मारुति की कार बिक्री में लगातार तीसरे महीने गिरावट, शेयरधारकों को भी भारी नुक्सान
शेयर बाजार में छाई मुनाफावसूली और गाड़ियों की बिक्री में गिरावट के चलते मारुति के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली. बीते एक महीने में मारुति का शेयर 15 फीसदी से ज्यादा टूट गया.

पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और महंगे होते कर्ज के कारण कार बिक्री को झटका लगा है. देश की दिग्गज कार कंपनी मारुति सुजुकी की बिक्री में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई है. सालाना आधार पर तुलना करें तो सितंबर में मारुति की बिक्री में 0.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. सिंतबर में कंपनी ने कुल 1,62,290 कारें बेचीं हैं. इससे पहले अगस्त महीने में मारुति की बिक्री में 3.5 फीसदी की गिरावट आई थी. कंपनी ने अगस्त में कुल 1,58,189 गाड़ियां बेचीं. जुलाई में भी कंपनी की ब्रिकी बीते साल की तुलना में 0.6 फीसदी घटी थी.
शेयर की पिटाई
शेयर बाजार में छाई मुनाफावसूली और गाड़ियों की बिक्री में गिरावट के चलते मारुति के शेयर में भारी गिरावट देखने को मिली. बीते एक महीने में मारुति का शेयर 15 फीसदी से ज्यादा टूट गया. सोमवार के कारोबारी सत्र में मारुति ने 52 हफ्तों का निचला स्तर (7211 रुपए प्रति शेयर) छुआ. हालांकि बाजार बंद होते होते शॉर्ट कवरिंग के चलते कंपनी का शेयर 1.56 फीसदी बढ़कर 7465 के स्तर पर बंद हुआ.
त्यौहारी सीजन से उम्मीद
बाजार विशेषज्ञ राजेश शर्मा कहते हैं, 'त्यौहारी सीजन शुरू होने के चलते इस महीने कंपनी की बिक्री सुधार देखने को मिल सकता है.' नवरात्र, दशहरा और दिवाली जैसे मौके पर कार कंपनियां तमाम ऑफर्स भी लाती हैं, जिसकी वजह से कार बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिलती है. राजेश आगे कहते हैं, 'मारुति के शेयर में निवेशकों को निचले स्तर पर खरीदारी के अच्छे मौके मिल सकते हैं.
6600 से 7000 रुपए के भाव के बीच खरीदारी सही मौका होगा. 10 से 15 फीसदी रिटर्न लेकर इस सौदे से निकलना ठीक रणनीति होगी.’’ बाजार में खरीदारी एक साथ न करके किश्तों में करने की सलाह होगी.
क्या करें निवेशक
इंडेक्स जीनियस इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के निदेशक (रिसर्च) अमित हाचरेकर कहते हैं, ''बाजार में नकदी की कमी के चलते बाजार में गिरावट का माहौल है. इसी के चलते मारुति जैसी कंपनियों में भी बिकवाली हावी है. बाजार में दरअसल नया निवेश नहीं आ रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली कर ट्रेडर्स इंडेक्स की टॉप कंपनियों में पैसा शिफ्ट कर रहे हैं.
ऐसे में इंडेक्स (निफ्टी और सेंसेक्स) पर बहुत असर न भी दिखे लेकिन बाजार अब कमजोर है.’’ निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि अपने पैसे को इंडेक्स की फ्रंटलाइन कंपनियों में ही शिफ्ट करें.
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