दिग्गजों का दंगल
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा नेता गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच खींचतान दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा नेता गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच खींचतान दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. शेखावत कानून-व्यवस्था और बजट को लेकर गहलोत सरकार पर निशाना साध रहे हैं. गहलोत ने भी राज्य की एजेंसियों को सहकारी समिति निधि घोटाले और 2020 में उनकी सरकार को गिराने की साजिश में शेखावत की भूमिका की जांच करने पर लगा दिया है. इसमें अभी कुछ खास हाथ नहीं लगा है. हाल में जोधपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि केंद्र ने शेखावत की सुरक्षा इसलिए बढ़ा दी है ताकि एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार न कर सकें. इस पर शेखावत ने कहा कि उन्हें पहली बार पता चला कि सुरक्षा प्राप्त लोग गिरफ्तार नहीं किए जा सकते. वहीं, अपने फोन की अवैध टैपिंग को लेकर दिल्ली में शेखावत की एफआइआर के मामले में दिल्ली पुलिस ने फरवरी में तीसरी बार गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा से पूछताछ की.
मंत्री बनने की चाह
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बीच कई भाजपा नेता शीर्ष नेतृत्व की नजर में आना चाहते हैं. मोदी सरकार में मंत्री रहे रविशंकर प्रसाद फिलहाल भाजपा प्रवक्ता भी नहीं हैं, पर हाल में वे आक्रामक ढंग से सरकार और पार्टी का बचाव करते दिख रहे हैं. हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अदाणी केस में सरकार पर विपक्ष ने तीर चलाने शुरू किए तो प्रसाद ने आक्रामक ढंग से बचाव किया. बिहार में भी नीतीश कुमार पर सबसे तीखे हमले प्रसाद ही कर रहे हैं. उनकी उम्मीद इसलिए बढ़ी है कि अगर वे मंत्री बनते हैं तो बिहार में अकेली पड़ी भाजपा को कुछ शहरी सीटों पर कायस्थ वोटरों को साथ लाने में मदद मिलेगी.
सबके नीतीश
पटना में 18 फरवरी को आयोजित भाकपा-माले के महाधिवेशन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पहुंचे. उन्होंने मंच से भाजपा को सौ सीटों पर समेट देने की चुनौती दी. दिलचस्प बात यह है कि महज छह माह पहले यही नीतीश भाजपा के साथ थे और वाम दल समेत तमाम विपक्षी पार्टियां उन्हें पलटू बाबू और सांप्रदायिकता के समर्थक कहती थीं. लेकिन, आज ये तमाम पार्टियां उनके बयान पर तालियां बजा रही हैं. दरअसल, भारतीय राजनीति में नीतीश ही इस वक्त देश के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं जिनकी स्वीकार्यता दक्षिणपंथ से लेकर वामपंथ तक एक जैसी है. भले देश इन दिनों वैचारिक तौर पर वाम और दक्षिण में बंटा हो, मगर उनके पास सबको साधने का कौशल है.
निशाना कहीं और है
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी इन दिनों रामपुर संसदीय क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं. वे जनसंपर्क का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. 16 फरवरी को नकवी ने रामपुर के मिलक इलाके में मौजूद प्रतिष्ठित शिव मंदिर में पूजा की, उसके बाद रठौंड़ा में किसान मेले का उद्घाटन किया. नकवी की योजना आने वाले दिनों में रामपुर में रामचरित मानस पर आधारित नाटक 'जय श्रीराम-रामायण' कराने की है. इस नाटक का निर्देशन मशहूर अभिनेता पुनीत इस्सर ने किया है.
...और नहीं चला जादू
'खेला होबे' फिर फिजाओं में तैर रहा था. और ऐसा हो भी क्यों न, आखिरकार कोलकाता के ईडन गार्डन में रणजी ट्रॉफी का फाइनल मैच ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह क्षेत्र सौराष्ट्र के बीच जो खेला जाना था. बंगाल के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री मनोज तिवारी ने राज्य की टीम का जमकर उत्साह बढ़ाया और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि बंगाल 22 गज के मैदान में उसी तरह का करिश्मा दोहराएगा जैसा सियासी क्षेत्र में दीदी ने कर दिखाया था. हालांकि बंगाल वह मैच हार गया.
—साथ में रोहित परिहार, आशीष मिश्र, पुष्यमित्र, हिमांशु शेखर और रोमिता दत्ता