निद्रा दान: सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए अनूठी पहल
ट्रक ड्राइवरों को लंबे सफर की थकान से बचाने के लिए राजस्थान में चल रहा ड्राइवर सेवा केंद्र.

अजमेर की ओर जाने वाले नेशनल हाइवे-8 पर जयपुर से करीब 65 किलोमीटर दूर दूदू से कुछ ही कदम आगे बढने पर बाईं तरफ एक बड़ा-सा बोर्ड चमकता नजर आता है. इस पर लिखा है—ड्राइवर सेवा केंद्र. अहमदाबाद, गुजरात और बेंगलुरु की ओर जाने वाले इस व्यस्ततम रास्ते पर इसे देखकर आप थोड़ा चौंक सकते हैं. असल में हर सेकंड इस रास्ते से कम-से-कम एक गाड़ी गुजरती है और यह केंद्र ड्राइवरों के आराम के लिए पसंदीदा ठिकाना बन गया है.
ड्राइवर सेवा केंद्र
दोपहर में जब सूरज आग बरसा रहा था, हरियाणा के जींद निवासी ट्रक ड्राइवर 42 वर्षीय राजेश सिंह यहां अपनी नींद पूरी करके कपड़े धो रहे थे. वे सुबह चार बजे गुड़गांव से चेन्नै के लिए यूनियन रोडवे लिमिटेड की गाड़ी लेकर चले थे, जिसमें उन्हें करीब 72 घंटे की लंबी दूरी तय करनी थी. इस थकाऊ सफर में जयपुर से कुछ दूर पहले ही एक ढाबे पर ठहरकर उन्होंने नाश्ता करके पेट को तो शांत कर लिया था, पर आंखों और शरीर के आराम के लिए उन्होंने दूदू के इस ड्राइवर सेवा केंद्र को चुना.
ड्राइवर बिता सकते हैं सुकून के पल
राजेश बताते हैं, 'यहां मुझे न तो ट्रक से डीजल या कोई सामान चोरी होने का डर होता है और न ही पैसे. सोने के लिए चारपाई ऊपर से मिल जाती है. इसकी कोई कीमत भी नहीं चुकानी पड़ती.'
रोजाना एक हजार से ज्यादा मौतें
जिस देश में सड़क हादसों में रोजाना एक हजार से ज्यादा लोग मारे जाते हों, वहां ड्राइवरों की नींद पूरी होना कितना अहम है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, 2014 में देश में करीब साढ़े चार लाख सड़क हादसे हुए. इनमें 34,252 ड्राइवर मारे गए और 94,272 घायल हुए. इतना ही नहीं, इन हादसों में दूसरे 1,07,274 लोग मारे गए तो 3,83,459 घायल हुए. इसी तरह ट्रक/लॉरी हादसों में कुल 28,455 लोग मारे गए, जिनमें 5,610 ड्राइवर थे.
इस्तांबुल दौरे पर आया विचार
सड़क हादसों के इस तरह के भयावह रुझान को देखते हुए ही अग्रवाल पैकर्स ऐंड मूवर्स के चेयरमैन रमेश अग्रवाल ने सीएसआर के तहत दूदू के पास सितंबर, 2012 में ड्राइवर सेवा केंद्र खोला. इस केंद्र के विचार की कहानी भी दिलचस्प है. दरअसल, अग्रवाल 2007 में इंटरनेशनल रोड यूनियन की बैठक में इस्तांबुल गए थे. वहां उन्हें बताया गया कि सड़क हादसों में भारत बहुत आगे है. यह सुनना उन्हें बुरा लगा और वहां से लौटने पर उन्होंने इसको लेकर काम करना शुरू किया. अग्रवाल बताते हैं, 'पता चला कि हादसों की एक बड़ी वजह ड्राइवरों की नींद पूरी न होना है. वे घंटों बिना नींद पूरी किए गाड़ी चलाते हैं. हमने सोचा, नींद वाली कमी खत्म की जा सकती है.'
एनएच-8 को चुना
अग्रवाल ने अपने ड्राइवरों को कहा कि वे नींद पूरी कर लिया करें पर उनका जवाब था, 'सर, नींद हम कहां पूरी करें? गाड़ी कहीं खड़ी करके सोते हैं तो डीजल, गाड़ी पार्ट्स चोरी हो जाते हैं.' अग्रवाल कहते हैं, 'उसी दिन मैंने सोच लिया कि ड्राइवरों के लिए निद्रा दान केंद्र खोला जाए.' उन्होंने पता किया कि ज्यादातर हादसे किस ओर होते हैं. फिर उन्होंने एनएच-8 को चुना और दूदू के पास केंद्र खोलना तय किया.
सभी ड्राइवरों के लिए खोला केंद्र
अच्छी बात यह है कि यह केंद्र केवल अग्रवाल पैकर्स ऐंड मूवर्स के ड्राइवरों के लिए ही नहीं, बल्कि किसी भी कंपनी के ड्राइवर यहां आराम कर सकते हैं. यहां पांच बड़े कमरे हैं, जिनमें दो ड्राइवरों के सोने के लिए हैं. उनमें दर्जनों चारपाइयां बिछी हुई हैं. इसके अलावा परिसर में ही एक ढाबा, दर्जी की दुकान, नाई की दुकान और एक और शेड कमरा है, जिसका इस्तेमाल भी ड्राइवर सोने के लिए करते हैं. कंपनी ने ढाबा मालिक, दर्जी और नाई को मुफ्त में कमरा दे रखा है. नाई की सेवा यहां मुफ्त हैं.
रंग ला रही है पहल
केंद्र के इंचार्ज 58 वर्षीय एक. के. जोशी बताते हैं, 'शुरू में ड्राइवरों को इससे जुडऩे में वक्त लगा था. लेकिन अब यहां रोजाना करीब 70-80 ड्राइवर अपनी नींद पूरी करते हैं.' वे बताते हैं कि यहां कंपनी की 130 बीघा जमीन है, जिसमें करीब 26-27 बीघे में निर्माण हो चुका है. इसके अलावा महाराष्ट्र के मलकापुर में भी कंपनी ड्राइवर सेवा केंद्र खोलने जा रही है. इस बहाने नींद पूरी हो जाएगी और असल सफर सुरक्षित हो जाएगा.