ब्लैकलिस्ट रही 'अगस्ता वेस्टलैंड' अब अदाणी के साथ भारत में बनाएगी हेलिकॉप्टर!
VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले के विवाद को पीछे छोड़ते हुए, इटली की अगस्ता वेस्टलैंड ने अब नाम बदलकर अदाणी ग्रुप के साथ मिलकर हेलीकॉप्टर प्रोडक्शन बेस बनाने का फैसला किया है

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इटली की कंपनी लियोनार्डो के साथ एक समझौता किया है. इसका मकसद रणनीतिक साझेदारी के जरिए भारत के हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम को विकसित और मजबूत करना है.
नई दिल्ली में दोनों कंपनियों की ओर से की गई एक घोषणा में कहा गया कि इस साझेदारी का लक्ष्य भारत में पूरी तरह से इंटीग्रेटेड हेलीकॉप्टर प्रोडक्शन बेस स्थापित करना है. इससे सेना की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जाएगा और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में 'आत्मनिर्भरता' के देश के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा.
सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, यह सहयोग लियोनार्डो के एडवांस AW169M और AW109 ट्रेकर-एम हेलीकॉप्टरों के उत्पादन में मदद करेगा. ये हेलीकॉप्टर पहले अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़े थे. इसके साथ ही, क्रोनोलॉजिकल तरीके से स्वदेशीकरण, अच्छी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) की सुविधाएं और पायलट ट्रेनिंग का ढांचा भी तैयार किया जाएगा.
यह घटनाक्रम अब लियोनार्डो के तहत काम कर रही इटली की अगस्ता वेस्टलैंड की भारत के रक्षा क्षेत्र में वापसी का संकेत है. यह वापसी उसे क्लीन चिट मिलने के करीब पांच साल बाद हुई है. यह वापसी काफी अहम है, क्योंकि कंपनी का भारत में एक विवादित अतीत रहा है, जो मुख्य रूप से अगस्ता वेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर घोटाले से जुड़ा था. यह घोटाला 2010 में 12 AW101 हेलीकॉप्टरों की खरीद से जुड़ा था, जिसकी कीमत लगभग 3,600 करोड़ रुपये थी और इसे भारत के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लाने-ले जाने के लिए खरीदा जाना था.
यह मामला 2013 में तब सामने आया जब अगस्ता वेस्टलैंड की तत्कालीन पैरेंट कंपनी फिनमेकेनिका के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स को इटली के इन्वेस्टिगेटर्स ने गिरफ्तार कर लिया. उन पर बिचौलियों और भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने और कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेक्निकल स्टैंडर्ड्स में हेरफेर करने के आरोप थे. बाद में CBI और ED की जांच में पूर्व वायु सेना प्रमुख सहित कई लोगों का नाम सामने आया.
इंटीग्रिटी पैक्ट के उल्लंघन और भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देते हुए, भारत सरकार ने जनवरी 2014 में हेलीकॉप्टर कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया, अगस्ता वेस्टलैंड और उसकी पैरेंट कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया और बैंक गारंटी भुनाकर एडवांस पेमेंट का एक हिस्सा वसूल लिया. 2016 में, फिनमेकेनिका का नाम बदलकर लियोनार्डो एस.पी.ए. कर दिया गया और अगस्ता वेस्टलैंड को इसके हेलीकॉप्टर डिवीजन के रूप में इसमें मिला दिया गया. भारत ने आख़िरकार कुछ शर्तों के तहत लियोनार्डो से प्रतिबंध हटा दिया, हालांकि घोटाले से जुड़ी जांच जारी रही.
भारत के हेलीकॉप्टर बाजार के 7.8 फीसद की सालाना दर (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है. यह 2024 में 1.58 अरब डॉलर से बढ़कर 2032 तक 2.88 अरब डॉलर हो जाएगा, जो इस क्षेत्र में मौजूद बड़े अवसरों और कैपेसिटी बिल्डिंग की तत्काल जरूरत को दिखाता है. इस बड़े बाजार को भांपते हुए, एयरबस हेलीकॉप्टर्स ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ मिलकर पिछले साल अक्टूबर में कर्नाटक में H125 यूटिलिटी हेलीकॉप्टर के लिए फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करने की घोषणा की थी. पहला ‘मेड इन इंडिया’ H125 हेलीकॉप्टर 2027 की शुरुआत तक डिलीवर होने की उम्मीद है. इसके एक्सपोर्ट की योजना दक्षिण एशिया पर केंद्रित है.
भारत की हेलीकॉप्टर क्षमताएं एक नाजुक मोड़ पर पहुंच रही हैं क्योंकि पुराने होते फ्लीट्स, बढ़ती जिम्मेदारियां और बदलते खतरे नए रोटरी-विंग प्लेटफॉर्म्स (हेलीकॉप्टरों) की बड़े पैमाने पर मांग पैदा कर रहे हैं. भारतीय सेना, वायु सेना, नौसेना और तटरक्षक बल को मिलाकर, लाइट, इंटरमीडिएट, मीडियम-लिफ्ट और समुद्री मल्टी-रोल केटेगरी में कई सौ हेलीकॉप्टरों की कुल मांग है. यह पुराने हेलीकॉप्टरों को बदलने और भविष्य के लिए ताकत बढ़ाने, दोनों जरूरतों को दिखाता है.
मौजूदा फ्लीट्स का ज्यादातर हिस्सा 1960 और 1990 के बीच शामिल किया गया था और अब बढ़ते मेंटेनेंस खर्च, कम उपलब्धता और पुरानी तकनीक जैसी समस्याओं से जूझ रहा है.
दूरदराज के इलाकों में तैनात सैनिकों की लाइफलाइन मानी जाने वाली लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की सबसे बड़ी जरूरत है. सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स, घायलों को निकालने, निगरानी और ऊंचाई वाले व खराब मौसम वाले इलाकों में ऑपरेशन जारी रखने के लिए 300 से ज्यादा ऐसे हेलीकॉप्टरों की जरूरत है.
मीडियम-लिफ्ट हेलीकॉप्टर, जिनकी मांग 300 से ज्यादा है, वॉरजोन, भारी सामान ले जाने, आपदा राहत और अलग-अलग मोर्चों पर सेना की तेजी से तैनाती के लिए जरूरी हैं. इसके अलावा, सेनाओं को लाइट और मीडियम केटेगरी के बीच के ऑपरेशनल गैप को भरने के लिए 100 से ज्यादा इंटरमीडिएट हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता है, ताकि विभिन्न मिशनों में लचीलापन बना रहे.
समुद्री क्षमता चिंता का एक प्रमुख क्षेत्र बना हुआ है. भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल को एंटी-सबमरीन वारफेयर, सतह की निगरानी, खोज और बचाव, और फ्लीट्स की सहायता के लिए लगभग 90 समुद्री मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों की जरूरत होने का अनुमान है. हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते महत्व, पनडुब्बियों की बढ़ती गतिविधियों और नौसैनिक तैनाती के विस्तार ने आधुनिक, नेटवर्क से जुड़े और सुरक्षित नौसैनिक रोटरी प्लेटफॉर्म की मांग को तेजी से बढ़ा दिया है.
लियोनार्डो के साथ साझेदारी की घोषणा करते हुए, अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा, "आने वाले दशक में भारतीय सशस्त्र बलों को 1,000 से ज्यादा हेलीकॉप्टरों की जरूरत होगी, ऐसे में यह साझेदारी 'सॉवरेन मैन्युफैक्चरिंग' के हमारे विजन को पूरा करती है. इससे स्वदेशीकरण में तेजी आएगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और भारत एक वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्शन बेस के रूप में स्थापित होगा."
लियोनार्डो हेलीकॉप्टर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर जियान पिएरो कुटिलो ने अदाणी समूह के साथ साझेदारी का स्वागत किया. कुटिलो ने कहा, "हम अदाणी के साथ जुड़कर बेहद खुश हैं. हम भारत के रोटरक्रॉफ्ट उद्योग की बढ़ती भूमिका के विजन में अपना योगदान देंगे और देश को वह आधुनिक तकनीक और ऑपरेशनल क्षमता उपलब्ध कराएंगे जिसका वह हकदार है. हम अपनी जॉइंट एक्सपर्टीज का फायदा उठाकर बेहतरीन समाधान देने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित हैं."
भारत में डिफेंस से परे, सिविल और कमर्शियल क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों का उपयोग दुनिया में सबसे कम है. इससे एयर एंबुलेंस सेवाओं, आपदा प्रतिक्रिया, रीजनल कनेक्टिविटी और शहरी आवाजाही की प्रभावशीलता सीमित हो जाती है. यह कमी प्राकृतिक आपदाओं और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान साफ दिखाई देती है, जो सैन्य जरूरतों के साथ-साथ राष्ट्रीय हेलीकॉप्टर बेस को बढ़ाने के रणनीतिक तर्क को मजबूत करती है.
सिविल क्षेत्र में, भारत के पास 250 हेलीकॉप्टरों की फ़्लीट है जबकि वैश्विक स्तर पर यह संख्या 20,000 से ज्यादा है. भारतीय बेड़े का 95 फीसद से ज्यादा हिस्सा विदेशी है.