खास रपटः दूसरा जामताड़ा!
बिहार के नालंदा और नवादा जिलों की सीमा पर बसे कई गांव इन दिनों साइबर क्राइम का हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं. कई राज्यों की पुलिस लगातार यहां आकर साइबर ठगों को गिरफ्तार करके अपने साथ ले जा रही है. यहां तक कि पटना हाइकोर्ट ने इसके दूसरा जामताड़ा बनने की आशंका जता दी. यह इलाका आखिर कैसे बना साइबर ठगी का केंद्र, पूरी पड़ताल.

पुष्यमित्र और अशोक कुमार प्रियदर्शी
अगस्त, 2021 में हैदराबाद के तिरुमालागिरी की वेंकैयाम्मा ने ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट शॉपक्लूज से एक ईयरफोन खरीदा था. उसके बाद 30 अगस्त को उनके पास अशोक नाम से एक व्यक्ति का फोन आया कि शॉपक्लूज की एक इनामी प्रतियोगिता में उन्होंने एक कार जीती है. महंगी कार मिलने की बात सुनते ही वेंकैयाम्मा की खुशी का ठिकाना न रहा. उन्होंने फोन करने वाले से पूछा कि क्या कार के बदले उन्हें पैसे मिल सकते हैं.
तो उन्हें बताया गया कि मिल सकते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बतौर रजिस्ट्रेशन फीस 8,500 रुपए देने होंगे. वेंकैयाम्मा ने झट से उतने रुपए फोन करने वाले के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करा दिए. इसके बाद वेंकैयाम्मा के पास से अलग-अलग नंबर से फोन आने लगे. फोन करने वालों ने प्रोसेसिंग फीस, रजिस्ट्रेशन चार्ज और दूसरे कई चार्ज के तौर पर 7 से 11 सितंबर के बीच 28,86,820 रुपए अलग-अलग खातों में वेंकैयाम्मा से जमा करा लिए.
उसके बाद भी जब वेंकैयाम्मा को इनाम के पैसे नहीं मिले तो वे समझ गईं कि उनके साथ ठगी हो गई है. उन्होंने हैदराबाद की राचाकोंडा साइबर क्राइम पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जांच शुरू कर दी. पता चला कि वेंकैयाम्मा से ठगी करने वाला व्यक्ति बिहार के नवादा जिले के वारसलीगंज के कोचगांव का रहने वाला राजेश कुमार महतो है.
उसकी तलाश में 17 फरवरी, 2022 को हैदराबाद पुलिस नवादा पहुंची. वह राजेश को गिरफ्तार करके हैदराबाद ले गई. पुलिस ने उससे साढ़े तीन लाख रुपए बरामद किए और उसके बैंक खातों में भी 30 लाख रु से अधिक की रकम मिली. पूछताछ में राजेश ने बताया कि वह ठगी के ऐसे 22 मामलों में शामिल रहा है.
राजेश की गिरफ्तारी के दो दिन पहले ही नवादा में स्थानीय पुलिस ने थालपोस गांव से एक साथ 33 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया था. उसके एक दिन पहले पुलिस ने वारसलीगंज के चकवाय गांव के नवनिर्वाचित मुखिया मृत्युंजय कुमार मिट्ठू को शपथग्रहण के दौरान ही गिरफ्तार किया. आरोप है कि वह साइबर ठगों के गिरोह का सरगना है. चकवाय में ही दिसंबर, 2021 में एकसाथ 17 साइबर ठग पकड़े गए थे.
दरअसल, हाल के दिनों में नवादा जिला और उसके आसपास का इलाका साइबर ठगी का केंद्र बनकर उभरा है. पिछले दो साल में 30 से अधिक राज्यों की पुलिस ने यहां से ठगी के अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है. यहां तक कि पटना हाइकोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान अक्तूबर, 2021 में कहा कि अदालत नवादा को दूसरा जामताड़ा बनने नहीं दे सकती.
जामताड़ा झारखंड का एक शहर है, जो साइबर ठगी के लिए कुख्यात है. माना जा रहा है कि बिहार के नवादा, नालंदा और शेखपुरा जिलों के 29 गांवों की परिधि में साइबर ठगों का ऐसा ही तगड़ा नेटवर्क तैयार हो गया है. 'हैलो-हैलो गैंग’ के नाम से मशहूर इन गिरोहों में अनुमानित दस हजार से अधिक युवा शामिल हैं.
नवादा से सटे नालंदा जिले का कतरीसराय नामक कस्बा भी साइबर ठगी का बड़ा केंद्र माना जाता है. कहा जाता है कि ठगी का यह धंधा यहीं से आसपास के गांवों में फैला. मार्च के पहले हफ्ते में छत्तीसगढ़ पुलिस ठगी के एक सरगना चंदन को गिरफ्तार करने आई थी. उसके एक साथी कुंदन को 19 फरवरी, 2022 को पटना पुलिस ने दो एटीएम से एक लाख रुपए की निकासी करते हुए पकड़ा था.
उसके बैग में 31 डेबिट कार्ड और नौ बैंक खातों की पासबुक जब्त हुई थीं. पूछताछ में उसने अपने सरगना चंदन का नाम लिया. उससे पता चला कि चंदन की 40 लोगों की टीम ऐसे 500 बैंक खातों का संचालन करती है, जिसमें ठगी के पैसे आते हैं. चंदन पुलिस की पकड़ से बाहर है. वह साइबर फ्रॉड का बड़ा खिलाड़ी नजर आता है. चंदन जैसे दर्जनों शातिर कतरीसराय की ठगी की दुनिया के मास्टर माइंड बन गए हैं.
तरीसराय कस्बे में एक छोटा-सा थाना है. वहां के थानाध्यक्ष शरद कुमार रंजन कहते हैं, ''यहां ठगी के मामले इतने अधिक हो गए हैं कि हर महीने दो-तीन राज्यों की पुलिस आ ही जाती है. हमारा काम उनकी मदद करना होता है. हमलोग खुद भी छापेमारी कर ठगों को पकड़ते रहते हैं. मगर एक तो यह धंधा काफी बड़ा हो गया है, फिर हमारी टीम में कोई साइबर क्राइम विशेषज्ञ नहीं है, ऐसे में इन्हें नियंत्रित करना आसान नहीं हो रहा.’’
कतरीसराय के अलावा, नवादा जिले के दो गांव थालपोस और चकवाय भी साइबर ठगों के बड़े गढ़ माने जाते हैं. चकवाय के ठगों ने अगस्त, 2020 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रहने वाले इसरो के एक रिटायर वैज्ञानिक से 14.50 लाख रुपए ठग लिए थे. इसी साल 15 फरवरी को नवादा के पकरीबरावां प्रखंड के थालपोस गांव में छापेमारी करके पुलिस ने एक साथ 33 साइबर फ्रॉड को गिरफ्तार किया है.
ये सभी लोग खेतों में बैठकर मोबाइल और लैपटॉप के जरिये ठगी के कारोबार में जुटे थे. पुलिस ने एफआइआर में लिखा है कि गिरफ्तारी के वक्त मोबाइल और लैपटॉप के अलावा ज्यादातर लोगों के पास कागज की एक शीट थी, जिसमें बहुत सारे लोगों के नंबर थे.
थालपोस गांव से गिरफ्तार लोगों में 11 की उम्र बीस साल से कम है और उनमें दो नाबालिग भी हैं. इनमें से एक 19 वर्षीय गुलशन बारहवीं का छात्र है और उसे 2019 की मैट्रिक की परीक्षा में 72.4 फीसद अंक मिले थे. फर्स्ट डिविजन से पास करने की वजह से उसे बिहार सरकार की तरफ से दस हजार रुपए का इनाम भी मिला था. मगर उन पैसों से उसने एक स्मार्टफोन खरीद लिया था.
गिरफ्तारी के वक्त गुलशन के पास से पुलिस ने वही फोन और एक पांच पन्नों की डेटा शीट बरामद की थी. एफआइआर के मुताबिक, उस पन्ने में मोबाइल टावर लगवाने के इच्छुक लोगों के नाम पते दर्ज थे. हालांकि, उसकी मां सर्वीला देवी उसे बेकसूर बताती हैं.
दरअसल, पिछले तीन-चार महीनों से पुलिस ने नवादा जिले में साइबर ठगों की धड़पकड़ तेज कर दी है. यह सब पटना हाइकोर्ट की मुस्तैदी की वजह से हो रहा है. यह अक्तूबर, 2021 में शुरू हुआ, जब साइबर ठगी के एक आरोपी शिव कुमार की अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई के दौरान जज संदीप कुमार काफी नाराज हो गए थे.
उन्होंने नवादा पुलिस के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उक्त मामला साल 2020 का है, पर आरोपी अभी तक बाहर है. उन्होंने कहा कि वारसलीगंज में साइबर ठगी का धंधा बुरी तरह पांव पसार चुका है, मगर अदालत नवादा को दूसरा जामताड़ा बनने नहीं दे सकती. उसके बाद से हाइकोर्ट लगातार साइबर ठगी के मामले की सुनवाई कर रहा है.
उसने इस मामले में बिहार सरकार और रिजर्व बैंक के अलावा फेसबुक, यू-ट्यूब, ट्विटर, इंस्टाग्राम और गूगल जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को भी नोटिस जारी किया है. अदालत ने मोबाइल सिम कंपनियों और बैंकों के कामकाज पर भी गंभीर टिप्पणी की है. उसके बाद से वारसलीगंज और पकरीबरावां प्रखंड के इलाके में नवादा पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. हालांकि, नवादा जिले की एसपी धुरत सायली सावलाराम कहती हैं, ''यह ठीक है कि हमारे इलाके में साइबर क्राइम बहुत तेजी से फैला है. मगर इसे दूसरा जामताड़ा कहना अभी जल्दबाजी होगा. हम लगातार छापेमारी कर रहे हैं.’’
हाइकोर्ट ने साइबर ठगी के मामले को रोकने के लिए बिहार की आर्थिक अपराध इकाई और प्रवर्तन निदेशालय को भी जिम्मेदारी सौंप दी है. राज्य की आर्थिक अपराध इकाई की टीम में साइबर ठगी के विशेषज्ञ सुशील कुमार को पुलिस अधीक्षक बनाकर लाया गया है. प्रवर्तन निदेशालय की टीम भी इलाके में घूमकर जानकारी जुटा रही है.
सुशील कुमार कहते हैं, ''कतरीसराय और आसपास के इलाके में साइबर क्राइम को रोकना हमारी प्राथमिकता है. हम लोग काफी पहले से बिहार में साइबर क्राइम को रोकने के लिए काम कर रहे हैं. राज्य में हर बीस थाने पर एक साइबर क्राइम सोशल मीडिया यूनिट स्थापित किए गए हैं. अभी कुल 74 यूनिट काम कर रहे हैं.
इनके पास उपकरण हैं, मैनपावर है और वाहन भी हैं.’’ वे बताते हैं कि नवादा जिले में भी ऐसी दो इकाइयां काम कर रही हैं. उनके मुताबिक, राज्य में सब इंस्पेक्टर और इनसे उच्च 2,587 पुलिस पदाधिकारियों को साइबर क्राइम से मुकाबला करने के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है. वे कहते हैं, ''कतरीसराय और आसपास के इलाके में भी हमने हॉटस्पॉट चिन्हित कर लिए हैं. अब आगे इसके निवारण की कार्रवाई में जुट रहे हैं.’’
वहीं, कतरीसराय के स्थानीय पत्रकार सोहन सिंह का कहना है कि यहां के इन ठगों का धंधा इतना बढ़ गया है कि इनमें से कई लोगों ने गांवों को छोड़कर पटना, दिल्ली, मुंबई, बेंगलूरू जैसे शहरों में अपने ठिकाने बना लिए हैं. वे बताते हैं, ''वहां उन्होंने प्रॉपर्टी खरीद ली है और वे वहीं से अपना नेटवर्क चला रहे हैं.’’ वहां के थानाध्यक्ष शरद का भी कहना है कि अब ठगी के केवल छोटे खिलाड़ी ही यहां बचे हैं.
कतरीसराय के एक समाजसेवी वैद्य अनिल कुमार कहते हैं, ''तेजी से अमीर बनने का यह धंधा युवाओं को आकर्षित कर रहा है. इसलिए पूरे इलाके में बच्चों का पढाई-लिखाई के प्रति आकर्षण खत्म हो गया है. इस कारोबार ने एक पूरी पीढ़ी को बरबाद कर दिया है.’’ उनका मानना है कि प्रशासन ठान ले तो इस धंधे को खत्म किया जा सकता है, क्योंकि यह पूरा कारोबार बैंकों और सिम कंपनियों की मदद से चल रहा है.
मगर फिलहाल सरकार इस मसले पर गंभीर नहीं नजर आ रही. कतरीसराय का इलाका कभी वैद्य नगरी के रूप में मशहूर था और लोग यहां अपने दाग-धब्बों से निजात पाने आते थे. लेकिन, अब ठगी के धंधे की वजह से खुद इसी इलाके पर बड़ा धब्बा लग गया है.