
जगमोहन आगे कहते हैं कि हर देश को अपनी परिस्थितियों के हिसाब से नियम बनाने का अधिकार है, लेकिन जैसे ही वहां हाउसिंग संकट में सुधार होगा, नियमों में ढील की उम्मीद की जा सकती है.