खून से सनी झील की नगरी
उदयपुर में कन्हैया लाल की जघन्य हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस संगीन वारदात ने न केवल नफरत के बढ़ते काले साये को उजागर किया है, बल्कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी को भी बेपरदा कर दिया

आनंद चौधरी
उदयपुर. झीलों की नगरी के नाम से मशहूर राजस्थान का सबसे खूबसूरत शहर. देशी-विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद. लेकिन, 28 जून को इस शहर के दामन पर ऐसा बदनुमा दाग लग गया जो शायद अब कभी नहीं मिट पाएगा. उदयपुर के हाथीपोल क्षेत्र के मालदास स्ट्रीट बाजार में सुप्रीम टेलर के नाम से पहचाने जाने वाले कन्हैया लाल की जिस बेरहमी और नृशंस तरीके से गला काटकर हत्या की गई, उसने राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश को शर्मशार कर दिया. हत्या के आरोपी मोहम्मद रियाज अख्तरी और गौस मोहम्मद दावत-ए-इस्लामी संगठन से जुड़े हुए हैं. यह कराची स्थित सुन्नी इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन है. इसके तार पाकिस्तान के अतिवादी संगठन बरेलवी पैन इस्लामिक तहरीक-ए-लबाइक से जुड़े हैं. यह संगठन दिल्ली, यूपी, मुंबई और राजस्थान के उदयपुर, चित्तौडग़ढ़, भीलवाड़ा, टोंक, धौलपुर और भरतपुर में सक्रिय बताया जा रहा है.
कन्हैया लाल का सिर काटने के बाद दोनों ने धमकी भरा वीडियो भी जारी किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चुनौती दी गई. इसी वीडियो में दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कहा, ''आग तुमने लगाई थी और इसे बुझाएंगे हम.'' साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ''गुस्ताखे नबी की एक ही सजा, सर धड़ से जुदा.'' हालांकि, राजस्थान पुलिस ने दोनों को पांच घंटे के भीतर ही गिरफ्तार कर लिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने के बाद नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआइए) भी हरकत में आई. चार सदस्यीय एनआइए टीम ने उदयपुर पहुंचकर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी. एनआइए ने आइपीसी की धारा 452, 302, 153 ए, 153 बी, 295 ए और 34 के तहत मामला दर्ज किया है. इसके अलावा यूएपीए ऐक्ट की धारा 16, 18 और 20 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.
राजस्थान सरकार ने शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उदयपुर के 11 थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगाया है. इसके अलावा पूरे राज्य में इंटरनेट सेवा बंद कर धारा 144 लागू कर दी गई है. उदयपुर में एक हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. राजस्थान सरकार ने मृतक कन्हैया लाल के दो पुत्रों को संविदा के आधार पर सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की है.
इधर, मृतक कन्हैया लाल का 29 जून को कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार किया गया. कर्फ्यू के बावजूद अंतिम संस्कार में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस भीड़ में शामिल युवा पाकिस्तान और एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी करते रहे. इस दौरान आक्रोशित भीड़ ने उदयपुर शहर के एक कब्रिस्तान में भी पत्थरबाजी की. पुलिस ने अशांति फैलाने के आरोप में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया. गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग को लेकर श्मशान घाट में कन्हैया लाल के शव को चिता पर रखने के बाद लोगों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया. पुलिस और प्रशासन ने बड़ी मुश्किल से समझा-बुझाकर अंतिम संस्कार करवाया.
कन्हैया लाल हत्याकांड के तार पाकिस्तान से भी जुड़ रहे हैं. एनआइए सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों हत्यारे रियाज और गौस मोहम्मद पाकिस्तान तथा अरब लोगों के संपर्क में थे. इनके मोबाइल में पाकिस्तानी लोगों के नंबर मिले हैं. राजस्थान के गृह राज्यमंत्री राजेंद्र यादव ने बताया कि दोनों ने साल 2014-15 में करीब 45 दिन कराची में ट्रेनिंग ली थी. ये नेपाल के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे थे. वहां कुछ दिन की ट्रेनिंग लेकर दोनों यहां लौटे थे. कराची से लौटने के बाद इन दोनों ने स्थानीय युवकों को भड़काना शुरू कर दिया. पुलिस को यह जानकारी मिली है कि पिछले कुछ अरसे में दोनों ने उदयपुर और आसपास के इलाकों में कई सभाएं की थीं. दोनों के मन में नफरत इस कदर हावी थी कि ये जरा-सी बात पर दूसरे समुदाय के लोगों से झगड़ पड़ते थे.
मोहम्मद रियाज राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद कस्बे का रहने वाला है और उदयपुर के खांजीपीर में किराए के मकान में रहता था. वह मस्जिदों में खिदमत का काम करता था. गौस मोहम्मद राजसमंद जिले के भीम कस्बे का है. वह वेल्डिंग और जमीन के लेन-देन के काम से जुड़ा था. पुलिस इनके विदेशी संपर्कों का भी पता करने में जुटी है. बताया जा रहा है कि दोनों व्हॉट्सऐप पर किसी मुस्लिम यूथ ग्रुप से जुड़े थे जिसमें 100 से ज्यादा सदस्य हैं.
एनआइए हत्या के तरीके को लेकर भी जांच में जुटी है, क्योंकि सिर काटने के बाद वीडियो अपलोड करना आइएसआइएस और तालिबानी तरीका है. हत्या में जिन धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया है वैसे हथियार भी अमूमन अरब देशों में इस्तेमाल किए जाते हैं. एनआइए यह भी जांच कर रही है कि इन तक ये हथियार कैसे पहुंचे.
उदयपुर की घटना ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी को भी उजागर किया है. हालांकि, राजस्थान सरकार ने उदयपुर घटना की उच्च स्तरीय समीक्षा की. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, ''प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रथम दृष्ट्या यह घटना आतंक फैलाने के उद्देश्य से की गई है. दोनों आरोपियों के दूसरे देशों से संपर्क होने की जानकारी भी सामने आई है. अब इस घटना की आगे की जांच एनआइए की ओर से की जाएगी.''
सरकारी एजेंसियों की नाकामी
पिछले डेढ़ माह में राजस्थान सरकार ने कांग्रेस चिंतन शिविर और राज्यसभा चुनाव के लिए 10 दिन उदयपुर में बिताए. इस दौरान सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां इतनी सक्रिय थीं कि कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था. लेकिन जैसे ही 9 जून को राजस्थान सरकार के सदस्य राज्यसभा चुनाव में वोट डालने के लिए उदयपुर से जयपुर रवाना हुए, उसी दिन पुलिस और खुफिया तंत्र की नाकामी सामने आ गई.
9 जून को उदयपुर के कन्हैया लाल टेलर के मोबाइल से पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्प्णी करने वाली भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा के समर्थन और एक समुदाय विशेष के खिलाफ मैसेज फॉरवर्ड हुआ. कन्हैया लाल का कहना था कि यह मैसेज उसके बेटे से गलती से फॉरवर्ड हो गया. यह मैसेज उदयपुर में आग की तरह फैल गया. कुछ समय बाद ही कन्हैया लाल को जान से मारने की धमकियां मिलने लगी. एक समुदाय विशेष के लोगों ने इस मैसेज को लेकर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने 11 जून को कन्हैया लाल को हिरासत में ले लिया. बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर कन्हैया लाल को रिहा कर दिया गया.
रिहाई के बाद भी कन्हैया लाल की मुश्किलें कम नहीं हुई. उसे जान से मारने की धमकियां लगातार मिलती रहीं. इसी दौरान दोनों आरोपी रियाज और गौस मोहम्मद ने भी कन्हैया का सिर कलम करने की धमकी देते हुए वीडियो बनाया. इसके बाद 15 जून को कन्हैया लाल ने धानमंडी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि नाजिम सहित पांच लोग उसकी हत्या करने के मकसद से दुकान के आसपास रेकी कर रहे हैं. पुलिस इस शिकायत पर कार्रवाई करने की जगह फिर समझौता कराने में जुटी रही. इसी दबाव में कन्हैया ने 15 जून को ही समझौता पत्र पेश कर कानूनी कार्रवाई बंद करने के लिए कहा. इस दौरान दो दिन तक पुलिस के दो सिपाही कन्हैया की दुकान के आसपास तैनात भी रहे.
कन्हैया के बड़े बेटे यश ने बताया कि दो दिन बाद ही सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी हटा लिए गए. धमकियों से डरकर कन्हैया ने करीब सात-आठ दिन तक दुकान भी बंद रखी. 28 जून को ही उसने दुकान पर आना शुरू किया. 28 जून को रियाज और गौस मोहम्मद कपड़े सिलवाने के बहाने उसकी दुकान पर आए थे. कन्हैया जब गौस मोहम्मद का नाप ले रहा था तभी दोनों ने धारदार हथियार निकालकर उसकी गर्दन काट डाली. कन्हैया बचने के लिए छटपटाता रहा, लेकिन दोनों दरिंदे उस पर ताबड़तोड़ हमला करते रहे. वारदात के बाद दोनों ने दो वीडियो अपलोड किए जिसमें एक हत्या और दूसरा हत्या के कबूलनामे का था. कन्हैया को जान से मारने के बाद दोनों मोटरसाइकिल लेकर भीम की तरफ भाग गए. भीम में पुलिस ने पीछा कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया.
राजस्थान पुलिस की नाकामी का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया पर कमजोर सर्विलांस को माना जा रहा है. करौली दंगे, डूंगरपुर हिंसा और जोधपुर में हुए सांप्रदायिक तनाव की तरह इस प्रकरण में भी पुलिस की सोशल मीडिया पर नजर कमजोर रही. इसी के चलते असामाजिक तत्व नफरत का धड़ल्ले से प्रचार करते रहे. उदयपुर में राज्य के इंटेलिजेंस ब्यूरो के अलावा केंद्रीय इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोग भी सक्रिय हैं, मगर दोनों ही एजेंसियां आरोपियों के नेटवर्क और गतिविधियों को भांपने में नाकाम रहीं. राज्य और केंद्रीय एजेंसियों में तालमेल का अभाव भी इसकी वजह बना (देखें बॉक्स:
सुरक्षा एजेंसियों के बीच कमजोर तालमेल). राजस्थान के डीजीपी एम.एल. लाठर का कहना है, ''इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर धानमंडी पुलिस थाने के एसएचओ और एएसआइ को निलंबित कर दिया गया है. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद के लिंक कराची के एक संगठन दावत-ए-इस्लामी से जुड़े हैं. गौस मोहम्मद 2014-15 में कराची गया था.'' लेकिन, जाहिर है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नाकामी तथा नफरत के कारोबार ने राज्य के नक्शे पर बदनुमा खूनी धब्बा लगा दिया है.