सीमा पर बढ़ाई सख्ती
बंगाल में नई भाजपा सरकार ने अवैध प्रवासियों को लेकर डिटेंशन सेंटर बनाने और अल्टीमेटम देने जैसे कदमों के साथ अपना रुख कड़ा किया. अब ढाका की नजरें सिर्फ नई दिल्ली पर ही नहीं, बल्कि कोलकाता पर भी टिकीं

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने सात जून को पार्टी के एक कार्यक्रम में ऐलान किया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों में बने विभिन्न होल्डिंग सेंटर से लगभग 4,800 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेज दिया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि 836 और लोगों को वापस भेजने की तैयारी है. भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में 'बंगाल को अवैध प्रवासियों से मुक्त कराने और सीमाओं को सुरक्षित करने' का वादा किया था. नए मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालने के कुछेक हफ्तों के भीतर ही इस पर काम शुरू कर दिया.
इससे पहले 23 मई को राज्य के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग ने जिलाधिकारियों को गिरफ्तार अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को रखने के लिए 'होल्डिंग सेंटर बनाने की दिशा में उचित कार्रवाई' करने को कहा था. यह पत्र सरकार की तरफ से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भारत-बांग्लादेश सीमा के लगभग 600 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ लगाने के लिए 120 एकड़ जमीन सौंपने के ठीक तीन दिन बाद आया था. अभी 280 एकड़ जमीन और सौंपी जानी है.
केंद्र सरकार पिछले कई सालों से राज्य सरकार पर ऐसे कदम उठाने के लिए दबाव बना रही थी लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इन निर्देशों को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया था. अब उत्तर 24 परगना और मालदा जिलों के सीमावर्ती इलाकों में प्रमुख पारगमन बिंदुओं पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. बांग्लादेश लौटने के इच्छुक लोगों के लिए हकीमपुर सीमा चौकी मुख्य निकास बिंदु बनी हुई है.
इस बीच, सीमा पार इन गतिविधियों को लेकर कुछ बेचैनी देखी जा रही है. सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल पर बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने भारत का 'आंतरिक मामला' बताया. हालांकि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि उनका देश ऐसी किसी बाड़बंदी से 'डरने' वाला नहीं.
इससे पहले 20 मई को अधिकारी ने ऐलान किया था कि अवैध प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग की ओर से दो मई, 2025 को जारी पत्र में तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा. इस पत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 'पहचान करो, हिरासत में लो और वापस भेजो' योजना के संबंध में निर्देश दिए गए थे जिसमें फॉरेनर्स आइडेंटिफिकेशन पोर्टल (एफआइपी) पर प्रवासियों का बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज करना शामिल था. फिलहाल, राज्य के सीमावर्ती जिलों में ऐसे 11 होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं.
अगर हिरासत में लिया गया कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक होने का दावा करता है, तो उसके बताए गृह राज्य से 30 दिनों के भीतर सत्यापन पूरा करना होगा. आव्रजन ब्यूरो वापस भेजे गए लोगों की एक सार्वजनिक सूची तैयार करेगा. साथ ही उनके दस्तावेजों को रद्द करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, चुनाव आयोग और अन्य एजेंसियों के साथ डेटा साझा करेगा.
केंद्र सरकार का पिछला 'देशव्यापी अभियान' उस समय विवादों में घिर गया था, जब कथित तौर पर पहचान दस्तावेजों के बावजूद कई बांग्ला भाषी भारतीय मुसलमानों को जबरन बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिया गया था. इन घटनाओं ने ढाका की चिंता बढ़ा दी थी, जो कहता रहा है कि वह बिना किसी सत्यापन एकतरफा तरीके से लोगों को अपनी सीमा में धकेले जाने को स्वीकार नहीं करेगा.
हालांकि, मई 2025 के दस्तावेज का तेरहवां बिंदु ढाका को कुछ राहत देने वाला है. इसके मुताबिक, किसी भी अवैध प्रवासी की गिरफ्तारी के बाद राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को उसकी पूरी जानकारी विदेश मंत्रालय के साथ साझा करनी होगी. फिर विदेश मंत्रालय बांग्लादेश उच्चायोग या म्यांमार दूतावास (रोहिंग्याओं के मामले में) के साथ समन्वय स्थापित करेगा. बांग्लादेश विदेश सेवा के एक अधिकारी के मुताबिक, ''इससे भारतीय पक्ष की ओर से मनमाने ढंग से या बिना सोचे-समझे लोगों को वापस भेजने जैसी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी.''
तनाव के नए मुद्दे
सीमा अधिकारियों के लिए बनाए गए 1975 के भारत-बांग्लादेश संयुक्त दिशानिर्देश (जेआइबीजी) की धारा 8(सी) के मुताबिक, दोनों में से किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय सीमा (आइबी) के 150 गज के दायरे में स्थायी या अस्थायी हथियारबंद जवान तैनात करने की अनुमति नहीं है. इसके अलावा, जब तक सीमा अंतिम रूप से निर्धारित नहीं हो जाती, तब तक वहां कोई स्थायी चौकी भी नहीं बनाई जा सकती. भारत और बांग्लादेश के बीच बाड़ लगाने को लेकर होने वाले ज्यादातर विवाद इसी प्रतिबंधित क्षेत्र से जुड़े हैं.
ऐसी कम से कम दो घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें बीएसएफ की ओर से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने की कोशिशों का बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) ने विरोध किया. पिछले कुछ महीनों में सीमा पर तनाव और बढ़ गया है क्योंकि बांग्लादेश का आरोप है कि बीएसएफ की फायरिंग में उसके कई नागरिक मारे गए हैं. इसके जवाब में कुछ इलाकों में बीजीबी की तरफ से भी फायरिंग की गई है. सीमा पर मौतों को रोकना बीएनपी के घोषणापत्र में शामिल एक प्रमुख चुनावी वादा था. यही वजह है कि रहमान सरकार के लिए यह कूटनीतिक और घरेलू राजनीति दोनों ही स्तरों पर एक बड़ा मुद्दा बन गया है.
दूसरी ओर, भारत 2017 में हुए द्विपक्षीय समझौते का हवाला देता है (जब अवामी लीग की शेख हसीना सत्ता में थीं). समझौते के तहत दोनों देशों ने अपनी-अपनी सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया था कि अगर दूसरी तरफ से पहले सूचना मिल जाती है, तो जीरो लाइन के 150 गज के भीतर एकीकृत जांच चौकियों का निर्माण होने दें.
लेकिन अब यह बिल्कुल साफ नहीं कि रहमान और उनकी पार्टी बीएनपी 2017 के इस समझौते को आगे मानेंगे या नहीं. इस बीच, बंगाल में उन 27 लाख लोगों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, जिन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत अपना मताधिकार खो दिया है. मई के मध्य तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने 19 अपीलीय न्यायाधिकरणों में से 12 ने अब तक दर्ज 24.9 लाख अपीलों में से केवल 6,581 का ही निबटारा किया था.
तनाव और कूटनीति
मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों में कई ऐसे भारतीय नागरिक भी हैं, जिनका नाम प्रशासनिक कमियों और दस्तावेज संबंधी दिक्कतों के कारण कटा है. उन्हें डर है कि यही संशोधित मतदाता सूची नागरिकता तय करने का मुख्य आधार बन सकती है.
इन सारे घटनाक्रम के बीच, भारत-बांग्लादेश संबंध—जो 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल किए जाने के समय से ही बेहद खराब दौर से गुजर रहे थे—अब और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं. पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर परस्पर सहयोग ही एकमात्र रास्ता है. उन्होंने कहा, ''सीमा पर बाड़ लगाना दोनों ही देशों के हित में होगा. हमारे पड़ोसियों को इस मामले में सहयोग करना चाहिए. दूसरी तरफ, बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक एम. हुमायूं कबीर का मानना है कि भारत की घरेलू राजनीति में दिए जाने वाले बयान इस राह में रोड़ा बन सकते हैं. उन्होंने कहा, ''अक्सर भारतीय राजनेताओं के कुछ बयानों की वजह से हमारे देश में तीखी प्रतिक्रियाएं होती हैं. ऐसी बातें दोनों ही तरफ से नहीं होनी चाहिए.''
अवैध प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान अब तेजी से भारत और बांग्लादेश के लिए एक बड़ी राजनैतिक और कूटनीतिक परीक्षा का रूप लेता जा रहा है. पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार जैसे-जैसे अपना रुख कड़ा करती जा रही है, दोनों पड़ोसियों के बीच के रिश्तों को पटरी पर लाने की कवायद उतनी ही बड़ी अग्निपरीक्षा बनती जा रही है.