चुनौतियों से दो चार होती चारधाम यात्रा
देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के जरिए कम समय में देहरादून पहुंच सकेंगे श्रद्धालु. ऐसे में इस बार भीड़ को नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौती

- एम. सी. पांडे
वैदिक मंत्रोचार के साथ जब 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर्व पर गंगोत्री धाम के कपाट खोले गए तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद वहां पहुंचे थे. यमुनोत्री धाम में यमुना के कपाट भी छह माह के लिए 19 अप्रैल की दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर खोल दिए गए. इस तरह अक्षय तृतीया पर उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की शुरुआत हो गई. उसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ के कपाट खोल दिए गए. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और उत्तराखंड सरकार ने इस साल इस यात्रा को लेकर नए नियम लागू किए हैं, जिनमें से कुछ को लेकर काफी विवाद भी खड़ा हुआ है.
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बद्रीनाथ, केदारनाथ सहित अपने अधीन 47 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगा दी है. गंगोत्री यमुनोत्री मंदिर समिति ने भी ऐसी ही व्यवस्था अपने अधीन आने वाले मंदिरों के लिए भी करने की घोषणा कर डाली है. सिख, बौद्ध और जैन को सनातन परंपरा का हिस्सा मानकर छूट दी गई है. गैर-हिंदू श्रद्धालु अगर दर्शन करना चाहेंगे तो उनको हलफनामा देना होगा.
चारधाम यात्रा के लिए डिजिटल पंजीकरण 6 मार्च से शुरू हो चुका है और 19 अप्रैल को जब यात्रा शुरू हुई तब तक लाखों श्रद्धालु यात्रा के लिए रजिस्टर करा चुके हैं. भीड़ प्रबंधन के लिए एसओपी जारी किए गए हैं. मंदिर परिसर में मूर्तियों और अन्य पवित्र स्थानों के स्पर्श आदि पर पाबंदियां और कुछ पूजा-अनुष्ठानों में शुल्क बढ़ोतरी का भी प्रस्ताव है.
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा को राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख का आधार माना जाता है. पिछले साल अकेले इस यात्रा से लगभग 7,500 करोड़ रु. का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान लगाया गया था. इस साल चूंकि यात्रा की सुगमता बढ़ी है इसलिए इस यात्रा से पिछले साल के मुकाबले कहीं अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इस यात्रा से कुल आर्थिक प्रभाव (इकोनॉमिक मल्टीप्लायर इफेक्ट के साथ) 8,000 करोड़ रुपरु से अधिक होने का अनुमान है.
यह यात्रा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करती है. साल 2025 में उत्तराखंड चारधाम यात्रा कुल 209 दिनों तक चली थी. कुल 51 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री समेत हेमकुंड साहिब के दर्शन किए. केदारनाथ में सबसे ज्यादा, 17,68,795 तीर्थयात्री पहुंचे.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से दिल्ली से उत्तराखंड की दूरी काफी कम हो गई है. इससे दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र ढाई घंटे का हो गया है. कांग्रेस नेता हरीश रावत कहते हैं कि इस एक्सप्रेसवे से लोग जल्द देहरादून के भीतर तो प्रवेश पा लेंगे लेकिन उसके बाद जो देहरादून के अंदर जाम से घंटों लोगों का दम घुटेगा.
उत्तराखंड परिवहन ने चारधाम यात्रा के संचालन को लेकर 2,200 से 2,300 बसों के संयुक्त रोटेशन को तैयार किया है. परिवहन विभाग के अनुसार, इस साल ऋषिकेश के साथ ही हरिद्वार से भी बसों की शटल सेवाएं संचालित की जा रही हैं. ऋषिकेश में चारधाम यात्रा को देखते हुए 100 बसों को रिजर्व रखा गया है.
उत्तराखंड पुलिस ने चारधाम यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए यात्रा मार्ग को 16 सुपर जोन, 43 जोन और 149 सेक्टरों में विभाजित किया है. यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस के साथ-साथ पीएसी, होमगार्ड और पीआरडी के जवानों की तैनाती की है. गढ़वाल रेंज के आइजी राजीव स्वरूप कहते हैं कि इस साल की यात्रा को पिछले अनुभवों के आधार पर अधिक डिजिटल, सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाने के लिए पुलिस ने मास्टर प्लान तैयार किया है.
इसके तहत यात्रा की हर पल मॉनिटरिंग के लिए एक अत्याधुनिक 'चारधाम कंट्रोल रूम' स्थापित किया गया है. पुलिस की सोशल मीडिया सेल के माध्यम से यात्रियों को मौसम, आपदा और मार्ग की स्थिति के बारे में रियल-टाइम अपडेट देने की भी व्यवस्था की गई है.
इस बार उत्तराखंड पुलिस के ट्रैफिक निदेशालय ने चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गूगल मैप के जरिए नई सुविधा शुरू की है. इसके तहत अगर गूगल मैप के जरिए श्रद्धालु यात्रा पर जा रहा है, तो उसको यात्रा मार्ग पर लैंड स्लाइड होने के बाद अलर्ट आ जाएगा.
ट्रैफिक निदेशालय के एसपी शाहजहां जावेद खान का कहना है कि यात्रा प्रबंधन के लिए कुल 462 यातायात पुलिसकर्मी और 294 होमगार्ड/पीआरडी जवान तैनात किए गए हैं. इसके अलावा चारधाम यात्रा के दौरान अगर ट्रैफिक का दबाव पड़ता है, तो ट्रैफिक निदेशालय ने प्लान ए, बी और सी बना रखे हैं. एसपी खान के अनुसार, यात्रा मार्ग पर सबसे अधिक हरिद्वार और देहरादून में वाहनों का दबाव रहता है. ऐसे में हरिद्वार और देहरादून में हॉल्टिंग स्थान और पार्किंग व्यवस्था की गई है.
यात्रा मार्ग पर कमर्शियल वाहनों के लिए परिवहन विभाग से 'ग्रीन कार्ड' और 'ट्रिप कार्ड' हासिल करने अनिवार्य हैं. ये 'ग्रीन कार्ड' और 'ट्रिप कार्ड' 30 नवंबर तक मान्य होंगे. पहाड़ी मार्गों पर दुर्घटना और जाम से बचने के लिए यात्रा मार्ग पर वाहनों को संचालित करने का समय सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक निर्धारित है. निर्धारित समय के बाद यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले वाहन को तत्काल सीज किया जाएगा. यात्रा मार्ग पर उन्हीं बसों का संचालन होने दिया जाएगा जो तकनीकी रूप से फिट होंगे.
बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के चालकों को वाहन संचालन की अनुमति तभी मिलेगी जब वे पहाड़ी मार्ग में वाहन चलाने का प्रशिक्षण ले लेंगे. वाहनों पर रिफ्लेक्टर, फर्स्ट एड बॉक्स और अन्य सुरक्षा उपकरण रखना अनिवार्य किया गया है. फर्स्ट एड बॉक्स में एक्सपायरी दवा मिलने पर वाहन संचालक का चालान किया जाएगा. वाहन चलाते वक्त चालक को जूते पहनना अनिवार्य है. स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य के प्रति एहतियात बरतने के लिए 13 भाषाओं में दिशानिर्देश जारी किए हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि चारधाम यात्रा 2026 को पूर्णत: प्लास्टिक मुक्त बनाना जरूरी है. शहरी विकास विभाग, पर्यटन विभाग तथा वन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर उन्होंने कूड़े एवं प्लास्टिक वेस्ट की ड्रोन के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग करने को कहा है. इसके लिए एक अत्याधुनिक कमांड ऐंड कंट्रोल केंद्र भी स्थापित होगा. चारधाम यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले 30 नगर निकायों में यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यावरण मित्रों की तैनाती कर ली गई है.
मुख्यमंत्री धामी ने जानकारी दी कि केदारनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को अब ठंडे पानी के स्थान पर 24 घंटे गरम पानी उपलब्ध कराया जाएगा. यह व्यवस्था पिरूल (चीड़ की पत्तियां) और खच्चरों की लीद से तैयार बायोमास पेलेट्स के माध्यम से संचालित गीजरों से की जाएगी. ये गीजर जीएमवीएन केदारनाथ एवं लिंचोली में लगाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभिनव प्रयोग केदारनाथ यात्रा मार्ग पर खच्चरों की लीद से होने वाली समस्या का भी समाधान करेगा. हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि इन व्यवस्थाओं पर उत्तराखंड सरकार और सीएम पुष्कर सिंह धामी के दावे कितने असरदार साबित होंगे.