जल संकटः बहुत कठिन है डगर घर-घर ‘नल से जल’ पहुंचाने की
अगले पांच सालों में क्या केंद्र सरकार नल से जल पहुंचाने की योजना को कर पाएगी साकार? पिछले पांच सालों में योजना की अति सुस्त फ्तार तो साफ कहती है, लक्ष्य साधना मुमकिन नहीं.

पांच सालों में 18 फीसद से थोड़े ही ज्यादा ग्रामीण घरों में सरकार जल से नल पहुंचा पाई तो क्या आगे के पांच सालों में 80 फीसद घरों में नल से जल पहुंच पाएगा? दरअसल, इस बार के बजट में जल जीवन मिशन के लिए आवंटित रकम को देखते हुए यह सवाल और भी जायज हो जाता है.
अबकी बजट में सरकार के बहु प्रचारित और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम जल-जीवन मिशन के बजट 15 फीसद की बढ़ोतरी की गई. 2019-20 में इस कार्यक्रम के लिए 10,000 करोड़ रु. की राशि आवंटित की गई थी जबकि इस बार 11,500 रु. है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रकम पिछले साल के बजट में 2018-19 के मुकाबले तकरीबन दुगुनी कर दी गई थी. इसके दो ही मतलब हो सकते हैं या तो आर्थिक तंगी से जूझती सरकार के पास बजट के लिए धन था ही नहीं या फिर इस कार्यक्रम का महत्व सरकार के लिए कम हो गया है.
बात जो भी हो लेकिन इस साल का बजट केंद्र सरकार के उस सपने पर पानी फेरता सा दिखाई देता है जो उसने 2024 के लिए देखा था. दरअसल सरकार ने इस कार्यक्रम के जरिए 2024 तक ग्रामीण इलाके के सभी घरों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा था.
नीति आयोग की 2018 में कंपोजिट वाटर मैनेजमेंट शीर्षक से प्रकाशित आयोग की रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि 600 मिलियन लोग मौजूदा समय में पानी के गंभीर संकट से गुजर रहे हैं. दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद समेत 21 बड़े शहर नजदीक के कुछ सालों में बुरी तरह पानी की किल्लत से जूझने वाले हैं.
ग्राउंड वाटर का स्तर तेजी से गिरेगा. शहरी विकास मंत्रालय की टेक्निकल विंग सेंटर पब्लिक हेल्थ एनवायरमेंट इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक वैश्विक मानक के मुताबिक नल से की जाने वाली पानी की आपूर्ति अगर सातों दिन, चौबीसों घंटे नहीं होती है तो इससे पानी के दूषित होने की संभावना रहती है.
पानी के आपूर्ति में रुकावट आने से पानी के दूषित होने की संभावना इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. मौजूदा समय में महज 18 फीसद ग्रामीण घरों में ही नल से जल पहुंचाया जा रहा है. जल से नल मिशन की धीमी रफ्तार भी सरकार के लक्ष्य को दूर की कौड़ी बताने के लिए काफी है.
कैग रिपोर्ट (2018-19)
कैग रिपोर्ट के आंकड़े राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP) पर भी सवाल उठाते हैं. NRDWP 2009 में शुरू हुए इस कार्यक्रम के फोकस को 2013 में बदलकर पाइप के जरिए जल पहुंचाने की तरफ केंद्रित किया गया. लक्ष्य रखा गया कि 2017 तक 35 फीसद ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचा दिया जाएगा. लेकिन आंकड़ों की मानें तो 2017 में तय लक्ष्य के आधे सफर भी तय नहीं किया जा सका. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार इस योजना को लेकर गंभीर है?