उत्तर प्रदेश : फेरी लगाकर अंगूठियां बेचने वाला छांगुर बाबा कैसे बना अवैध धर्मांतरण रैकेट का मुखिया?
छांगुर बाबा पर अज्ञात विदेशी दलालों के इशारे पर सामूहिक धर्मांतरण की भयावह और बड़ी साजिश की अगुआई करने का आरोप है

बलरामपुर जिले के उतरौला कस्बे के बाहरी इलाके में एक गांव है रेहरा माफी. यहां के बुजुर्ग निवासियों के जेहन में छांगुर बाबा के नाम से पहचाने जाने वाले जमालुद्दीन की पुरानी यादें अब भी ताजा हैं.
पंखिया मुस्लिम समुदाय का वह दुबला-पतला और सांवला-सा शख्स गांवों में साइकिल पर लादकर गहने और अंगूठियां वगैरह बेचता था. उसके दाहिने हाथ में छह उंगलियां हैं, जिसकी वजह से उसका नाम छांगुर पड़ा.
प्रधान चुने जाने के बाद उसे यादव-मुस्लिम के बीच की खाई पाटने के लिए याद किया जाता है. मगर जब उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने 5 जुलाई को एक तलाशी अभियान के बाद 70 वर्षीय इस बुजुर्ग को लखनऊ से गिरफ्तार किया तो उसे पूरे राज्य में फैले एक बड़े और संगठित अवैध धर्मांतरण रैकेट का मुखिया बताया गया.
उसके साथ उसकी एक सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को भी पकड़ा गया. दरअसल, छांगुर ने काफी पहले ही अपनी साइकिल की जगह एक टोयोटा फॉर्च्यूनर ले ली थी, वह सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों के साथ घूमता था और कई संपत्तियों का मालिक बन बैठा था. एटीएस के मुताबिक, उसकी गतिविधियों में कथित तौर पर फर्जी पहचानपत्र, विदेशी फंडिंग, दस्तावेजों की जालसाजी और कई फर्जी नाम इस्तेमाल करने सरीखे काम शामिल थे.
छांगुर बाबा और उसके साथियों के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों में राज्य सत्ता के खिलाफ जंग छेड़ने की साजिश, धार्मिक दुश्मनी को बढ़ावा देना, धोखाधड़ी और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धाराओं का उल्लंघन शामिल है. पुलिस ने बताया कि इससे पहले 8 अप्रैल को मुंबई निवासी नवीन रोहरा और छांगुर के बेटे महबूब को गिरफ्तार किया गया था. नवीन रोहरा नीतू का पति है और धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बनने के बाद उसका नाम जमालुद्दीन हो गया है.
रेहला माफी से चंद किलोमीटर दूर स्थित माधपुर गांव में चांद औलिया शाह बाबा की मजार के पास छांगुर बाबा की पांच बीघा (1.65 एकड़) जमीन है. उसकी गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन ने उसकी ऊंची दीवारों वाले परिसर के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं कि छांगुर के उस अड्डे से विदेशी नस्ल के सात कुत्ते और एक घोड़े को बरामद किया गया है.
साधारण शुरुआत
दरअसल, रेहरा माफी गांव में मुसलमान और यादव परिवार आज भी अलग-अलग मोहल्लों में रहते हैं. गांव की संकरी गलियों में छांगुर की गिरफ्तारी के चर्चे गूंज रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब सात-आठ साल पहले छांगुर पास के माधपुर गांव में रहने चला गया था. हिंदू समुदाय के एक बुजुर्ग निवासी बताते हैं, ''हम उसे अंगूठियां और गहने बेचने वाले व्यक्ति के रूप में याद करते हैं. उसी काम के जरिए उसने समर्थन जुटाया और उसकी पत्नी 2005 में प्रधान चुनी गई. 2015 में वह खुद भी उस सीट से जीता. वह एक अच्छा प्रधान था और काम पूरे करता था. मेरे घर के बाहर वाली सड़क उसने ही बनवाई थी.'' वे कहते हैं कि रेहरा माफी में छांगुर जब तक रहा, कोई विवाद नहीं हुआ.
दो बार रेहरा माफी के प्रधान तथा कभी छांगुर के प्रतिद्वंद्वी रहे 73 साल के इजहार हुसैन और जानकारी देते हैं. वे बताते हैं, ''वह पंखिया जाति से है जो गांव-गांव घूमकर भीख और दान लेकर गुजारा करता था. छांगुर कभी फकीर की तरह रहता था; हम दोस्त थे. बाद में उसने यह दावा करते हुए अंगूठियां और ताबीज बेचना शुरू कर दिया कि उनसे लोगों की किस्मत बदल सकती है.''
ग्रामीणों (और पुलिस) के मुताबिक, साल 2010 की शुरुआत में छांगुर मुंबई जाने लगा, जहां उसकी मुलाकात सिंधी दंपत्ती नवीन और नीतू से हुई. अब लखनऊ में रहने वाले हुसैन बताते हैं, ''वे एक बेटा चाहते थे. खुद को एक पीर बाबा बताते हुए छांगुर ने उनकी चाहत पूरी करने का वादा किया. समय के साथ उसने उन दोनों को बहला-फुसला कर गुमराह किया और उनका धर्मांतरण करवाया, उन्हें बलरामपुर जिले में बसने के लिए राजी किया. वे माधपुर में बस गए.''
मगर रेहरा माफी में हर कोई इस बात से राजी नहीं. मोहम्मद रजा बताते हैं कि यह जोड़ा छह-सात साल पहले कारोबार करने बलरामपुर आया था. वे कहते हैं, ''उन्होंने रेडीमेड कपड़ों की दो दुकानें खोलीं. वे शायद मुंबई सरीखे महंगे शहर से निकलना चाहते थे.'' रजा और दूसरे लोगों का मानना है कि यह मामला शायद आर्थिक विवाद से शुरू हुआ. उन लोगों के मुताबिक, माधपुर में छांगुर के नए घर के निर्माण के काम पर लगाए गए स्थानीय बिल्डर बब्बू उर्फ वसीउद्दीन का छांगुर के साथ पैसों को लेकर विवाद हुआ था. उन लोगों का कहना है कि सबसे पहले बब्बू ने ही छांगुर पर आरोप लगाए थे, जिसके बाद व्यापक जांच शुरू हुई.
इस मामले के नाटकीय खुलासे को देख रहे कई लोगों का मानना है कि छांगुर बाबा के मामले को उत्तर प्रदेश के मौजूदा सियासी संदर्भ से अलग नहीं किया जा सकता. यह कोई पहली बार नहीं है कि 'धार्मिक साजिशों' को लेकर जोरदार अभियान चलाए जा रहे हैं. चाहे वह 'लव जिहाद' के खिलाफ अभियान हो, धर्मांतरण विरोधी अभियान हो या फिर हलाल-प्रमाणित उत्पादों या कांवड़ यात्रा मार्गों के पास मुसलमानों के स्वामित्व वाले भोजनालयों से जुड़े विवाद.
इन सभी मामलों में एक ऐसा पैटर्न सामने आया है जिसमें हिंदुओं को पीड़ित दिखाते हुए भयावह 'इस्लामिक खतरे' का ढिंढोरा पीटा जाता है. विभिन्न अधिकार समूहों ने उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानूनी की आलोचना की है और दावा किया है कि इसका इस्तेमाल केवल मुसलमानों के खिलाफ किया जा रहा है, यहां तक कि तब भी जब धर्मांतरण स्वैच्छिक होते हैं. सरकार ने ऐसे अभियानों का बचाव करते हुए इन्हें कमजोर नागरिकों, खासकर महिलाओं को जबरदस्ती या धोखे से बचाने के लिए जरूरी बताया है.
पैसे का लेनदेन
असल में छांगुर लंबे वक्त से पुलिस की नजर में था. सामूहिक धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और यहां तक कि एक बड़ी इमारत को 'आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर' के रूप में इस्तेमाल करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने के साथ-साथ पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आइएसआइ) से संदिग्ध संबंधों के आरोपों की प्रारंभिक जांच के बाद नवंबर 2024 में यूपी एटीएस ने उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज की. एफआइआर में स्थानीय पुलिस और खुफिया इकाइयों के साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया.
पुलिस और एटीएस का आरोप है कि छांगुर और उसका गिरोह पैसे के प्रलोभन, जबरदस्ती, भावनात्मक दबाव और कुछ मामलों में शादी के झूठे वादों के जरिए गैर-मुस्लिम गरीब और कमजोर लोगों को इस्लाम में धर्मांतरण कराने के लिए निशाना बनाता था. उनका कहना है कि गिरोह ने करोड़ों रुपए का धन शोधन किया, बेनामी संपत्तियां खरीदीं, महाराष्ट्र और नेपाल में ऐसी गतिविधियों को फैलाया, अक्सर खाड़ी देशों की यात्रा की और 40 से ज्यादा भारतीय बैंक खाते खोले.
पश्चिम एशिया से विदेशी पैसे का प्रवाह अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में है. उसका इस्तेमाल धर्मांतरण, धन शोधन और संपत्ति खरीदने के लिए होता है. उसमें लगभग 100 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन का अनुमान है. यूएई से जुड़े बैंकों और सह-आरोपी नवीन रोहरा से जुड़े कई वोस्ट्रो खाते—विदेशी बैंक के साथ लेनदेन के लिए खुला बैंक खाता—भी ईडी की जांच के दायरे में हैं. जांचकर्ताओं ने नवीन के खातों में एनईएफटी के जरिए 16.22 करोड़ रुपए और 18.66 करोड़ रुपए की डाली गईं दो बड़ी रकमों के साथ-साथ यूएई आधारित विनिमय सेवाओं के अलावा विदेशी धन प्रेषण का भी पता लगाया है.
जांचकर्ताओं का दावा है कि छांगुर के गिरोह ने सफल धर्मांतरण कराने पर जाति-आधारित नकद इनाम तय कर रखा था. कथित रूप से किसी सवर्ण महिला के धर्मांतरण पर 15-16 लाख रुपए, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए 10-12 लाख रुपए तथा अनुसूचित जाति और अन्य समुदायों के लोगों के धर्मांतरण पर 8-10 लाख रुपए तय किए गए थे. एटीएस सूत्रों का दावा है कि उनका आखिरी मकसद खासकर कमजोर और गरीब हिंदू महिलाओं को निशाना बनाकर हिंदू समाज के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना था; ऊंची जाति की महिलाओं के धर्मांतरण को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाता था.
लखनऊ में गुंजा गुप्ता को कथित तौर पर मुसलमान अबू अंसारी ने 'अमित' बनकर फुसलाया, और उसे छांगुर बाबा की 'दरगाह' पर ले जाया गया, उसका धर्मांतरण किया गया और अलीना अंसारी के नए नाम से उसकी शादी कर दी गई. इसी तरह औरैया की मानवी शर्मा ने मेराज उर्फ रुद्र नाम के शख्स पर भावनात्मक रूप से गुमराह और यौन शोषण तथा जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया. एफआइआर में ऐसे पांच धर्मांतरणों में छांगुर को शामिल बताया गया है. कुछ अनुमानों के मुताबिक, शक है कि बाबा के गिरोह ने कुल मिलाकर 1,000 से ज्यादा लोगों का धर्मांतरण किया.
इन आरोपों को दक्षिणपंथी संगठन विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अध्यक्ष गोपाल राय ने हवा दी है और इससे पहले उन्होंने लखनऊ में तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ कथित पीड़ितों को मीडिया के सामने पेश किया और दावा किया कि वे उन्हें हिंदू धर्म में वापस ला चुके हैं.
एफआइआर में कहा गया है कि नवीन, उसकी पत्नी नीतू और बेटी समाले ने नवंबर 2015 में दुबई के अल फारूक उमर बिन खत्ताब सेंटर में इस्लाम धर्म अपना लिया था. यह जोड़ा इस रैकेट का कथित मुख्य सरगना था. उनका तरीका यह था कि वे गरीब हिंदुओं को बड़ी रकम उधार देते थे और जब वे कर्ज नहीं चुका पाते तो उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाता. एफआइआर में दावा किया गया है कि इस गिरोह ने धर्मांतरण के लिए गरीब महिलाओं, दलितों और दिहाड़ी मजदूरों को निशाना बनाया. आरोपी झूठे मुकदमे दर्ज कराने की भी धमकी देते थे.
एफआइआर में आरोप है कि इस गिरोह ने कुछ वर्षों में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति अर्जित कर ली. माधपुर में कुछ जमीन नीतू और महबूब के नाम पर खरीदी गई और बिना भूमि-उपयोग की मंजूरी लिए उस पर निर्माण कराए गए. नवीन और नीतू, अक्सर अलग-अलग यूएई जाते रहते थे. छांगुर ने भी 2018 में सऊदी अरब का दौरा किया. अधिकारियों को उनके पास कई पासपोर्ट होने का संदेह है, मगर उनका कहना है कि उसकी जांच जारी है.
एफआइआर के अंत में बड़े आरोप लगाए गए हैं. उसके मुताबिक, इस गिरोह का मकसद हिंदू धर्म के प्रति नफरत फैलाकर ''देश के सद्भाव को बिगाड़ना'' था. उसमें आरोप है कि ऐसे धर्मांतरण के जरिए भारत की जनसांख्यिकी प्रभावित हो रही है और इसका लक्ष्य ''लोकतांत्रिक व्यवस्था को हटाना और शरिया कानून स्थापित करना'' है.
वैसे, जांचकर्ताओं की तरफ से इस कथित बड़ी साजिश की फंडिंग करने वाले किसी विदेशी संगठन या घरेलू समूह का निश्चित रूप से कोई नाम नहीं बताया गया है. ईडी ने धन के लेनदेन की जानकारी दी है मगर यह अब भी साफ नहीं है कि आरोपी किसी वैचारिक एजेंडे के तहत जुड़े हैं या महज वित्तीय लाभ के लिए.
इस बीच, यूपी पुलिस ने नए 'धर्मांतरण रैकेट' का 'भंडाफोड़' करने का दावा किया है. 19 जुलाई को पुलिस ने ऐलान किया कि उन्होंने आगरा में दो बहनों की गुमशुदगी की शिकायत की जांच के बाद छह राज्यों से 10 लोगों को गिरफ्तार किया. उन्होंने दावा किया कि कनाडा और अमेरिका से धन प्राप्त करके धर्मांतरण और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले एक विशाल नेटवर्क का पता चला है. यह कार्रवाई ऐसे नेटवर्क की पहचान करने और उन्हें ध्वस्त करने के लिए यूपी पुलिस की ओर से शुरू किए गए 'ऑपरेशन अस्मिता' का हिस्सा है.
इस मामले के राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आने के साथ सियासी दल एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं. समाजवादी पार्टी इशारा करती है कि भाजपा सरकार में छांगुर के रैकेट का विस्तार हुआ, जबकि भाजपा छांगुर के पुराने संबंधों को उजागर कर रही है. अगर भारतीय लोकतंत्र को कुचलने के अभियान के आरोप वाकई सही हैं, तो फिर इस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए कि आखिर छांगुर इतने लंबे वक्त तक इतने खुले तौर पर कैसे काम करता रहा.
छांगुर बाबा और उसके गुर्गो के 40 बैंक खातों में कथित तौर पर खाड़ी देशों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन की कुल रकम 100 करोड़ रुपए है. 15-16 लाख रुपए नकद इनाम कथित तौर पर किसी सवर्ण हिंदू महिला का धर्म परिवर्तन कराने पर तय था. ओबीसी स्त्रियों के लिए 10-12 लाख रुपए और अन्य सभी के लिए 8-10 लाख रुपए का जाति-आधारित इनाम था
एटीएस सूत्रों का दावा है कि इन आरोपियों का मकसद खासकर कमजोर और गरीब हिंदू महिलाओं को निशाना बनाकर हिंदू समाज के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना था.
छांगुर बाबा का बदनाम किस्सा
> अब तक छांगुर बाबा समेत सात लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार होने वाले लोगों में छांगुर का बेटा महबूब और उसके करीबी सहयोगी नवीन और नीतू रोहरा शामिल हैं
> पुलिस का दावा है कि इस गिरोह के सदस्यों ने कथित रूप से खाड़ी देशों की करीब 40 यात्राएं कीं
> इस गिरोह ने कुछ वर्षों में कथित रूप से 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति अर्जित कर ली थी. उनकी जमीन पर अक्सर आवश्यक भू-उपयोग की मंजूरी लिए बगैर निर्माण कार्य कर लिए गए थे
> यूएई से जुड़े बैंकों में सह-आरोपी नवीन की ओर से संचालित वोस्ट्रो खातों की भी ईडी जांच कर रही है. उन खातों में बड़ी रकम डाली गई थी
> आरोपी नीतू के नाम से संचालित दो खातों में भी कथित तौर पर विदेशी धन हासिल किया गया
क्या हैं बड़े आरोप
उत्तर प्रदेश एटीएस की प्राथमिकी में छांगुर बाबा के खिलाफ कई संगीन आरोप लगाए गए हैं-
> छल, बल और डरा-धमका कर लोगों का अवैध धर्मांतरण कराने का आरोप
> विदेशी फंडिंग के माध्यम से करोड़ों रुपए हासिल करने का आरोप
> हिंदू धर्म के खिलाफ द्वेष फैलाने का आरोप
> भारत की जनसांख्यिकी को बदलने की कोशिश करने और मुसलमान आबादी को बढ़ाने के लिए काम करने का आरोप
> भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने और उसकी जगह शरिया कानून स्थापित करने की कोशिश करने तथा सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का आरोप