कांग्रेस में उथल-पुथल
कांग्रेस नेता भूपेन कुमार बोरा के भाजपा में जाने से पार्टी में गुटबंदी और बढ़ी. उधर भगवा खेमे ने ध्रुवीकरण की अपनी रणनीति को और धार देना शुरू किया

असम के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता हेमंत बिस्व सरमा ने सात फरवरी को राज्य पुलिस को असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया. दरअसल, बोरा पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम में अशोभनीय इशारा करने का आरोप लगाया गया था. भाजपा ने इस प्रकरण को लेकर लगातार बोरा पर निशाना साधा, और सरमा ने इसे उनका 'परले दर्जे का' आचरण बताया.
मगर, दस दिन बाद हालात पलट गए. सरमा गुवाहाटी स्थित बोरा के आवास पहुंचे, उनके साथ बैठे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं. नाटकीय घटनाक्रम उसके 24 घंटे पहले ही शुरू हो गया था जब दो बार के विधायक और 2021-25 के दौरान राज्य कांग्रेस अध्यक्ष रहे बोरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.
अपने त्यागपत्र में बोरा ने असम कांग्रेस के नए अध्यक्ष गौरव गोगोई पर आरोप लगाया कि वे पाकिस्तान दौरों को लेकर भाजपा के आरोपों पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए हैं. साथ ही, उन्होंने सांसद रकीबुल हुसैन पर ऊपरी असम में बहुसंख्यक समुदाय को अलग-थलग करने का आरोप लगाया. बोरा का दावा था कि हुसैन और कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह की मिलीभगत ने संगठन को संकट में पहुंचा दिया.
विधानसभा चुनाव करीब होने के बीच बोरा का जाना असम कांग्रेस में जारी इस्तीफों और दलबदल की लहर की ताजा कड़ी है. तीन मौजूदा विधायक पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं. उनमें दो रायजोर दल में और एक असम गण परिषद में चले गए. वहीं, तीन अन्य भाजपा में जाने की तैयारी में हैं.
कमजोर नेतृत्व
जोरहाट से सांसद गोगोई सरमा के मुकाबले कांग्रेस के सबसे विश्वसनीय सिपहसालार बनकर उभरे हैं. वे युवा हैं तथा राष्ट्रीय पहचान और मजबूत सियासी विरासत वाले नेता हैं. मगर उनके नेतृत्व में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है. पंचायत चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा, और आलोचकों का कहना है कि नाजुक मौकों पर उनके निर्णय नहीं लेने के कारण विवाद बढ़ते गए.
ऐसा ही एक मामला नए शामिल नेता रेजाउल करीम सरकार का था. कांग्रेस में आने वाले दिन ही उनकी भड़काऊ टिप्पणियों ने विवाद खड़ा कर दिया. गोगोई चुप रहे, मगर करीब 60 घंटे बाद करीम ने पार्टी छोड़ दी और विधानसभा में विपक्ष के नेता देवब्रत सैकिया तथा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई पर भाजपा से मिलीभगत करने का आरोप लगाया. इसको सरमा के दावे ने और हवा दी कि दोनों आगे चलकर भाजपा में शामिल होंगे. बोरा के इस्तीफे के बाद गोगोई ने सार्वजनिक माफी मांगी, मगर तब तक काफी देर हो चुकी थी.
गोगोई पर बड़ा आरोप यह है कि पार्टी पर उनका नियंत्रण कमजोर है. बोरा का कहना है कि रकीबुल पर्दे के पीछे से असम कांग्रेस चलाते हैं जिसे वे तंज में 'कांग्रेस (आर)' कहते हैं, जिसमें आर का मतलब रकीबुल है. पांच बार के विधायक और पूर्व मंत्री रकीबुल ने 2024 में धुबरी से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को 10 लाख से ज्यादा मतों से हराया था. अब विडंबना देखिए! बोरा का कहना है कि भाजपा के ध्रुवीकरण के नैरैटिव को कमजोर करने के लिए एआइयूडीएफ से गठबंधन तोड़ने पर उन्हें 'दंडित' किया गया, जबकि हुसैन उसके प्रमुख रणनीतिकार थे.
रकीबुल को लेकर असंतोष केवल बोरा तक सीमित नहीं. रायजोर दल में जाने वाले विधायक अब्दुर रशीद मंडल और शेरमन अली ने भी पार्टी छोड़ते वक्त रकीबुल का ही हवाला दिया. बोरा के नेतृत्व में 2026 के सीटों के बंटवारे की हुई शुरुआती प्रगति रकीबुल के आगमन के बाद ठप पड़ गई. इससे कांग्रेस तथा उसके सहयोगियों में भ्रम फैल गया और रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी चिंता जताई.
भाजपा को बढ़त
सरमा ने हुसैन की बढ़ती भूमिका के इर्द-गिर्द अपना सियासी नैरेटिव गढ़कर कांग्रेस को और सांसत में डाल दिया है. असम कांग्रेस को 'कांग्रेस (बीएम)'—बीएम यानी 'बांग्लादेशी मुसलमान'—कहकर वे इसे कथित अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपने अभियान से जोड़ते हैं जिन्हें स्थानीय तौर पर 'मिया' कहा जाता है. बोरा के इस्तीफे ने उन्हें नया सियासी हथियार दे दिया है. इसमें ये असहज तथ्य भी धुंधले हो गए कि रकीबुल असमिया-भाषी मुसलमान हैं, पूर्व मंत्री के पुत्र हैं, और कभी कांग्रेस में सरमा के करीबी सहयोगी रहे थे.
भले ही बोरा को आखिरी बार 2011 में विधानसभा सीट पर जीत मिली थी, मगर कांग्रेस की रणनीति, गठबंधनों और आंतरिक कमजोरियों की उन्हें गहरी जानकारी है. कांग्रेस के लिए उससे भी ज्यादा नुक्सानदेह उनका यह आरोप है कि हुसैन ही कांग्रेस चलाते हैं. यह सीधे भाजपा की ध्रुवीकरण की रणनीति को मजबूती देता है.