ठगा धन लौटने की बनी उम्मीद

ईडी की संगठित कार्रवाइयों से पीएसीएल के मामले में हड़पे गए अरबों रुपए भोले-भाले निवेशकों को वापस दिलाने की राह खुली

आस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड स्थित शेरटन ग्रैंड मिराज रिजॉर्ट

- मुनीश पांडेय

यह दंतकथा की तरह था. एक ग्वाला मानो पूरे जगत का मालिक बन बैठा हो. जी हां, निर्मल सिंह भंगू ने अपने वक्त में खूब मलाई काटी. अपने गांव अटारी में रोज सुबह साइकिल पर दूध बेचने से शुरू करके वे आइपीएल की टीम किंग्स इलेवन पंजाब के मुख्य स्पॉन्सर बन गए.

उसके विज्ञापन में ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ब्रेट ली दिखाई देते थे. यह पर्ल एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के लिए कामयाबी का शिखर था. इसी रियल एस्टेट और फार्मलैंड डेवलपमेंट फर्म के जरिए उन्होंने अरबों बनाए थे. वे कलकत्ता की चिट फंड कंपनी पीयरलेस के एजेंट रह चुके थे.

बेशक उससे भी मदद मिली. भारत के 5.43 करोड़ जैसी बड़ी संख्या में निवेशक उनके बेचे सपने के झांसे में आ गए. सपना था विकसित की गई खेती की जमीन, जो तैयार होने पर सौंप दी जाएगी.

भंगू 2024 में गुजर गए. उन्होंने जो 68,000 करोड़ रुपए उगाहे थे, वे भी उनके साथ छूमंतर हो गए. अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऐतिहासिक बहाली प्रक्रिया चालू की है. इससे रकम ठगे गए लोगों को लौटाई जा रही है. किसान, दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी, गृहणियां, वे भी पंजाब, राजस्थान, बंगाल और महाराष्ट्र में फैले. इन सबको पीएसीएल के एजेंटों के विशाल जाल और सब कुछ वैध होने के झांसों के जरिए चूना लगाया गया था. मसलन, पॉवर ऑफ अटॉर्नी, समझौते और ऐसे ही अनोखे दस्तावेज, खेल जगत के शिखरों की उधार ली गई चमक, यानी विश्व कबड्डी कप की स्पॉन्सरशिप, आइपीएल, ब्रेट ली की बालसुलभ मुस्कान.

उन्होंने यह नहीं देखा कि सारी चमक-दमक के पीछे सीधी-सादी पॉन्जी स्कीम थी. नए निवेशकों से मिली रकम के कुछ हिस्से से पुराने निवेशकों का धन चुकाया जा रहा था. जतन इतना था कि काम कर रहे उद्यम का भ्रम बना रहे. बाकी रकम आलीशान संपत्तियों में लगाई जा रही थी—ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में शेरेटन ग्रैंड मिराज रिसॉर्ट, न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में विला, वगैरह-वगैरह.

भारत में फर्जी को वैध दिखाने के लिए बनाई गई फ्रंट कंपनियों के पास संपत्तियों की लंबी होती फेहरिस्त थी. कुछ बेच दी गईं. रकम डायरेक्टर और शेयरधारकों को मिली, रही परिवार के अंदर ही. संदिग्ध कामकाज का ढांचा साफ-सुथरा था. मसलन, कोलकाता की फर्जी कंपनियों को जमीन विकसित करने के खर्चों की आड़ में धन मिल रहा था, नकदी निकाली जा रही थी, हवाला के जरिए भेजी जा रही थी.

अठारह साल का यह साम्राज्य 2014 में भरभराकर ठह गया. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एफआइआर दर्ज की. धन के रास्तों का पता लगाने के लिए ईडी भी आ गया. 2018 में उसने पहला बड़ा धावा बोला. शेरेटन की बिक्री से हुई कमाई जब्त कर ली. जल्द ही उसने विशेष अदालत में धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की. यह मायूस निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण थी.

पंजाब के गौहर और लुधियाना में जब्त की गई संपत्तियां

धन लौटाने की नीति
वित्त वर्ष 2025-26 में ईडी की कार्रवाइयों की लहर आ गई. पीएसीएल की परिसंपत्तियों को बेचकर देनदारियां चुकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में जो समिति बनाई थी, उसने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पाई. एजेंसी ने तेजी से कदम उठाए. उसने सात अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए और 26,324.17 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कर दीं. पीएसीएल मामले में उस वित्त वर्ष से पहले अटैच की गई संपत्तियां महज 706.4 करोड़ रुपए की थीं.

नई जब्त की गई संपत्तियों में मेसर्स पीएसीएल लिमिटेड, उससे जुड़ी संस्थाओं और भंगू परिवार के सदस्यों के नाम पर और उनकी मिल्कियत में दर्ज संपत्तियां थीं. विदेश भाग गए आरोपियों को पकड़ने के लिए ईडी ने पूरी ताकत झोंक दी. यूएई प्रतीक कुमार के प्रत्यर्पण के अनुरोधों पर जल्द ही कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उसके खिलाफ इंटरपोल के रेड कॉर्नर, ब्लू कॉर्नर और सिल्वर नोटिस जारी हुए हैं. सिल्वर नोटिस के तहत भगोड़ों की परिसंपत्तियों का दुनिया भर में पता लगाया जाता है. इसके निशाने पर उसे भेजे गए 2,285 करोड़ रुपए भी हैं. भंगू की पत्नी प्रेम कुमार, बेटियों बरिंदर और सुखविंदर, और सुखविंदर के पति गुरप्रताप सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट हैं.

सुखविंदर और गुरप्रताप के खिलाफ भगोड़े आर्थिक अपराधी कानून के तहत कार्यवाहियां चल रही हैं. बरिंदर को घोषित अपराधी करार दिया गया है. उसका पति हरसतिंदर पाल सिंह हेयर गिरफ्तार है. मेडागास्कर में पर्ल टूरिज्म मालागासी के खिलाफ लेटर रोगेटरी जारी किए गए. ईडी ने 2025 में ऑस्ट्रेलिया में बरिंदर की आवासीय संपत्ति अटैच कर दी. साथ ही दो संस्थाओं, माइग्रुप होल्डिंग्ज और माइरिसॉर्ट ग्रुप 1 के बारे में और सबूत मांगे.

एसेट रिकवरी नेटवर्क एआइआइएल-एपी के मदद के अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए न्यूजीलैंड ने ईडी को ऑकलैंड की एक संपत्ति के बारे में इत्तला दी. यह कभी प्रेम कुमार और कुलवरन सिंह के नाम पर थी और 2015 में बेची गई थी. ईडी ने पहली जून को पंजाब के रामनगर में ज्ञान सागर एजुकेशनल और चैरिटेबल ट्रस्ट की 14 अचल संपत्तियां अटैच कर दीं. इनका बाजार मूल्य 1,595.85 करोड़ रुपए था. कुल 28,626 करोड़ वापस मिल गए.

सबसे अच्छी घटना 30 मार्च को हुई जब विशेष अदालत ने 455 अचल संपत्तियां लोढ़ा कमेटी को वापस सौंपने का आदेश दे दिया. इनका बाजार मूल्य करीब 15,582 करोड़ रुपए है. समिति अब इन्हें बेचने और बिक्री से मिली रकम ठगे गए निवेशकों में बांटने के काम की देखरेख करेगी. पीएमएलए के तहत जो भी वसूली हुई, उन्हें अब तक सरकार को सौंपा जाता था. इस आदेश ने पहली बार पीड़ितों को लाभान्वितों में बदल दिया है. 

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