बिहार: कौन हैं बौद्ध भिक्षु 'मिन्ह तोए', जिनके लिए आपस में लड़ रहे वियतनामी यूट्यूबर?
वियतनामी लोग बोधगया में तीन महीने से ज्यादा समय से क्यों डटे हुए हैं और वे आपस में क्यों मारपीट कर रहे हैं.

वक्त सुबह के 4.20 बजे. बोधगया के एक स्वयंसेवी संगठन भंसाली ट्रस्ट के बाहर दोनों तरफ के चबूतरों पर वियतनाम के यूट्यूबर और कुछ श्रद्धालु जुटने लगे हैं. वहां कुछ स्थानीय मनी एक्सचेंजर भी घूम रहे हैं.
कुछ वियतनामी श्रद्धालु बैटरी रिक्शा पर भरकर खाने का सामान लेकर परिसर में जा रहे हैं, जहां बौद्ध धर्म की '13 दुतांग' परंपरा का पालन करने की वजह से चर्चित हुए बौद्ध भिक्खु मिन्ह तोए 25 अप्रैल, 2025 से ही 30 से ज्यादा अनुयाइयों के साथ रह रहे हैं.
श्रद्धालु इन्हीं भिक्खुओं के लिए खाने का सामान लेकर अंदर जा रहे हैं क्योंकि ये भिक्खु सिर्फ एक वक्त और वह भी सुबह में भोजन करते हैं. उन्हें यहां भिक्षा और भोजन की दिक्कत न हो, इसलिए वियतनाम से बड़ी संख्या में उनके श्रद्धालु भी यहां आए हैं और वे रेस्ट हाउसों में रह रहे हैं.
इन श्रद्धालुओं को भंसाली ट्रस्ट के अंदर जाने की इजाजत है, मगर उन डेढ़ दर्जन से ज्यादा वियतनामी यूट्यूबरों को घुसने की इजाजत नहीं है, जो सुबह से परिसर के बाहर स्टैंड पर मोबाइल लगाकर डटे रहते हैं और स्ट्रीमिंग करते रहते हैं. यूट्यूबरों में मिन्ह तोए के समर्थकों और श्रद्धालुओं के साथ उनके विरोधी भी शामिल हैं. स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि अभी इन यूट्यूबरों की संख्या थोड़ी कम हो गई है. गया के एसएसपी आनंद कुमार भी कहते हैं, ''पहले इनकी संख्या 30 के करीब थी.'' पिछले दिनों इनके बीच हुए आपसी झगड़े के बाद संख्या घट गई है.
कुमार बताते हैं, ''अप्रैल से लेकर अब तक इन यूट्यूबरों के बीच तीन बार हिंसक झड़प हो चुकी है. पहली बार 16 मई को दो वियतनामी महिला यूट्यूबरों के बीच हिंसक झड़प होने की पुलिस रपट लिखवाई गई मगर जब तक पुलिस उन्हें तलाशती, आरोपी महिला अपने देश लौट गई. शिकायतकर्ता महिला मिन्ह तोए की समर्थक थी. दूसरी वारदात 11 जून, 2025 को हुई. इस बार विरोधी गुट के एक यूट्यूबर ने मिन्ह तोए के समर्थकों पर स्टिक और दूसरे हथियारों से हमले का आरोप लगाया. तब भी पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई.''
पंद्रह जुलाई की वारदात में ले अन्ह तुआन नाम के वियतनामी यूट्यूबर ने आरोप लगाया कि सुबह के वक्त उस पर चार लोगों ने चेन से हमला किया, जिसमें उसका सिर फट गया और उसके साथी की नाक टूट गई. इस मामले में स्थानीय अनुवादक की मदद से पुलिस ने चार वियतनामी वी व्हेन सांग, वेन कोन सेन्ह, त्रान थन हे और व्हेन थ्वान हुएन को गिरफ्तार किया. चारों मिन्ह तोए समर्थक हैं.
इस मामले की जांच कर रहीं बोधगया पर्यटन थाने की रिंकू कहती हैं, ''यह काम बहुत मुश्किल भरा रहा क्योंकि ये सभी वियतनामी न हिंदी जानते हैं, न अंग्रेजी. हमने पूरे मामले को समझने के लिए स्थानीय अनुवादक की मदद ली जो वियतनामी जानता है. साथ ही गूगल ट्रांसलेशन और दूसरे एआइ टूल की मदद से हम उनसे बातचीत कर सके. पिछले तीन महीने से ये यूट्यूबर यहां जमा हैं और अक्सर झगड़ते रहते हैं.''
गिरफ्तारी के बाद यूट्यूबरों की संख्या भी कम हुई है और हिंसक घटनाएं भी. 23 जुलाई की सुबह मौके पर इंडिया टुडे को वहां दोनों पक्ष के यूट्यूबर दिखे. मगर उनसे बातचीत करते हुए भी बार-बार ट्रांसलेटर टूल की जरूरत पड़ी.
मिन्ह तोए के समर्थक यूट्यूबर चांप तिवई 7 जुलाई को बोधगया आए हैं. तोए को वे भविष्य का अगला बुद्ध बताते हैं. वे कहते हैं, ''विरोधी यूट्यूबर यहां आकर मिन्ह तोए के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं, इसलिए झगड़े हो रहे हैं.''
उनके अनुयाई चाऊ ना चा मिन्ह तोए के साथ वियतनाम से ही भारत आए हैं. अपने आदरणीय का चीवर भी उन्हें उपहार में प्राप्त हुआ है. उनके शब्दों में, ''वे मेरे मास्टर हैं. वे दिन में एक बार सुबह में खाते हैं, दान में न पैसे लेते हैं, न कोई और सामान, सिर्फ भिक्षा में भोजन का सामान लेते हैं. वे कभी लेटते नहीं. या तो खड़े रहते हैं या बैठते हैं. सोते भी खड़े-खड़े हैं. अभी वे वर्षावास की वजह से इस जगह रुके हैं, नहीं तो वे जंगल में पेड़ों के नीचे रहते हैं. वे 6,000 किमी की पैदल यात्रा करके यहां आए हैं. वे बुद्ध के असली उपासक हैं.'' वे और उनके अनुयाई पुराने और फेंके हुए कपड़ों को सिलकर पहनते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि वे श्मशान से मुर्दों के कपड़े बटोरकर लाते हैं. खास पहनावे की वजह से स्थानीय लोगों ने उनका नाम गुदड़िया बाबा रख दिया है.
हालांकि वियतनामी यूट्यूबर वाइ थुंग मिन्ह तोए से बहुत प्रभावित नहीं हैं. वे विरोधी गुट की हैं और कहती हैं, ''मैंने इनकी जर्नी लंबे समय से फॉलो की है, ये बुद्ध की शिक्षा के खिलाफ काम कर रहे हैं और उनकी छवि बनाने में जुटे स्वयंसेवक काफी हिंसक हैं. इस भिक्खु की शिक्षा समाज के लिए खतरा है.''
कौन हैं मिन्ह तोए
इनकी आधिकारिक वेबसाइट 'मिन्ह तोए पाथ' के मुताबिक, 45 साल के वियतनामी नागरिक मिन्ह तोए का असली नाम ली आन्ह तु है. वियतनाम के के-आन्ह जिले में जन्मे मिन्ह तोए पहले सैन्य सेवा में थे, इसके बाद वे लैंड सर्वे का काम करने लगे. 2015 में वे भिक्खु बने और अपना नाम मिन्ह तोए रख लिया. उनके अनुयाई बताते हैं कि मिन्ह तोए का मतलब 'बुद्धि का प्रकाश' होता है.
उन्होंने '13 दुतांग' नाम की थेरवादी पारंपरिक बौद्ध परंपरा अपना ली, जिसके तेरह कठोर नियम होते हैं. वेबसाइट के मुताबिक, वे अपने साथियों के साथ दिसंबर, 2024 में पैदल वियतनाम से निकल गए. फिर अगले चार महीनों में उन्होंने थाइलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया की पैदल यात्रा की. मगर जब इंडोनेशिया में उन्हें पैदल चलने की इजाजत नहीं मिली तो 9 अप्रैल, 2025 को वे हवाई मार्ग से सिंगापुर होते हुए 10 अप्रैल को श्रीलंका पहुंचे. इनकी परंपरा के खिलाफ रहे वियतनामी बौद्ध संघ ने फिर श्रीलंकाई अधिकारियों को चिट्ठी लिखी, जिससे उनकी यात्रा वहां स्थगित हो गई. 25 अप्रैल को वे भारत आए और तब से बोधगया में रह रहे हैं.
भले कई यूट्यूबर वियतनाम से आकर उनके पक्ष में वीडियो बना रहे हैं, मगर मिन्ह तोए और उनके स्वयंसेवक इन यूट्यूबरों में से किसी को मान्यता नहीं देते. इसके बावजूद यूट्यूबर महीनों से बोधगया में डटे हैं और लड़ भी रहे हैं. आरोप है कि ये यूट्यूबर उनके नाम पर फंड जमा कर रहे हैं. मिन्ह तोए की टीम ने इससे भी अस्वीकृति जताई है और कहा है कि उन्हें किसी फंडिंग की जरूरत नहीं है. उन्होंने यूट्यूबरों से शांति कायम रखने की अपील की है. उन्होंने यह भी कहा है कि मिन्ह तोए का कोई आधिकारिक संघ या समूह नहीं है. यह स्वतंत्र पदयात्री भिक्खुओं का संघ है, जो 13-दुतांग परंपरा का पालन करते हैं.
इंडिया टुडे ने कई बार उनसे बातचीत करने की कोशिश की पर संभव न हो सकी. बोधगया में दुनिया भर के बौद्ध आते हैं. मगर उनके बीच इस तरह के हिंसक विवाद की यह पहली घटना है. इससे स्थानीय लोग भी हैरान हैं. भंसाली ट्रस्ट के पास चाय की दुकान चलाने वाले प्रमोद सिंह कहते हैं, ''ये लोग सुबह-शाम आकर यहां वीडियो बनाते हैं. पूजा-पाठ करते हैं, कई बार झगड़ते भी हैं. इनके होने से हमारी दुकानदारी बढ़ती है.''
एसएसपी आनंद कहते हैं, ''बोधगया में बौद्ध श्रद्धालु टूरिस्ट वीजा पर आते हैं और जहां ठहरते हैं, वहां उनसे सी-फॉर्म भरवाया जाता है. विदेशी नागरिकों के बीच हिंसक घटना की जांच की एक औपचारिक प्रक्रिया होती है, उसे हम पूरा करते हैं. बिहार पुलिस की सोशल मीडिया टीम विद्वेष फैलाने वाले सोशल मीडिया कंटेट पर नजर रखती है.'' पुलिस ने फिलहाल भारतीय खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो और वियतनाम के दूतावास को इस मामले की सूचना दे दी है.
खास बातें
> 13 दुतांग परंपरा का पालन करने वाले बौद्ध भिक्खु मिन्ह तोए अप्रैल से बोधगया में रह रहे हैं.
> मिन्ह तोए के समर्थक और विरोधी यूट्यूबरों के बीच लाइव स्ट्रीमिंग के साथ ही जूतमपैजार भी होती है.