खास रपटः ओमिक्रॉन से सावधान
ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों की वजह से कोविड की तीसरी लहर का अंदेशा पैदा होने के साथ ही केंद्र ने बूस्टर शॉट कार्यक्रम का खुलासा किया और राज्यों ने आनन फानन प्रतिबंध लगाए
सोनाली आचार्जी
करीब पांच महीने तक किसी भी वक्त आराम से कहीं भी घूमने फिरने की आजादी के बाद दिल्ली के लोगों को अब रात में नया कर्फ्यू झेलना होगा. राष्ट्रीय राजधानी ने 27 दिसंबर को कोविड के 331 नए मामले दर्ज किए, जो 9 जून के बाद एक दिन में दर्ज सबसे ज्यादा मामले थे. यह आंकड़ा 1 दिसंबर को रिपोर्ट किए गए नए मामलों से करीब 10 गुना ज्यादा था. आंकड़ों में तेजी से उछाल के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने पड़ोसी राज्यों—हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तरह रात का कर्फ्यू लगा दिया. हालांकि दिल्ली की टेस्ट पॉजिटिविटी दर महज 0.68 फीसद है, जो डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के 5 फीसद या उससे कम के सुझाव से काफी नीचे है लेकिन अधिकारी गण सावधानी के मामले में चूक रहे हैं क्योंकि 28 दिसंबर को राज्य के कम से कम 165 मामलों में कोविड का बेहद संक्रामक वैरिएंट ओमिक्रॉन पाया गया.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के मुताबिक, 28 दिसंबर तक भारत के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ओमिक्रॉन के 653 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 186 मरीज ठीक हो गए या दूसरी जगह चले गए. सबसे ज्यादा (167) मामले महाराष्ट्र में, फिर दिल्ली (165), केरल (57), तेलंगाना (55), गुजरात (49) और राजस्थान (46) पाए गए. जैसा कि इस साल के शुरू में डेल्टा वैरिएंट से आई दूसरी लहर के समय देखा गया कि कोविड में किसी तरह की निरंतर वृद्धि अचानक आने वाले उफान की चेतावनी होती है. एक्वस, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है, ''हमें हालात को उतना नहीं बिगड़ने देना चाहिए जितने विदेश में बिगड़ गए हैं, खासकर ब्रिटेन में. ओमिक्रॉन के मामलों में दुनियाभर में उभार है और हमें भारत में इस तरह की हालत होने से रोकने के लिए तैयार रहना चाहिए.''
ओमिक्रॉन, या बी.1.1.529 वैरिएंट, जिसके बारे में सबसे पहले नवंबर के आखिर में दक्षिण अफ्रीका में जानकारी सामने आई थी, दुनियाभर में तेजी से डेल्टा की जगह ले रहा है. 28 दिसंबर तक यह दुनिया के 108 देशों में फैल गया, जिससे 1,51,000 लोग संक्रमित हुए और 26 की मौत हो गई. इस वैरिएंट के रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन (वह हिस्सा जिसके जरिए यह वायरस इनसानी कोशिका में प्रवेश करता है) में डेल्टा के मुकाबले आठ ज्यादा म्यूटेशन हैं. इस वैरिएंट के दोहरा होने का समय 1.5-3 दिन है. ब्रिटेन में घरों और कॉन्टैक्ट अध्ययनों से पुष्टि होती है कि यह कोविड का अब तक का सबसे ज्यादा संक्रामक स्ट्रेन है. मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. संदीप बुद्धिराजा कहते हैं, ''अगले कुछ हफ्तों में भारत में ओमिक्रॉन के प्रसार की तस्वीर साफ हो जाएगी. इसने कई देशों में पुराने स्ट्रेन की जगह ले ली है और भारत में अलग व्यवहार नहीं करेगा.''
राष्ट्रीय स्तर पर अभी तक इसके तेजी से फैलने के कोई संकेत नहीं हैं. 27 दिसंबर को भारत की आर-वैल्यू (कोई कोविड मरीज कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है) 1 से कम थी, जिससे इसके धीमे प्रसार का संकेत मिलता है और राष्ट्रीय टेस्ट पॉजिटिविटी दर 0.98 फीसद थी. लेकिन करीब 20 जिलों में साप्ताहिक पॉजिटिविटी दर 5 फीसद से ज्यादा थी. ये जिले केरल, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर और पश्चिम बंगाल में थे. कुछ महानगरों में आर-वैल्यू चिंता का सबब है. 15 दिसंबर को सबसे ज्यादा आर-वैल्यू 1.12 दिल्ली में थी, उसके बाद मुंबई (1.10), बेंगलूरू (1.07), कोलकाता (1.05) और चेन्नै (1.04) में थी.
संभावित लहर पर लगाम
कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यह वायरस पहले ही इतना फैल गया है कि तीसरी लहर आकर रहेगी. आइआइटी कानपुर के एक अध्ययन में गौसियन मिक्सचर मॉडल नामक स्टैटिस्टिकल टूल का इस्तेमाल करके भविष्यवाणी की गई है कि फरवरी के शुरू में तीसरी लहर अपने चरम पर होगी. वैश्विक उदाहरणों पर आधारित पेशनगोइयां भी हैं कि यह लहर कितनी खराब हो सकती है. फ्रांस में 81 फीसद लोगों के टीकाकरण के बावजूद 28 दिसंबर को 1,00,000 नए मामले दर्ज किए गए.
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल चेतावनी देते हैं, ''भारत में इस तरह के प्रकोप से हमारी आबादी के मद्देनजर हर रोज करीब 13 लाख मामले आ सकते हैं. हमें हालात पर निगाह बनाए रखने की जरूरत है. तीसरी लहर को रोकने पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है.'' दूसरे विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कोई लहर नहीं आएगी. फोर्टिस मुलुंड, मुंबई के क्रिटिकल केयर मेडिसिन और आइसीयू के डायरेक्टर डॉ. राहुल पंडित का कहना है, ''हमें दो सप्ताह और इंतजार करके यह देखना चाहिए कि आंकड़ों में इजाफा हो रहा है. साथ ही हमें कोविड से बचाव के एहतियाती उपायों को दोगुना कर देना चाहिए और अपने अस्पतालों को तैयार रखना चाहिए.''
विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन आखिरी विकल्प होना चाहिए. मशहूर वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कंग का कहना है, ''कोविड के साथ जीने के लिए आपको व्यापक लॉकडाउन की जरूरत नहीं है. 'टेस्ट-ट्रेस-ट्रीट-वैक्सिनेट' की रणनीति एक साल पहले के मुकाबले आज ज्यादा उन्नत है. हमें अपने फायदे के लिए इन उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए.'' वास्तव में मौजूदा दिशानिर्देशों में राज्यों से कहा गया है कि वे 10 फीसद से अधिक टेस्ट पॉजिटिविटी दर होने या अस्पतालों में 40 फीसद से ज्यादा बेड भर जाने पर ही लॉकडाउन लगाएं. जहां कहीं मामले बढऩे के संकेत हैं, वहां रणनीतिक तरीके लागू करने चाहिए. मिसाल के तौर पर, मुंबई की आर-वैल्यू पहले 1 से ज्यादा है. हालांकि इस महानगर में लॉकडाउन नहीं लगाया है लेकिन स्कूलों में अनिवार्य रूप से मास्क लगाने और घंटे कम करने जैसे जनसंपर्क घटाने के उपाय किए गए हैं. महाराष्ट्र में रात्रि कर्फ्यू भी लागू है और मॉल तथा सिनेमा हॉल बंद कर दिए गए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 25 दिसंबर को कोविड अनुकूल व्यवहार, खासकर मास्क पहनने पर जोर दिया. संक्रामक रोगों की विशेषज्ञ दिल्ली की डॉ. अंकिता बैद्य का कहना है, ''लोगों को तीन-प्लाइ वाले या ए95 मास्क पहनने की जरूरत है. एक परत वाले सूती या कपड़े के अन्य मास्क कारगर नहीं होंगे.''
टीका ही हथियार है
विशेषज्ञों को भरोसा है कि इस बार कोविड के प्रसार और बीमारी की गंभीरता को कम करने में टीके मददगर होंगे. कोविड-19 के आठ टीकों—कोविशील्ड, कोवैक्सीन, जायकोव-डी, स्पुतनिक-1, जॉनसन ऐंड जॉनसन, कोर्बेवैक्स और कोवोवैक्स—को देश के दवा नियामक ने आपातकालीन प्रयोग की मंजूरी दे दी है. देश में 18 साल से ऊपर के करीब 89 फीसद लोगों को टीके की पहली डोज लग गई है और 61 फीसद को दोनों डोज लगा दी गई है.
लेकिन संकेत हैं कि ओमिक्रॉन को रोकने के लिए टीके की दो डोज पर्याप्त नहीं होंगी. भारत में ओमिक्रॉन के 90 फीसद मामलों में पूरी तरह टीकाकरण हो चुका था, तीन फीसद ने विदेशों में बूस्टर शॉट लिया था और दो फीसद ने एक डोज लगवाई थी. लंदन के इंपीरियल कॉलेज के एक अध्ययन में कहा गया है कि कोविशील्ड की दोनों डोज के बाद ओमिक्रॉन से गंभीर बीमारी के बचाव के मामले महज 20 फीसद हैं (भारत में अब तक करीब 88 फीसद ने कोविशील्ड का टीका लिया है) और मौत से बचने के मामले केवल 30 फीसद है. बूस्टर शॉट लेने से गंभीर बीमारी की आशंका 80 फीसद कम हो जाती है और मौत का अंदेशा 88 फीसद घट जाता है. डॉ. कंग कहती हैं, ''बूस्टर शॉट की बदौलत लक्षण वाले संक्रमण का 70-75 फीसद बचाव होता है.''
भारत सरकार ने पूरी तरह से टीकाकृत स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम मोर्चे के कर्मचारियों के साथ ही सह-रुग्णता वाले 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए 10 जनवरी से बूस्टर शॉट लगाने की घोषणा की है. साठ साल से अधिक उम्र के लोगों को डॉक्टरों की सलाह पर ही शॉट दिया जाएगा और वह भी दूसरी डोज के नौ महीने बाद. 15 से 18 साल की उम्र के बच्चों को 3 जनवरी से कोवैक्सीन का टीका लगाया जा सकता है. मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम के चेयरमैन और एमडी डॉ. नरेश त्रेहन का कहना है, ''बच्चों को टीका लगाने से यह सुनिश्चित हो जाएगा कि वे बीमारी से परिवार के सदस्यों को संक्रमित नहीं करेंगे और ओमिक्रॉन के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेंगे.''
वैसे, यह स्पष्ट नहीं है कि किस वैक्सीन को बूस्टर के तौर पर लिया जा सकता है. ब्रिटेन में किए गए कॉम-कोव2 के अध्ययन में पाया गया कि उन लोगों की रोगरोधी प्रतिक्रिया बेहतर थी जिन्होंने पहली डोज एस्ट्राजेनेका या फाइजर-बायोएनटेक के नौ सप्ताह बाद मॉडर्ना का टीका लिया. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में मंत्रणा चल रही है कि कोविशील्ड लगा चुके लोगों को तीसरी डोज हाल में स्वीकृत कोवोवैक्स वैक्सीन की दी जा सकती है, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में बनाया जाएगा. इस बारे में अभी फैसला किया जाना है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की गुजारिश के साथ बताया, ''हम तीसरे शॉट के लिए श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों पर डेटा का इंतजार कर रहे हैं. हमें ऐसी वैक्सीन चाहिए जिसका बूस्टर शॉट के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सके.''
यह भी हो सकता है कि ओमिक्रॉन खुद ही बहुत लोगों को प्राकृतिक इम्युनिटी प्रदान कर दे. डॉ. बुद्धिराजा का कहना है, ''ओमिक्रॉन जीवित पस्त हो चुके वायरस की तरह है. अगर इससे कुछ मामूली बीमारी होती है तो यह टीकाकरण के लिए बूस्टर होगा और दूसरों के लिए वैक्सन डोज होगा.''
एक ओर जहां इस वायरस को थामने के उपाय किए जा रहे हैं वहीं इसके बढऩे पर इलाज की भी तैयारी चल रही है. भारत में करीब 1,810,083 आइसोलेशन बेड, 4,94,314 ऑक्सीजन बेड, 1,39,300 आइसीयू बेड और 18,836 एमटी प्रति दिन के हिसाब से ऑक्सीजन है. सरकार ने ऐंटी-वायरल दवा मोल्नूपिराविर के इस्तेमाल की भी इजाजत दे दी है. अधिक जोखिम वाले लोगों में बीमारी के शुरुआती चरण में इस दवा के इस्तेमाल से अस्पताल में भर्ती करने और मौत के मामले में करीब 30 फीसद की कमी देखी गई है. भारत में 13 कंपनियां इसे बनाएंगी.
भारत में ओमिक्रॉन मामलों के डेटा से पता चला कि केवल 30 फीसद में ही लक्षण दिखे—ज्यादतार मामलों में सर्दी-जुकाम से मिलते-जुलते लक्षण. बेंगलूरू के टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स ऐंड सोसाइट के डायरेक्टर और वैज्ञानिक एवं औद्योेगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआइआर) में सेंटर फॉर सेल्यूलर ऐंड मॉल्यूक्यूलर बायोलॉजी के पूर्व प्रमुख राकेश मिश्र का कहना है, ''लोग ओमिक्रॉन संक्रमण को सामान्य सर्दी-जुकाम मान सकते हैं. ओमिक्रॉन से पैदा हुई बीमारी डेल्टा से बिल्कुल अलग है. अभी तक यह गंभीर नहीं है.''
सितंबर के बाद से रोजाना परीक्षण के मामले कम हो गए हैं, और आइसीएमआर (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) के मुताबिक, यह दिसंबर के पहले सप्ताह में 8,86,263 और 12.5 लाख के बीच था. केरल ने 26 दिसंबर को केवल 42,149 टेस्ट कराए थे, जहां देश में सबसे ज्यादा पॉजिटिविटी रेट 7.7 फीसद है. डॉ. पंडित का कहना है, ''कोविड का इलाज और उससे बचाव काफी हद तक समय पर पहचान पर निर्भर है. कई दवाइयां लक्षण आने के पहले कुछ दिनों के भीतर देनी होती हैं. अगर लोग टेस्ट कराने के लिए आगे नहीं आएंगे तो पूरे प्रसार को तय कर उभरते हॉटस्पॉट का पता लगाना मुश्किल है.''
निकट भविष्य में एक बड़ी चुनौती 2022 के शुरू में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव हैं. स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने 23 दिसंबर को चुनाव वाले सभी राज्यों से अपने यहां टीकाकरण अभियान तेज करने को कहा. मंत्रालय ने राष्ट्रीय औसत से कम टीकाकरण वाले राज्यों उत्तर प्रदेश और पंजाब में मल्टीडिसिप्लिनरी टीमें भेजी है.
उत्तर प्रदेश में 83 फीसद योग्य आबादी को पहली डोज लग गई है और 46 फीसद का पूर्ण टीकाकरण हो गया है. पंजाब ने 2.6 करोड़ टीके लगाए हैं; 77 फीसद योग्य आबादी को पहला टीका लगा दिया गया है और 41 फीसद को दोनों टीके लग गए हैं. सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञ के. श्रीनाथ रेड्डी का कहना है, ''हमने देखा है कि कोविड से बचाव के नियम तोड़ने से कैसे अचानक उफान आता है. उन गलतियों को दोहराना नहीं चाहिए. एक ओर जहां टीके, इलाज के नए विकल्पों और कोविड केयर इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार ने हमें डेल्टा लहर के मुकाबले ओमिक्रॉन के खिलाफ मजबूत स्थिति में ला दिया है, वहीं किसी तरह की गफलत महंगी साबित हो सकती है.