चुनाव 2024 में शिवराज, गडकरी और सिंधिया जैसे दिग्गजों के लिए भी कम नहीं हैं चुनौतियां

गुना में घिर आए कुछ दोषों को दूर करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजसी पालकी निकल पड़ी है, जानिए बाकियों के लिए कैसी है राह

महारथियों का मंथन/इलस्ट्रेशन - सिद्धांत जुमडे
महारथियों का मंथन/इलस्ट्रेशन - सिद्धांत जुमडे

दरअसल, विपक्ष मंच से नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए कहीं ज्यादा शक्तिशाली सत्ता पक्ष को धूल चटाने की महत्वाकांक्षा जता रहा है, मगर उसके कदम उसके इरादों से मेल नहीं खाते. बड़े खिलाड़ी मैदान में उतरने से घबरा रहे हैं! इसके विपरीत, मोदी की सेना ने तरकश से सारे तीर निकाल लिए हैं. सभी हथियारों से लैस उसे उम्मीदवार जंग के मैदान में तपिश बढ़ाने और धूल उड़ाने उतर चुके हैं. राज्यसभा सांसदों को भी मोर्चे पर भेज दिया गया है और इस फौज में केंद्रीय मंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों की भरमार है.

थोड़ी नाराजगी के बाद, शिवराज सिंह चौहान फिर से अपने पुराने गढ़ विदिशा में लोगों के बीच काम करने जुट गए हैं, जिसमें उन्हें महारत हासिल है. मनोहर लाल खट्टर ग्रैंड ट्रंक रोड से करनाल की राह पकड़ चुके हैं. बसवराज बोम्मई हावेरी की सबसे बेहतरीन इलायची की माला से खुद को राहत दिलाने के लिए निकले हैं. नितिन गडकरी सियासत के कुछ पेचीदा फ्लाइओवरों से गुजरते हुए भी अपने घर का रास्ता नहीं भटके हैं और नागपुर अपने पसंदीदा बेटे की मेजबानी करने को तैयार है. गुना में घिर आए कुछ दोषों को दूर करने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजसी पालकी निकल पड़ी है.

अनुराग ठाकुर हमीरपुर की हिफाजत कर रहे हैं, तो त्रिवेंद्र सिंह रावत पवित्र हरिद्वार के मोर्चे पर हैं. पीयूष गोयल, जिनका करियर बोर्डरूम से लेकर उच्च सदन तक निर्बाध रूप से बढ़ा, को मुंबई नॉर्थ स्टेशन का प्लेटफॉर्म टिकट थमा दिया गया है. यकीनन, जरूरी नहीं कि हर कोई चुनावी समर को लेकर तत्पर हो. निर्मला सीतारमण ने चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, क्योंकि "उनके पास उतने पैसे नहीं थे." एस. जयशंकर, जिन्हें इस बार राज्यसभा में एक साल भी नहीं हुआ है, उस वक्त आहत नजर आए जब एक विदेशी संवाददाता ने उनसे जानना चाहा कि क्या लोकतंत्र के इस दलदल में वे भी उतरने वाले हैं.

उत्तर प्रदेश/ क्या फिर भाग्यशाली साबित होगा मेरठ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश (यूपी) में अपने लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत 31 मार्च को मेरठ के मोदीपुरम में रैली करके की. इस मौके पर यूपी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सभी सहयोगी दलों के नेताओं को मोदी ने अपने मंच पर जगह दी. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यूपी में केंद्र सरकार की योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया. दरअसल, यह तीसरा मौका था जब मोदी ने यूपी में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत मेरठ से की है.

मेरठ के चुनावी रैली में मोदी

सबसे पहले नरेंद्र मोदी ने 2 फरवरी, 2014 को मेरठ के शताब्दीनगर माधवकुंज इलाके में रैली की थी. उस वक्त वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उसके बाद मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान 28 मार्च, 2019 को मेरठ में एनएच-58 स्थित वेदांत कुंज के मैदान में रैली कर चुनाव अभियान का बिगुल फूंका था. साल 2014 और 2019 के आम चुनावों में भाजपा ने यूपी की अधिकतर लोकसभा सीटों पर कब्जा जमा लिया था. अब देखना यह है कि तीसरी बार भी मेरठ की धरती प्रधानमंत्री मोदी के लिए भाग्यशाली साबित हो पाती है या नहीं. 

झारखंड/गले में घंटी बिल्ली के 

इन दिनों झारखंड में एक अलग ही लड़ाई चल रही है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने धनबाद लोकसभा सीट से वहां के कुख्यात बाहुबली नेता ढुल्लू महतो को टिकट दिया तो बिहार-झारखंड में शुरुआती दिनों से ही भाजपा के नेता रहे सरयू राय ने इस फैसले का विरोध करते हुए कह दिया कि मैं "इस बिल्ली के गले में घंटी बांधने" के लिए तैयार हूं. राय ढुल्लू महतो के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

इधर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का कहना है कि अगर कांग्रेस राय को टिकट देती है तो वह उनका समर्थन करेंगे. मामला अब कांग्रेस के पाले में हैं. राय झारखंड के बड़े नेता हैं और अपने भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के लिए चर्चित हैं. वे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ अभियान चला चुके हैं. अगर वे ढुल्लू महतो के खिलाफ मैदान में उतरते हैं तो खुद भाजपा के लिए यह अच्छा उदाहरण नहीं होगा. 

छत्तीसगढ़/ नींबू काटकर 
समस्याओं का समाधान

असल में, चुनाव के दौरान प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं को प्रलोभन देना आम बात है. मगर छत्तीसगढ़ में एक प्रत्याशी ऐसे हैं जो मतदाताओं से कह रहे हैं कि उन्हें कोई समस्या होगी तो वे तंत्र-मंत्र से ठीक कर देंगे. छत्तीसगढ़ में कांकेर से भारतीय जनता पार्टी ने भोजराम नाग को लोकसभा का उम्मीदवार बनाया है. नाग 28 मार्च को बालोद में एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे. वहां उन्होंने कहा, "आप लोग जानते हैं, मैं नेता होने के साथ-साथ बैगा (तांत्रिक का स्थानीय शब्द) भी हूं.

तंत्र-मंत्र कांकेर से भाजपा उम्मीदवार भोजराम नाग (दाएं)

मुझे यदि आप लोग चुनाव में जिताते हैं, तो आपके गांव में कोई तंत्र-मंत्र की समस्या होगी तो उसे मैं नींबू काटकर ठीक कर दूंगा." अब जनता यह सोच रही है कि लोकसभा के चुनाव में लोग सड़क-स्कूल बनाने की बात करते हैं, यह अनोखे प्रत्याशी हैं जो इन सबसे आगे बढ़कर नींबू काटकर समस्याओं का हल कर देंगे. जानकार इसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मान रहे हैं. हालांकि नाग जिस क्षेत्र से आते हैं, वहां आदिवासी समाज के बीच बैगाओं की अच्छी पैठ है. इससे पहले नाग अंतागढ़ विधानसभा से विधायक रह चुके हैं.

मध्य प्रदेश/पति-पत्नी और चुनाव

गठबंधन पार्टी के स्तर पर जटिल प्रक्रिया है. लेकिन लोकसभा चुनाव ने मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक राजनैतिक परिवार में तालमेल की गुंजाइश समाप्त कर दी. पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने बालाघाट से विधायक अपनी पत्नी अनुभा मुंजारे से मतदान की तारीख तक घर से दूर जाने को कहा और ऐसा न करने पर खुद घर से चले जाने की बात कही. बसपा प्रत्याशी कंकर कहते हैं कि एक घर में रहे तो हम पर गुप्त समझौता करने के आरोप लगेंगे! कंकर ने 2023 का विधानसभा चुनाव परसवाड़ा से गोंडवाना गोमांतक पार्टी से लड़ा था. 

अनुभा मुंजारे

—अजय सुकुमारन

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