मर्यादा की सीमाएं टूटीं

चुनावी राज्य असम में मुख्यमंत्री सरमा की तरफ से गोगोई पर लगाए सनसनीखेज आरोपों के बीच राजनैतिक बयानबाजी हदें पार कर गई

गौरव गोगोई (बाएं) और हिमंता सरमा के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और गर्माने के आसार

विधानसभा चुनाव में कुछ ही माह बचे हैं, और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच जुबानी जंग बहुत तीखी हो चली है. 8 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने गोगोई और उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई पर एक पाकिस्तानी नागरिक से संपर्क रखने और ऐसी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया, जो उनके मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं. गोगोई ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताकर खारिज कर दिया. ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति और गर्माने के आसार हैं.

सरमा के मुताबिक, उनके आरोप 17 फरवरी, 2025 को गठित विशेष जांच टीम (एसआइटी) की रिपोर्ट पर आधारित हैं. एसआइटी तब गठित की गई जब नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में तत्कालीन उच्चायुक्त अब्दुल बासित के बगल में बैठे गोगोई की तस्वीर सामने आई थी. सरमा का दावा है, गोगोई करीब 90 युवाओं को 'कट्टरपंथी' बनाने के प्रयास के तहत उच्चायोग ले गए थे. एसआइटी ने 10 सितंबर, 2025 को सरमा को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

दस्तावेज और खंडन
उनके आरोपों का मुख्य आधार गोगोई की दिसंबर, 2013 की पाकिस्तान यात्रा है—सरमा उस 10 दिवसीय यात्रा को 'अत्यंत गोपनीय' मिशन करार देते हैं. सरमा के मुताबिक, उस दौरान उन्होंने कथित तौर पर 'किसी प्रकार का प्रशिक्षण' प्राप्त किया था. मुख्यमंत्री सरमा का सवाल है कि एक युवा राजनेता आखिर ऐसे देश की यात्रा क्यों करेगा जो 'पर्यटक देश नहीं' नही हैं और पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस्लामाबाद तथा कराची की यात्रा की अनुमति देने के लिए उनके वीजा में बदलाव क्यों किया. सरमा ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय होने के बावजूद गोगोई ने इस यात्रा को लेकर 'डिजिटल चुप्पी' साधे रखी और कभी भी सार्वजनिक तौर पर इसका खुलासा नहीं किया. 

सरमा कहते हैं कि साल 2014 में पहली बार सांसद बने गोगोई ने यूरेनियम भंडार, सीमा सुरक्षा, पनडुब्बी क्षमताओं और परमाणु संयंत्रों जैसे मुद्दे क्यों उठाए. उनका मानना है कि गोगोई की पाकिस्तान यात्रा के बाद पूछे गए ये सवाल इस्लामाबाद के इशारे पर उठाए गए थे (गोगोई अपने तीसरे कार्यकाल में मौजूदा लोकसभा में अपनी पार्टी के उपनेता हैं). सरमा का कहना है कि ये आरोप सिर्फ एक यात्रा तक सीमित नहीं हैं. उनका दावा है कि एलिजाबेथ ने 2011 से 2012 तक गैर-लाभकारी संस्था लीड पाकिस्तान के साथ काम किया और लीड इंडिया में स्थानांतरित होने के बाद भी वहां से धन लेना जारी रखा, जो विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम का उल्लंघन है.

हालांकि, ये 2013 में गोगोई से उनकी शादी से पहले की बात है. सरमा ने एलिजाबेथ की पाकिस्तान की नौ यात्राओं और पाकिस्तानी बैंक खाते की स्थिति स्पष्ट करने से इनकार किए जाने का भी हवाला दिया. उनका दावा है कि एलिजाबेथ ने पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की, और उनकी तरफ से अगस्त 2014 में कथित तौर पर भेजे गए 45-पृष्ठ के एक दस्तावेज का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट तौर पर खुफिया ब्यूरो की रिपोर्टों और ''केंद्र सरकार को दरकिनार करने'' की रणनीतियों का उल्लेख था.

गोगोई ने सरमा के बयान को 'बेतुका' और 'सी-ग्रेड सिनेमा' जैसा बताकर खारिज कर दिया. साथ ही, कांग्रेस के उस आरोप का बदला बताया जिसमें कहा गया था कि सरमा के परिवार ने 12,000 बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा है. उन्होंने 2013 में पाकिस्तान जाने की बात स्वीकार की लेकिन कहा कि ये एक निजी यात्रा थी. उन्होंने कहा, ''हमारी नई-नई शादी हुई थी.

हम ये देखने गए थे कि वह कहां रहती थी, किस बाजार में जाती थी, कहां खाना खाती थी.'' उन्होंने अपनी पत्नी के काम का बचाव करते हुए कहा कि ये वैध अंतराष्ट्रीय कार्यक्रमों का एक हिस्सा था और तर्क दिया कि अगर राष्ट्रीय सुरक्षा वास्तव में खतरे में थी तो सरमा एसआइटी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई के लिए छह महीने का इंतजार क्यों करते रहे. उनका इशारा आगामी चुनावों पर नजर होने की तरफ था.

बहरहाल, आरोप काफी गंभीर हैं और सिर्फ मुद्दा उठाने के समय के अलावा अन्य पहलुओं की भी गहन जांच होनी चाहिए. राजद्रोह के आरोपों के बावजूद कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है. यह स्पष्ट नहीं है कि यदि गोगोई वाकई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा थे तो भाजपा की केंद्र सरकार ने एक दशक तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. एसआइटी ने कभी गोगोई से पूछताछ नहीं की. गोगोई की तरफ से दिए जवाबों में भी बारीक जानकारियों का अभाव दिखता है. यहां किसी ने भी एक-दूसरे के खिलाफ आरोपों में किसी बात पर बहुत गहराई से जोर नहीं दिया.

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