गरबा की शान, लक्ष्मी मेहरबान
गुजरात में नवरात्रि 15,000 करोड़ रुपए के उद्योग का अवसर. यह उत्सवी उपभोक्तावाद का जीवंत प्रतीक बना

किसी भी आध्यात्मिक आराधना में नृत्य ने आस्थावानों में कभी इतना उत्साह, धूमधाम और रोमांच नहीं जगाया होगा जितना देश के इस इलाके में गरबा पैदा करता है. गुजराती आत्मा का यह ऐसा अचूक पैमाना है जो बताता है कि वे अपना पैसा कहां खर्च करते हैं. और यहां नृत्य की धुनों पर सिक्कों की वर्षा होती है.
पिछले तीन वर्षों में नवरात्रि आयोजन गुजरात में नए शिखर पर पहुंचते जा रहे हैं. उमंग और उत्साह का एक ऐसा उद्योग, जिसका मूल्य 2025 तक 15,000 करोड़ रुपए से ज्यादा होने की बात कही जा रही है. यह 2024 की तुलना में 33 फीसद की आश्चर्यजनक वृद्धि है.
श्रद्धा के उत्सव की नौ रातों में गरबा की नृत्य मंडलियां गांव या मोहल्ले के चौक-चौराहों, शहरी समाजों के इसी तरह के स्थानों को रोशन कर देती थीं- या अति अभिजात वर्ग के, निजी क्लबों के लॉन में ऐसा ही नजारा होता था. एक तरह से समुदाय का जुटान. सड़कों पर ही लोग जुटते थे. लेकिन ऐसा तीन साल पहले तक होता था.
महामारी ने जब गुजरात में नृत्य के कदम थाम दिए तो अभिजात वर्ग ने 2022 में फार्महाउसों और छोटे पार्टी स्थानों पर गरबा के निजी आयोजन शुरू कर दिए. बड़ी भीड़ और संक्रमण का डर तब भी बना हुआ था. लेकिन क्यूरेटेड गिग्स (पेशेवर आयोजकों) के अनुभव को खूब सराहा गया. शहरी मौज-मस्ती करने वालों के गरबा समूह भी लगातार बढ़ते गए. इससे व्यावसायिक गरबा में तेजी से उछाल आया. 2019 में गुजरात में 100 से भी कम गरबा आयोजन होते थे. लेकिन 2023 तक उसके चार बड़े शहरों में से हरेक में यह संख्या 300 को पार कर गई. इस वर्ष पिछले साल की तुलना में चार प्रमुख शहरों-अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट में आयोजन स्थलों में 20 फीसदी वृद्धि हुई है.
तीन दशकों से भी ज्यादा से गरबा के अनुभवी आयोजक और इवेंट मैनेजमेंट फेडरेशन ग्लोबल के अध्यक्ष जयदीप मेहता मानते हैं कि इवेंट पास की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं. बुकिंग प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले इन पास की कीमत औसतन 1,500 रुपए से लेकर 12,000 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति रात तक है. ये तुरंत बिक जाते हैं और फिर ब्लैक में 25,000 रुपए तक में बिकते हैं. हर गरबा स्थल पर रात में औसतन 3,000 लोग आते हैं; बड़े आयोजक सभी नौ रातों में लगभग 8,000 लोगों के आने का दावा करते हैं.
यह उत्सव भी अब लंबा हो गया है और लगभग 20 रातों तक चलता है. नवरात्रि से सप्ताहांत पहले शुरू हो जाता है और दशहरे के एक हफ्ते बाद खत्म होता है. अनुभव भी बढ़ रहा है—अब यह किसी ठाठ-बाट वाली शादी जैसा हो गया है, जिसमें एक महीने पहले भेजे गए विस्तृत निमंत्रण से लेकर शानदार फिल्मी सेट जैसी सजावट, खास तौर से तैयार फूड लाउंज, मेकअप जोन, फुट मसाज, शॉपिंग, गुजराती स्टार गायक और इन सबसे ऊपर उच्च वर्ग के लिए वीआईपी पहुंच तक सब कुछ शामिल है.
इस दौरान मंच और टेंट कारोबारी, संगीत और ध्वनि, परिवहन, प्रकाश और सजावट विशेषज्ञ, डिजाइनरों जैसे सूक्ष्म और लघु उद्योगों को शादी के व्यस्त सीजन के बराबर कारोबार मिलता है. फाइन डाइनिंग और स्टार होटलों को थोड़ा नुकसान हुआ है लेकिन अहमदाबाद में गुजराती थाली रेस्तरां की एक चेन के मालिक दिलीप ठक्कर कहते हैं कि उनके स्तर पर कारोबार ''कम से कम 20 फीसदी बढ़ गया है.''
सितारों भरी रातें
माना जाता है कि प्रमुख कलाकार प्रति रात के लाखों रुपए लेते हें. इस साल भी लोकप्रिय कलाकार गुजराती शहरों और कस्बों में चमक रहे हैं. आदित्य गढ़वी, जिगरदान गढ़वी, ईशानी दवे, पार्थ ओझा, किंजल दवे, गीता रबारी, हार्दिक दवे, भूमि त्रिवेदी, उस्मान मीर जैसे स्थानीय गायकों की चमक बढ़ी है.
फूड ब्लॉगर ईशा शाह, जिन्होंने 2018 में पति रोहन के साथ गरबा आयोजन शुरू किया था, कहती हैं, ''गुजरातियों के पास खर्च करने लायक आय होती है और वे इसे अनुभवों पर खर्च करना पसंद करते हैं.'' वहीं, शहरों के आसपास के गांवों और फार्महाउसों में सस्ते टिकट वाले आयोजनों के लिए कई लोग सिर्फ उस माहौल को महसूस करने के लिए ढोल और शहनाई के अधिक प्रामाणिक सुरों और थाप के लिए एक घंटे की यात्रा करने को तैयार रहते हैं.