कूटनीतिक किक

पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से सबसे कमजोर टीम भले भारत के पास है, पीएम ने अंडर-17 फुटबॉल टूर्नामेंट कराने का विचार उछाल दिया

 नरेंद्र मोदीःकूटनीतिक भुनाने का मौका
नरेंद्र मोदीःकूटनीतिक भुनाने का मौका

भारत फुटबॉल खेलने वाले देशों के बीच भले कहीं न हो, पर पीएम नरेंद्र मोदी कूटनीतिक पहुंच बनाने के लिए इसे भुनाने का मौका नहीं छोड़ना चाहते. सबसे पहले उन्होंने ब्रिक्स देशों में जुड़ाव बनाने के लिए फुटबॉल का उपयोग किया. पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से सबसे कमजोर टीम भले भारत के पास है, पीएम ने अंडर-17 फुटबॉल टूर्नामेंट कराने का विचार उछाल दिया.

दो टूर्नामेंट के बाद, योजना विफल हो गई. लेकिन फुटबॉल अब भी पीएम का पीछा कर रहा है. विश्व चैंपियन अर्जेंटीना के सीनेटर और सरकार के स्वामित्व वाली तेल कंपनी येसिमिएनटोस पेट्रोलिफेरोस फिस्केल्स के प्रमुख पाब्लो गोंजालेज ने हाल में भारत ऊर्जा सप्ताह के मौके पर पीएम को मेसी टी-शर्ट उपहार में दी. क्या पता, फुटबॉल एक और कूटनीतिक वार्ता का बहाना बन जाए.

रिकॉर्ड जीत

यूपी में स्नातक और शिक्षक खंड क्षेत्र की कुल पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव नतीजे 3 फरवरी को घोषित होते ही भाजपा नेता अरुण पाठक के नाम कई रिकॉर्ड जुड़ गए. कानपुर स्नातक खंड क्षेत्र की सीट पर पाठक ने निकटतम प्रतिद्वंदी को 53,000 से अधिक मतों से हराया. इन चुनावों में 50,000 से ज्यादा मतों से जीतने वाले अरुण देश के पहले भाजपा नेता हैं. इसी सीट पर 32 वर्ष से काबिज रहे जगेंद्र स्वरूप के बेटे मानवेंद्र को 2015 में हरा पाठक ने स्वरूप परिवार का 99 साल का वर्चस्व तोड़ा था. पाठक इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगाने वाले पहले नेता भी हैं.

हद कर दी आपने

कोलकाता में सेंट जेवियर्स यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को डी.लिट की उपाधि प्रदान की गई, राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने उनकी तुलना जॉन मिल्टन, विंस्टन चर्चिल, एस. राधाकृष्णन और अटल बिहारी वाजपेयी से की. ये सभी राजनेता अपने साहित्यिक कार्यों के लिए भी जाने जाते हैं. वैसे, कवि और पीएम वाजपेयी के साथ ममता की तुलना से बंगाल भाजपा चिढ़ गई. भाजपा नेता समझ नहीं पा रहे कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चुने गए और प्रधानमंत्री के पसंदीदा नौकरशाह बोस भला ऐसा कैसे कर सकते हैं. सबसे ज्यादा मौज तो वामपंथी ले रहे हैं.

नगालैंड में बिहार

बिहार के दल इन दिनों नगालैंड में जुटे हैं. इस महीने के आखिर में वहां चुनाव होने हैं. जद(यू) आठ सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने की तैयारी में हैं तो राजद एक सीट पर. जद(यू) का मकसद साफ है. उसके नेता नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में उतरना चाह रहे हैं तो वह भी नेशनल पार्टी बनना चाह रहा. उसे नगालैंड में आठ फीसद वोट मिल गए तो उसका दावा नेशनल पार्टी का हो जाएगा. यह 2018 में भी वहां चुनाव में उतरा था. उसका एक उम्मीदवार जीता था, मगर वोट सिर्फ 4.5 फीसद मिले. यहां कुछ नेता संसाधन मिलने पर किसी भी पार्टी में जा सकते हैं. जद(यू) इसी मौके का लाभ लेने में जुटा है. 

नए जिले की तलाश

राजस्थान में कांग्रेसी विधायकों की एक मांग इन दिनों अशोक गहलोत सरकार के लिए मुसीबत बन गई है. सरकार ने बजट के लिए विधायकों से सुझाव मांगे तो अधिकतर विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र में नए जिलों की मांग कर डाली. कई विधायकों ने तो अपने मौजूदा जिले में दो-तीन नए जिले बनाए जाने की सिफारिश कर डाली. विधायकों की नए जिलों की मांग का जब अध्ययन किया गया तो पता चला कि वे राजस्थान के मौजूदा 33 जिलों के 100 टुकड़े करना चाहते हैं. सयाने बताते हैं कि चुनावी साल में जनता की नाराजगी और सत्ता-विरोधी रुझान से बचने के लिए हर विधायक अपने लिए नए जिलों की तलाश कर रहा है.

—साथ में अनिलेश एस. महाजन, रोमिता दत्ता, पुष्यमित्र, आनंद चौधरी और आशीष मिश्र

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