जम्मू-कश्मीर की सत्ता पर दबदबे के लिए यह कैसी होड़?

चुनी हुई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से एलजी सिन्हा और सीएम उमर अब्दुल्ला ने अब तक कोई मंच साझा नहीं किया है

श्रीनगर में 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के शपथग्रहण समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
श्रीनगर में 16 अक्टूबर को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के शपथग्रहण समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा

इन दिनों धुंध की मोटी चादर में लिपटी कश्मीर घाटी में छह साल के इंतजार के बाद नई उम्मीद जगी है. केंद्र शासित प्रदेश की नवनिर्वाचित नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) की सरकार ने आते ही अपने इरादे साफ कर दिए—जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा दिलाना उनका पहला संकल्प है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 17 अक्टूबर को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस संकल्प को पारित कराया. वे 24 अक्टूबर को दिल्ली आए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह को वह प्रस्ताव सौंपा.

4 नवंबर को छह साल बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा का पहला सत्र हुआ जिसमें पुलवामा से पीडीपी विधायक वहीद-उर-रहमान पारा 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश करके छा गए. इस सत्र ने घाटी के पुराने जख्म उभारे तो लोगों के दिलों में एक नया जोश भी भरा. वैसे उमर सरकार भलीभांति यह समझती है कि केंद्र शासित प्रदेश की असल शक्ति उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के हाथ में है.

जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की कसक कश्मीरी दलों में कितनी गहरी है, इसका साफ संकेत 31 अक्टूबर को श्रीनगर के डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में आयोजित केंद्र शासित प्रदेश स्थापना दिवस के बहिष्कार में दिखाई दिया. सत्ताधारी एनसी, पीडीपी और कांग्रेस नेताओं को तो इसमें शामिल नहीं ही होना था, मगर भाजपा के सभी 29 विधायकों की इसमें अनुपस्थिति हैरान करने वाली थी. इसके बाद दिल्ली में पार्टी हाइकमान से मंजूरी न मिलने जैसी बातें शुरू हो गईं.

नेताओं की गैरमौजूदगी ने सिन्हा के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर दी. सरकारी अधिकारियों से भरी सभा में सिन्हा ने निराशा जाहिर की, "इस दोहरे मापदंड से जम्मू-कश्मीर को कोई लाभ नहीं होगा. यह सचाई है कि आज जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है और सदस्यों ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ ली है. जब यह राज्य बनेगा, तो हम राज्य स्थापना दिवस मनाएंगे."

एनसी ने घाटी में अपनी 42 में से 37 सीटें जीतीं और भाजपा ने जम्मू में लड़ी अपनी सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की, जो केंद्र शासित प्रदेश की राजनैतिक विविधता को दर्शाता है, पर दोनों ही क्षेत्र राज्य का दर्जा फिर से हासिल करने की एक-सी आकांक्षा रखते हैं.

अपनी दूसरी कैबिनेट बैठक में उमर सरकार ने घाटी में अक्टूबर-नवंबर के पारंपरिक शैक्षणिक सत्र को फिर से बहाल कर दिया. केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 2022 में जम्मू-कश्मीर के शैक्षणिक कैलेंडर को 'देश के बाकी हिस्सों' के अनुरूप बनाते हुए बदलकर मार्च-अप्रैल में कर दिया था. साथ ही, उमर ने प्रशासन को चेताया कि वे केंद्र शासित प्रदेश की शासन व्यवस्था की खामियों का 'बेजा फायदा' न उठाएं.

एनसी के एक वरिष्ठ नेता और विधायक ने इन साहसी कदमों का श्रेय उस 'भरोसे' को दिया जो उमर को नई दिल्ली में मिला. उन्होंने कहा, "बैठक काफी सौहार्दपूर्ण रही और प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री ने उमर को राज्य का दर्जा बहाल करने और विकास के लिए 'पूर्ण समर्थन' का भरोसा दिया."

पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलने पर जम्मू-कश्मीर पुलिस और कुछ सुरक्षा मामलों का नियंत्रण राज्य सरकार के पास वापस आ जाएगा. फिलहाल, सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, जहां एकीकृत कमान बैठकों में मुख्यमंत्री की जगह उपराज्यपाल शामिल होते हैं. इस कमान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, अर्धसैनिक बल, सेना और खुफिया एजेंसियां शामिल होती हैं. हाल के हफ्तों में जम्मू-कश्मीर में बढ़ते आतंकवादी हमलों को कई लोग इस दोहरे शक्ति केंद्र के साथ जोड़कर देख रहे हैं. अक्टूबर से शुरू हुई घटनाओं में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है.

16 अक्टूबर को चुनी हुई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से सिन्हा और उमर ने अब तक कोई मंच साझा नहीं किया है. 20 अक्टूबर को कश्मीर मैराथन का आयोजन हुआ. इसमें लगभग 2,000 लोगों ने श्रीनगर की सड़कों पर दौड़ लगाई. मुख्यमंत्री ने सुबह हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत की तो सिन्हा ने सम्मान समारोह की अध्यक्षता की. इससे एक नया चलन दिख रहा है.

अवंतीपुरा स्थित इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी के स्थापना दिवस का आयोजन, जो पहले एक दिन का होता था, इस साल इसे पूरे सप्ताह का किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सकीना मसूद इत्तू 11 या 12 नवंबर को विश्वविद्यालय आ सकते हैं, जबकि कुलपति के रूप में उपराज्यपाल 13 नवंबर को एक समारोह की अध्यक्षता करेंगे, जो एक तरह से 'स्थापना सप्ताह' के समापन का प्रतीक होगा.

कलीम गीलानी

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