माझी भए कोतवाल
मोहन चरण माझी सरकार ने अपराधों के विरुद्ध चलाया चाबुक. हर तरह के अपराधियों के खिलाफ एक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान छेड़ा गया

जिसे भी लगता था कि मोहन चरण माझी बिना प्रशासनिक इच्छाशक्ति वाले मुख्यमंत्री हैं, वे ऐसे ख्याल अपने मन से निकाल दें. ओडिशा के सीधे-सादे मुख्यमंत्री ने अपराधों के खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाइयों में से एक पर दस्तखत कर दिए हैं. मई की 12 से 16 तारीख के बीच इस विशेष अभियान के तहत 1,700 से ज्यादा कथित अपराधी गैरजमानती वारंट पर जेल के सीखचों के पीछे डाल दिए गए.
माझी ने ओडिशा में बढ़ते हिंसक अपराधों के खिलाफ खुलेआम चिंता जाहिर की. बस फिर क्या था, पुलिस हरकत में आ गई. अभियान का आदेश दिया डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने और निगरानी कर रहे हैं एडिशनल डीजीपी संजय कुमार. यह तमाम क्षेत्रों में चलाया जा रहा है और निशाने पर हैं भगोड़े, नशे के खुदरा कारोबारी, अवैध खनन करने वाले, गैरलाइसेंसी बंदूकें रखने के शौकीन और नशे में गाड़ी चलाने वाले भी.
दो क्षेत्रों पर खास ध्यान
कुल मिलाकर अभियान खत्म होते-होते पुलिस ने उन 1,771 अपराधियों पर फंदा कस दिया जिनके खिलाफ वारंट थे. इसके अलावा 191 फरार अभियुक्तों को भी खोज निकाला और अदालतों में पेश कर दिया गया. आदतन अपराधियों को गंभीर चेतावनी देते हुए पांच 'कुख्यात अपराधियों' पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) में मुकदमे दर्ज किए गए.
अभियान में दो विशेष क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया. एक नशीले पदार्थ, जिसे ओडिशा में तेजी से बढ़ते संकट की तरह देखा जा रहा है. राज्य में नशीले पदार्थों की जबरदस्त खेती है, जिसकी बदौलत वह राष्ट्रीय स्तर पर नशे की बुराई से ग्रस्त सबसे अव्वल राज्यों में आ गया है. युवा इसके सबसे बड़े शिकार हैं.
इनमें सबसे सस्ती है भांग. भारत में ओडिशा इसका दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. इसकी अवैध खेती कोरापुट, मलकानगिरि, कंधमाल और गंजम में खूब फलती-फूलती बताई जाती है. यह स्थिति तब है जब पुलिस हर साल दसियों-हजार एकड़ फसल नष्ट कर देती है. माना जाता है कि दक्षिण और दक्षिण पश्चिम दिशा में फैले इन जिलों से भारत के दूसरे हिस्सों में बड़ी तादाद में भांग की तस्करी होती है. फिर हैरानी क्या कि दक्षिण-पश्चिमी इलाकों से ही 1,943 किलो गांजे के साथ नशे की सबसे बड़ी खेप पकड़ी गई. कुल 3,026 किलो से ज्यादा गांजा पकड़ा गया. हेरोइन और ब्राउन शुगर सरीखे पदार्थों का सेवन भी बढ़ता माना जा रहा है.
अवैध खनन वह दूसरा क्षेत्र है जिस पर विशेष ध्यान दिया गया. ओडिशा में यह राजनैतिक तौर पर संवेदनशील मुद्दा है. कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर अवैध खनन और खनिजों की ढुलाई में इस्तेमाल कुल 179 वाहन जब्त किए गए. कई पुलिस थानों के बाहर ट्रक, ट्रैक्टर, डंपर, टिपर, जेसीबी और खनन में इस्तेमाल दूसरे भारी वाहनों की कतारें देखी गईं.
डीजीपी खुरानिया कहते हैं, ''अपराध और माफिया के खिलाफ विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे.'' गैरकानूनी असलहों की धरपकड़ और सड़क सुरक्षा लागू करना भी इस अभियान में शामिल था. अंतिम आंकड़े दमदार दिखाई देते हैं. इन पांच दिनों के दौरान यातायात के विभिन्न नियमों का उल्लंघन करने के लिए जुर्माने के तौर पर करीब 1.89 करोड़ रुपए इकट्ठा किए गए. एक प्रतीकात्मक और मानीखेज पहलू यह है कि गो तस्करी के भी पांच मामले दर्ज किए गए. पुलिस ने दावा किया कि एक आरोपी को गिरफ्तार कर चार वाहनों से 33 मवेशी बचाए गए.
माझी का यह सख्त अभियान क्या ओडिशा की साफ-सफाई कर पाएगा? कह पाना मुश्किल है. अवैध खनन को ही लीजिए. यह वह आपराधिक क्षेत्र है जो चढ़ते-चढ़ते शीर्ष पर जा पहुंचा. इसमें धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का इतना भारी इतिहास रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के बनाए एक जांच आयोग ने ओडिशा को प्राथमिक ध्यान का विषय बनाया. खनिजों की खुदाई, विस्थापन और पारिस्थितिकी विनाश के नैरेटिव का भी हिस्सा रही है. माझी के लिए ज्यादा पेचीदा मुश्किल यह तय करने में आ सकती है कि क्या गैरकानूनी के दायरे में आता है और क्या कानूनी है.