अब आया नंबर
बंगाल में एसआइआर शुरू होने से पहले ही करीब दस लाख नाम कटने से सियासी गर्मी बढ़ने लगी

यह बंगाल का दोहराव दिखाई देता है. मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) तेजी से बढ़ते तूफान की तरह पड़ोसी ओडिशा में आ धमका है और यहां भी वही कहर बरपा रहा है. सफाई के पहले चरण में करीब 9.8 लाख नाम हटा दिए गए हैं.
मृतक, दूसरी जगहों पर जा बसे और इसी तरह के अन्य लोग छनकर बाहर हो गए. अधिकारियों का कहना है कि एसआइआर से हटकर हर साल होने वाली इस कवायद के इस चरण में आम तौर पर बहुत कम नाम हटते हैं.
मगर जनवरी से मार्च के दरमियान सीधे स्थानिक जानकारियां इकट्ठा करके निकाले गए इस साल के विवादास्पद आंकड़े ने विपक्ष में खतरे की घंटियां बजा दीं. खासक जब 'विशेष गहन' चरण अभी होना है.
बीजू जनता दल (बीजद) ने खतरे की आहट सुनने और बताने में जरा देर नहीं की. पार्टी के बड़े नेताओं देवी प्रसाद मिश्र, प्रसन्न आचार्य और बिजय नायक ने तुरत-फुरत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और इतनी बड़ी तादाद में नाम हटाए जाने पर सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि जनवरी में होने वाले सालाना पुनरीक्षण में आम तौर पर करीब सात लाख नाम हटाए जाते हैं. उन्होंने कहा, ''पहले मतदाता सूची में शामिल होने के बावजूद महज एक साल और चार महीनों के भीतर 9.8 लाख वोटरों के नाम हटा दिया जाना गंभीर चिंता पैदा करता है.''
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईओ) को लिखी चिट्ठी में बीजद ने 'बड़े पैमाने पर मताधिकार छीने जाने' के खिलाफ आगाह किया. फॉर्म-7 के जरिए दाखिल करीब दो लाख आपत्तियों का हवाला देते हुए उन्होंने इसे लोगों में व्यापक रूप से फैली बेचैनी का सबूत बताया. पार्टी ने कहा कि प्रवासी कामगार खास तौर पर मुश्किल स्थिति में हैं—सत्यापन के दौरान महज गैरमौजूदगी की वजह से उनके नामों का हटाया जाना उनसे 'मूलभूत अधिकार' छीनना है. राज्य कांग्रेस प्रमुख भक्त चरण दास ने भी सख्त छानबीन की मांग करते हुए कहा कि '9.8 लाख काफी बड़ी संख्या है.''
गलती की स्वीकारोक्ति?
लगातार हो रही आलोचना को देखते हुए सीईओ आर.एस. गोपालन ने सख्त देखरेख के कदम उठाए. अधिकारियों ने स्वीकारा कि खामियां रही हैं. कई 'हटाए गए' मतदाता अब भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रह रहे हैं. दूसरे मामलों में बूथ लेवल अफसरों (बीएलओ) ने कथित तौर पर ठिकानों पर जाकर सीधे समुचित सत्यापन नहीं किया. एक दोषी सामने आया जब सीईओ ने निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया कि फॉर्म-7 के रूप में दाखिल 'कम से कम 50 फीसद' आपत्तियों का भौतिक सत्यापन पक्का करें.
गलती से निकाले गए सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने का वादा किया गया है. अब हेल्पलाइन, ईमेल और पोर्टलों के जरिए दाखिल शिकायतों की समीक्षा का काम चल रहा है. फिर भी राजनैतिक माहौल गरमा रहा है, खासकर जब मंत्री सुरेश पुजारी 'ओडिशा में घुसपैठियों' के होने की तरफ इशारे कर रहे हैं.