अन्ना हजारे एक फिर आमरण अनशन पर क्यों बैठने जा रहे हैं?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने अपने आमरण अनशन को लेकर लिखा कि यह उनका व्यक्तिगत प्रश्न नहीं, बल्कि देश की जनता और भ्रष्टाचार मिटाने की लड़ाई का मुद्दा है

महाराष्ट्र के रालेगन सिद्धि में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे एक बार फिर आमरण अनशन शुरू करने जा रहे हैं. अन्ना हजारे ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, “मैं 30 जनवरी 2026 से फिर अपना आमरण अनशन शुरू कर दूंगा."
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर लोकायुक्त अधिनियम को लागू करने में विफल होने का आरोप लगाया है. साथ ही इसे आखिरी आंदोलन बताते हुए हजारे ने कहा कि लोकायुक्त कानून जन कल्याण के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी उपेक्षा की गई है.
अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार से क्या मांग की है?
महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून लागू किए जाने में हो रही देरी से अन्ना हजारे और उनके समर्थक बेहद नाराज हैं. राज्य में लोकायुक्त कानून को मंजूरी मिले दो साल बीत जाने के बावजूद उसे लागू नहीं किया गया है. यही कारण है कि अन्ना हजारे अब इसे लागू कराने के लिए एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं.
11 दिसंबर को पत्रकारों से बात करते हुए हजारे ने इसको लेकर सरकार की निष्क्रियता पर निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा, “यह कानून जनता के कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. मैंने सात पत्र लिखे, फिर भी कोई जवाब नहीं आया. मुझे समझ नहीं आता कि सरकार इसे लागू क्यों नहीं कर रही है. सरकार का काम जनता का कल्याण करना होता है, न कि सिर्फ दिखावा करना.” इतना कहकर उन्होंने 30 जनवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की.
उन्होंने कहा है कि अगर वे हार्ट अटैक से मरने के बजाय देश और समाज के हित में मृत्यु पाते हैं, तो वह उनकी सौभाग्यशाली मौत होगी.
महाराष्ट्र में दोनों सदनों से पास होने के बावजूद नहीं बना कानून
अन्ना हजारे ने 2022 में लोकायुक्त कानून की मांग को लेकर रालेगन सिद्धि में भूख हड़ताल की थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्रियों की मध्यस्थता के बाद विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था, जिसके बाद एक समिति का गठन किया गया और लोकायुक्त अधिनियम का मसौदा तैयार किया गया.
इस बिल को कानूनी रूप देने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों से पारित किया गया और बाद में राष्ट्रपति की सहमति के लिए भेजा गया. हालांकि, हजारे ने कहा कि अधिनियम अभी तक लागू नहीं किया गया है, जिसके कारण उन्होंने दोबारा विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है.
लोकायुक्त संशोधन बिल क्या है?
11 दिसंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में 'खाद्य एवं औषधि प्रशासन के डिपार्टमेंटल ऑफिस' के उद्घाटन के दौरान इस कानून का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह कानून भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लोकपाल को अधिकार देता है.
राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा. देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्र सरकार ने लोकायुक्त बिल, 2022 में तीन बदलावों की सिफारिश की थी, जिसे मूल रूप से दिसंबर 2022 में विधानसभा में और दिसंबर 2023 में परिषद में पास किया गया था.
केंद्र के सुझावों के तहत इस कानून में तीन बड़े बदलाव किए गए. पहला- केंद्र सरकार के बनाए गए तीन क्रिमिनल कानूनों को अपडेट करना, दूसरा- अपॉइंटमेंट के नियमों में बदलाव करना, तीसरा-महारेरा जैसी कानूनी संस्थाओं में राज्य द्वारा नियुक्त अधिकारियों को लोकायुक्त के दायरे में लाया गया है.