बिहार में निशांत के साथ बदलने लगा जद(यू)!

नीतीश कुमार के पुत्र निशांत की सक्रियता के साथ उनकी पार्टी पीढ़ीगत बदलाव की ओर बढ़ चली

निशांत कुमार पार्टी के भीतर और बाहर भी सक्रिय नजर आ रहे

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता और बिहार के नवीनगर से विधायक चेतन आनंद अपने फेसबुक वॉल पर निशांत को राज्य का भविष्य बताते हैं. मीडिया से बातचीत में वे बार-बार कहते हैं कि नीतीश कुमार केपुत्र निशांत कुमार में मुख्यमंत्री बनने के सारे गुण हैं.

उनकी ही तरह जद (यू) के कई अन्य युवा और पहली बार विधानसभा पहुंचे विधायक निशांत के समर्थन में खड़े नजर आते हैं. इनमें इस्लामपुर से विधायक रूहेल रंजन, कहलगांव से शुभानंद मुकेश, गाय घाट की विधायक कोमल सिंह और घोषी के विधायक ऋतुराज शामिल हैं.

मीडिया ने इन्हें टीम निशांत का नाम दिया है. ये लोग रणनीति के तहत अलग-अलग मौकों पर निशांत की तारीफ करते हैं और उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करते हैं. इनमें से ज्यादातर लोग किसी ने किसी बड़े राजनेता के पुत्र हैं, जो अलग-अलग वक्त में नीतीश कुमार के साथी रहे हैं.

इसकी शुरुआत निशांत के जद (यू) जॉइन करने के ठीक पहले हुई जब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने अपने आवास पर एक बैठक बुलाई. उसमें निशांत के साथ पार्टी के नए विधायकों की मुलाकात करवाई गई. बाद में इन विधायकों ने भी आपस में बैठक की.

निशांत ने 8 मार्च को महिला दिवस के मौके पर अपने पिता की पार्टी की सदस्यता ली थी. अभी इस बात को एक माह भी पूरा नहीं हुआ है, मगर पार्टी में अनौपचारिक रूप से मान लिया गया है कि अब वही जद (यू) के नेता हैं. इसके बावजूद कि वे पार्टी के किसी पद पर नहीं हैं, मगर हाल के दिनों में वे दो चरणों में विभिन्न जिलों के अध्यक्षों और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुके हैं. पार्टी के प्रवक्ताओं के साथ भी उनकी एक राउंड बैठक हो चुकी है. उनका पार्टी दफ्तर कई बार आना-जाना हो चुका है.

पार्टी के बाहर भी वे काफी सक्रिय हैं. वे विभिन्न धार्मिक समारोहों में शिरकत कर रहे हैं. ईद के दिन वे पटना के गांधी मैदान में होने वाली नमाज में शामिल हुए तो रामनवमी के मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से आयोजित रामनवमी की सभा में उन्होंने शिरकत की. बिहार दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में भी वे शामिल हुए. इस बीच वे अलग-अलग नेताओं के घर भी जाते हैं. इनमें प्राय: सभी उनके पिता के मित्र हैं, चाहे वह वशिष्ठ नारायण सिंह हों, नरेंद्र नारायण यादव या फिर आनंद मोहन. 

ऐसे में, अब तक सरल और संकोची नजर आने वाले निशांत खुद को राजनीति के माहौल में ढालते नजर आ रहे हैं. भीड़-भाड़ के बीच वे सहजता से गुजरते हैं और एक-एक कार्यकर्ता से मिलकर संवाद करने की कोशिश करते हैं. उनके एक करीबी बताते हैं कि ईद के दिन निशांत ने पटना के 15 आयोजनों में शिरकत की. वे जब अपने गांव कल्याण बिगहा गए तो वहां के महादलित टोला जाकर महिलाओं और बच्चों से मिले.

दिलचस्प यह कि उनके पिता नीतीश कुमार भी निशांत को समुचित स्पेस देते नजर आते हैं. इसका नजारा तब दिखा, जब केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के घर आयोजित इफ्तार पार्टी में पहले नीतीश खुद आए और दो मिनट में सबका अभिवादन करके तत्काल निकल गए. थोड़ी देर बाद जब निशांत आए तो उनके साथ मुख्य अतिथि जैसा बर्ताव किया गया. वे काफी देर ठहरकर सबसे मिले. इसी तरह सीएम आवास में आयोजित इफ्तार पार्टी में निशांत नमाजियों के साथ आगे बैठे नजर आए और नीतीश पीछे कुर्सी पर बैठे दिखे.

कहा यह भी जा रहा है कि नीतीश के सीएम पद छोड़ने के बाद जद (यू) के कुछ वरिष्ठ नेता भी विदाई ले सकते हैं. इनमें मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि नीतीश के इस्तीफे के बाद बिहार में जब नई सरकार बनेगी तो उसमें जद (यू) की तरफ से मंत्रियों की सूची में बड़ी संख्या में नए लोग होंगे, जिनके साथ निशांत को काम-काज में सहजता हो. माना जा रहा है कि संजय कुमार झा इस काम में खास तौर पर रुचि ले रहे हैं.

वैसे, निशांत के करीबी लोगों का कहना है कि निशांत अपने हमउम्र विधायकों से अधिक अपने पिता के सहयोगियों के साथ हैं, जिनमें राजनेता और अधिकारी दोनों शामिल हैं. इसकी वजह यह बताई जाती है कि निशांत एक अरसे से सीएम आवास में ही रहते आए हैं, जहां उनके पिता के करीबी सहयोगी आते थे. ऐसे में उनके साथ निशांत की सहजता बनी हुई है. मसलन, नीतीश के संघर्ष के दिनों से साथी और पार्टी के सीनियर नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के पुत्रों से निशांत की सहज मित्रता है. इसी तरह जिस टीम निशांत की बात कही जा रही है, उनमें भी ज्यादातर नीतीश के मित्रों के पुत्र हैं. ऐसे में इन युवा नेताओं के पिताओं के साथ भी निशांत सहज बताए जा रहे हैं.

इसके बावजूद, जानकार यह मानते हैं कि नीतीश के इस्तीफे के साथ जद (यू) में पीढ़ीगत बदलाव शुरू हो जाएगा और धीरे-धीरे पुराने नेताओं की जगह नई उम्र के लोग लेने लगेंगे. यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि इस वक्त अगर हम पार्टी के सांसदों और विधायकों की सूची देखें तो उनमें 65 और 70 पार के कई लोग दिखते हैं. पार्टी अब तक पुराने नेताओं पर ही भरोसा करती रही है. पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के बारे में राजनैतिक टिप्पणीकार फैजान अहमद कहते हैं, ''नीतीश कुमार के पावर से दूर होने की स्थिति में उनकी उम्र के नेता और दूसरे सहयोगी जो उनके साथ उनकी सत्ता की वजह से थे, दूर जाएंगे ही, यह सामान्य प्रक्रिया है.''

वहीं, निशांत को लेकर जद (यू) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं, ''बहुत अल्प अवधि में निशांत कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की अपेक्षा को पूरा करना शुरू कर दिया है. वे सबके उम्मीद की किरण बन चुके हैं. अब हम यह कहने लगे हैं तीर ही निशांत है और निशांत की तीर है. हम मान रहे हैं कि निशांत पार्टी को भविष्य की उड़ान दिलाने में सक्षम होंगे.''   

वहीं, फैजान अहमद का मानना है, ''निशांत कुमार आज जद (यू) में जिस स्थिति में भी हैं, वह अपने पिता की वजह से हैं. संभवत: अपनी बढ़ती उम्र और खराब होते स्वास्थ्य की वजह से उनके पिता ने पार्टी के लोगों को इशारा कर दिया है कि उनके बाद निशांत को ही पार्टी में आगे बढ़ाना है.'' शायद यही कारण है कि पूरी पार्टी अब निशांत को आगे बढ़ाने और पार्टी के भविष्य के रूप में उन्हें स्थापित करने में जुटी है. 

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