गुजरात में परिंदों की बढ़ रही आबादी
प्रवासी राजहंसों ने दूरवर्ती आर्द्रभूमि अभयारण्यों को छोड़ दिया है और अब कच्छ के विशाल रण (जीआरके) में रह रहे हैं. कच्छ एशिया में राजहंसों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल है

गुजरात में हर दो वर्ष पर होने वाली परिंदों की गणना में बेहद सकारात्मक तस्वीर सामने आई है. चार प्रमुख आर्द्रभूमि (वेटलैंड) और कुछ दूसरे स्थलों पर पक्षियों की संख्या 24 फीसद बढ़ी है.
2024 में 8,33,000 से बढ़कर यह 2026 में 10.3 लाख हो गई. सबसे ज्यादा 56 फीसद की वृद्धि नल सरोवर में दर्ज की गई, जहां पक्षियों की संख्या 2023-24 में 4,12,000 से बढ़कर 2024-25 में 6,42,000 हो गई.
थोल झील में भी पिछले 15 वर्षों में सबसे ज्यादा संख्या दर्ज की गई जहां 74,400 पक्षी हैं. ये आंकड़े उत्साह जगाते हैं क्योंकि ये दोनों वेटलैंड अहमदाबाद के शहरी विस्तार के बाहरी किनारों पर स्थित हैं.
परिंदों की संख्या में वृद्धि का श्रेय नल सरोवर में नौका विहार पर पाबंदी को दिया जा रहा है. 2024 में वडोदरा की हरि नदी में नौका पलटने की घटना—जिसमें 14 लोगों की मृत्यु हो गई थी—के बाद यह पाबंदी लगाई गई थी.
राज्य में बारिश भी दीर्घकालिक औसत से 25 फीसद ज्यादा रही है (जो जलवायु परिवर्तन का नतीजा है). दूसरी खबरों की बात करें तो आंकड़े दर्शाते हैं, प्रवासी राजहंसों ने दूरवर्ती आर्द्रभूमि अभयारण्यों को छोड़ दिया है और अब कच्छ के विशाल रण (जीआरके) में रह रहे हैं. कच्छ एशिया में राजहंसों का सबसे बड़ा प्रजनन स्थल है.
तटीय कीचड़ वाले मैदानों और कच्छ के विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र में अलग-थलग नमक के मैदानों तथा कई अन्य अंतर्देशीय वेटलैंड के साथ गुजरात प्रवासी पक्षियों की आवक के लिहाज से मध्य एशिया का महत्वपूर्ण क्षेत्र है.
मध्य एशियाई फ्लाइवे (सीएएफ) 30 देशों तक फैला है और लाखों पक्षियों को आश्रय देता है जो प्रजनन और शीतकालीन स्थलों के बीच हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं. इस बीच, एक हकीकत यह है कि इस वर्ष केवल 270 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गए, जो पिछली गणना में 329 थे.