राजस्थान: बंजर रेगिस्तान में बाढ़ के हालात; क्या बदल गया देश के क्लाइमेट?
क्लाइमेट चेंज के चलते राजस्थान में मॉनसून का पैटर्न बदल गया है. सूखे की मार झेलने वाले प्रदेश में पिछले एक दशक में 80 फीसद तक ज्यादा बरसात हुई.

राजस्थान को कभी सूखे और अकाल का पर्याय माना जाता था. अब वह बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़ और अतिवृष्टि की मार झेल रहा है.
हाल ही भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) और एक थिंक टैंक मानी जाने वाली काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट ऐंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की रिपोर्टों से यह स्पष्ट हुआ है कि पिछले कुछ साल में राज्य में मॉनसून का पैटर्न पूरी तरह से बदल गया है.
राज्य के कई हिस्सों में पिछले एक दशक में सामान्य से 80 फीसद तक ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. 2025 में राजस्थान में अब तक सामान्य से 113 फीसद ज्यादा बारिश हो चुकी है, जो पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है. जोधपुर और बीकानेर जैसे परंपरागत रूप से शुष्क संभागों में भी 90 फीसद तक ज्यादा बारिश दर्ज की गई है. जोधपुर संभाग में 75.69 मिमी के औसत के मुकाबले इस साल जुलाई के अंत तक 97 फीसद ज्यादा बरसात हुई, जबकि बीकानेर संभाग में 81.86 मिमी के औसत के मुकाबले 147.81 मिमी यानी 81.1 फीसद ज्यादा बारिश हुई.
वैसे, राज्य में ज्यादा बारिश का यह रुझान 2015 से ही शुरू हो गया था. 2015 से 2025 के बीच 2018 अकेला ऐसा साल रहा जब बारिश औसत से छह फीसद कम रही. बाकी सभी वर्षों में सामान्य से 10 से लेकर 100 फीसद ज्यादा बारिश हुई है. पिछले साल भी जोधपुर संभाग में 47 फीसद और बीकानेर संभाग में 53 फीसद ज्यादा बारिश हुई थी.
बाढ़ की मार झेलते जिले
बढ़ती बारिश की वजह से राजस्थान में अब सूखे की जगह बाढ़ की चिंता बढ़ रही है. पिछले दशक में बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, जालोर, सिरोही, नागौर, कोटा, बारां, झालावाड़, सवाई माधोपुर, अलवर, दौसा, करौली, अजमेर और धौलपुर जैसे जिलों में बाढ़ के हालात बने हैं.
सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट 'डिकोडिंग इंडियाज चेंजिंग मॉनसून पैटर्क्स’ के मुताबिक, राजस्थान की 313 तहसीलों में 1 से 79 फीसद तक बारिश में बढ़ोतरी हुई है. 1982 से 2001 और 2012 से 2022 के बीच की तुलना में, जैसलमेर जैसे सूखा प्रभावित जिले में भी वर्षा में 79 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. इस अध्ययन में पाया गया कि भारत की 4,419 तहसीलों में से जिन 64 फीसद क्षेत्रों में भारी बारिश के दिनों की संख्या 15 दिन तक बढ़ी है, उनमें से अधिकांश राजस्थान में हैं. अब एक दिन में होने वाली बारिश की तीव्रता भी बढ़ गई है.
जलवायु परिवर्तन असली वजह
आइएमडी जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा कहते हैं, ''राजस्थान में पिछले दो दशक में मॉनसून के स्वरूप, दशकीय परिवर्तनशीलता और जलवायु में व्यापक बदलाव हुआ है. पूर्वोत्तर भारत में वर्षा घट रही है जबकि राजस्थान जैसे क्षेत्रों में बरसात बढ़ रही है. अब मॉनसून के दिन भी करीब एक सप्ताह तक बढ़ गए हैं.’’
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की एक झलक 2006 में बाड़मेर के कवास में दिखी थी, जब एक सप्ताह में 750 मिमी बारिश हुई, जो वहां की सालाना औसत वर्षा से पांच गुना ज्यादा थी. 2016 में भी जैसलमेर और बाड़मेर में 120 मिमी ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी.
और दो दशक पहले क्या हाल था? 2002-03 में यही राजस्थान सदी के सबसे भीषण सूखे की चपेट में था. उस समय राज्य में औसत से 57.5 फीसद कम बारिश हुई थी. सरहदी जिले बीकानेर में तो 90 फीसद कम बारिश दर्ज की गई थी. तब भयंकर सूखे की वजह से 'अकाल राहत कार्यक्रम’ और 'मरुस्थल विकास योजना’ जैसी योजनाएं लागू करनी पड़ी थीं.
जलवायु में बदलाव के साथ पर्यावरणविदों का मानना है कि अब सरकार को सूखे के साथ-साथ बाढ़ और अतिवृष्टि प्रबंधन की भी रणनीति बनानी चाहिए. राजस्थान विश्वविद्यालय में इंदिरा गांधी सेंटर फॉर ह्यूमन इकोलॉजी के पूर्व निदेशक प्रो. टी.आइ. खान के मुताबिक, ''इंदिरा गांधी नहर और अन्य परियोजनाओं की वजह से पिछले 50 साल में राजस्थान में हरित क्षेत्र में वृद्धि हुई है.
इससे वर्षा को समर्थन मिला है और मिट्टी की नमी भी बढ़ी है.’’ 649 किलोमीटर लंबी इंदिरा गांधी नहर के दोनों ओर 50 से 150 किलोमीटर के क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विकास हुआ है. इसका असर यह हुआ कि एक समय में शुष्क माने जाने वाले इलाकों में अब हरियाली फैल गई है, जिससे मॉनसून को भी मजबूती मिली है.
भूजल स्तर में सुधार
राजस्थान में औसत बरसात और बारिश के दिनों में बढ़ोतरी के कारण जल स्तर में भी व्यापक बदलाव नजर आए हैं. राजस्थान के भूजल विभाग की पिछले साल 'पोस्ट मॉनसून असेसमेंट रिपोर्ट 2024’ के मुताबिक, राजस्थान में भूजल का स्तर 5.82 मीटर तक ऊपर आया है.
कुछ साल पहले तक राजस्थान में जमीन के नीचे 28.83 मीटर की गहराई में पानी उपलब्ध था जो अब 23 मीटर पर पहुंच गया है. चित्तौड़गढ़ जिले में सबसे ज्यादा 14 मीटर जल स्तर बढ़ा है. जयपुर के भूजल स्तर में भी 4.70 मीटर का सुधार हुआ है. राज्य में चूरू अकेला ऐसा जिला है जहां भूजल स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ बल्कि 0.19 मीटर की गिरावट दर्ज हुई.
पानी टिका तो चुनौती बढ़ी
राजस्थान के बदलते मॉनसून ने जहां राहत दी है, वहीं नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं. अब सवाल सिर्फ बारिश की कमी का नहीं, बल्कि जल संधारण, बाढ़ नियंत्रण और शहरी जल प्रबंधन का भी है. जिस तरह बारिश की तीव्रता और अनियमितता बढ़ी है, उससे निचले इलाकों में जलभराव और फसल को नुक्सान जैसे खतरे भी बढ़े हैं.
जलवायु परिवर्तन की बदौलत राजस्थान अब सिर्फ रेगिस्तान और सूखा प्रदेश नहीं रहा. यह तेजी से पानी के मामले में समृद्ध राज्य में बदल रहा है. बरसात की बढ़ती मात्रा और उसके साथ आई नई चुनौतियां इस बात का संकेत हैं कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और नागरिक समाज सभी को मिलकर एक नई रणनीति बनानी होगी, जिसमें सूखे से राहत के साथ-साथ बाढ़ और जल प्रबंधन की भी ठोस योजना हो.