खास रपटः उम्मीदों का टीका
विशाल पैमाने पर कोविड वैक्सिनेशन कार्यक्रम को लेकर अधिकारी भरोसे से लबरेज, मगर जमीन पर कई चुनौतियां बाकी

सोनाली आचार्जी
महाराष्ट्र में पुणे हवाई अड्डे पर 12 जनवरी को सुबह 5 बजे, तीन तापमान-नियंत्रित ट्रक पहुंचे. स्थानीय पुलिस और हवाई अड्डे के सुरक्षा दस्ते ने इसके लिए पहले से तैयारी कर रखी थी. ट्रकों में रखे माल को नौ जहाजों में लादा जाना था इसलिए इन्हें रनवे पर एक विशेष मार्ग से पहुंचाया गया. देश के 13 विभिन्न शहरों के लिए उड़े ये जहाज अपने साथ कोविशील्ड वैक्सीन की 56 लाख खुराक लेकर गए. यह कोविड वायरस से बचाने वाले बहुप्रतीक्षित रक्षा कवच का पहला बैच था, जिसकी पहली खुराक 16 जनवरी से करीब 3 करोड़ भारतीयों को मुफ्त में दी जाएगी.
नीति आयोग के सदस्य और कोविड-19 के लिए टीकाकरण के लिए गठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह के अध्यक्ष डॉ. वी.के. पॉल कहते हैं, ''देश में कोविड के मामलों में कमी आ रही है, जो अच्छा संकेत है. हमारा टीकाकरण अभियान वायरस के प्रसार को कम करने में मदद करेगा. कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों, देश में आपात इस्तेमाल के लिए स्वीकृत टीके हैं जो सभी सुरक्षा मानदंडों को पूरा कर चुके हैं. दरअसल, 12 देशों ने कोविड के टीके के लिए हमसे संपर्क किया है.'' डॉ. पॉल कहते हैं कि 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 10 दिनों तक चले ड्राइ रन के बाद देश कोविड-19 के खिलाफ अपनी 130 करोड़ आबादी के टीकाकरण के लिए पूरी तरह से तैयार है, जो दुनिया में सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम होगा.
भारत ने ऐस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को आपात उपयोग के लिए 3 जनवरी को मंजूरी दी. कोविशील्ड वायरल वेक्टर वैक्सीन है जो चिंपांजी में पाए जाने वाले एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण का उपयोग करता है. यह प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने और संक्रमण को रोकने के लिए नए कोरोना वायरस के समान प्रोटीन बनाता है शरीर की प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाता है. परीक्षणों से पता चला है कि यह औसतन 70 फीसद तक कारगर है. दूसरी ओर, कोवैक्सीन को पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआइवी) ने नोवल कोरोना वायरस के एक स्ट्रेन से तैयार किया है. भारत बायोटेक ने एक निष्क्रिय टीका विकसित करने के लिए इसका उपयोग किया, जिसका अभी तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है और अभी तक जानकारी नहीं है कि यह कितना कारगर है.
विशालकाय अभियान
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के लिए सभी राज्यों को दिशानिर्देश जारी किए हैं. पहले चरण के लिए, केंद्र टीकों की खरीद और वितरण करेगा. राज्य तय कर सकते हैं कि बाद के चरणों में वे कौन-सा टीका उपयोग करना चाहते हैं. दिशानिर्देश कहते हैं कि कोई राज्य सिर्फ एक ही वैक्सीन का इस्तेमाल करे ताकि लोगों में किसी प्रकार का भ्रम न फैले. पहले चरण में टीकाकरण किए जाने वाले लोगों की संख्या तय करने से लेकर परिवहन और वितरण बिंदुओं की पहचान तक, राज्यों के पास अपने टीकाकरण अभियान की योजना बनाने में लगभग दो सप्ताह का समय रहा है.
सभी राज्यों में, स्वास्थ्य और कोविड से जंग में अग्रिम मोर्चे पर तैनात कार्यकर्ताओं (फ्रंटलाइन वर्कर्स) को सबसे पहले टीका लगाया जाएगा. उदाहरण के लिए, बिहार ने स्वास्थ्य और अग्रिम मोर्चे के कर्मियों के टीकाकारण के पहले दो चरणों के लिए लगभग 10 लाख लाभार्थियों के नाम तय किए हैं. पहले चरण में लगभग 4,30,000 स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण किया जाएगा. अगले चरण में, फ्रंटलाइन वर्कर्स को कवर किया जाएगा जिसमें पुलिस, सशस्त्र बल, होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन स्वयंसेवक और नगरपालिका कर्मचारी वगैरह शामिल होंगे. इन तबकों का टीकाकरण पूरा हो जाने के बाद, उन डेढ़-दो करोड़ लोगों के लिए तारीखों की घोषणा की जाएगी, जो लक्षित प्राथमिक समूह में हैं यानी जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है या जिनको पहले से कोई बीमारी है.
दिल्ली में, सबसे पहले 51 लाख स्वास्थ्य और फ्रंटलाइन कर्मियों को टीका लगाया जाएगा, जबकि राजस्थान में 4,25,000 लोगों की सूची तय की गई है. मध्य प्रदेश में करीब 4,07,000 और छत्तीसगढ़ में 2,67,000 स्वास्थ्यकर्मियों को पहले टीका मिलेगा. उत्तर प्रदेश ने अपने टीकाकरण अभियान के तीन चरणों के आंकड़ों की घोषणा की है—पहले चरण में 8,00,000 स्वास्थ्यकर्मियों, दूसरे में 16 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स, और तीसरे में 3 करोड़ लोग (50 वर्ष से अधिक उम्र वाले या पूर्व में किसी रोग से ग्रस्त लोग). पश्चिम बंगाल ने अगले छह महीनों में एक करोड़ लोगों के टीकाकरण की योजना है, जिसमें पहले चरण में 6,00,000 लोगों को शामिल किया गया है.
राज्यों ने टीकों की ढुलाई, भंडारण और उन्हें लगाने के लिए अपनी अलग योजनाएं बनाई हैं. तेलंगाना में, कोविड का टीका प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और कुछ चुनिंदा निजी अस्पतालों में लगाया जाएगा. टीका लगाने वालों के लिए 10,000 से अधिक नर्सों और एएनएम (सहायक नर्स दाइयों) की पहचान की गई है. तेलंगाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य के निदेशक डॉ. जी. श्रीनिवास राव कहते हैं, ''राज्य भर में मजबूत तैयारी की गई है, जिसमें भंडारण क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त वॉक-इन कोल्ड रूम के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना और निर्बाध परिवहन के लिए वैक्सीन वैन की खरीद शामिल है.''
बिहार में, रेफ्रिजरेटेड वैन और कोल्ड बॉक्स का उपयोग करके 10 क्षेत्रीय वैक्सीन स्टोरों में आपूर्ति की जाएगी. पटना के राज्य स्तरीय स्टोर और क्षेत्रीय स्टोर में 51 लाख टीके के शीशियों को रखने की क्षमता है. इसके अतिरिक्त, राज्य-स्तरीय वैक्सीन स्टोर में वॉक-इन कूलर की औसत भंडारण क्षमता 15 लाख शीशियां हैं और वॉक-इन फ्रीजर में 5,00,000 शीशियां रखी जा सकती हैं.
उत्तर प्रदेश के पास नियमित टीकाकरण के लिए 80,733 लीटर की कोल्ड स्टोरेज क्षमता थी, लेकिन कोविड टीकाकरण अभियान के लिए 1,23,205 लीटर की अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता थी. इसमें राज्य को केंद्र से बड़े पैमाने पर मदद मिली. राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव आलोक कुमार बताते हैं, ''केंद्र सरकार ने 2,24,242 लीटर कोल्ड स्टोरेज स्पेस उपलब्ध कराया. कोविड टीकाकरण के लिए कुल 1,477 केंद्र स्थापित किए जाएंगे.'' प्रत्येक केंद्र में दो टीकाकरण दल होंगे, जो एक दिन में 200 लोगों तक पहुंचेंगे. हर दिन करीब 3,00,000 लोगों को टीका लगाया जाएगा. आलोक कुमार कहते हैं, ''हमने तीन दिनों में पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य रखा है.''
उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार का कहना है कि टीका भंडारण केंद्रों में उसी तरह का सुरक्षा इंतजाम होगा, जैसा वोट के बाद ईवीएम संग्रह केंद्रों का होता है.
राजस्थान उन राज्यों में है जहां पिछले छह महीनों में सबसे कम कोविड के मामले देखे गए हैं, वहां दो राज्यस्तरीय वैक्सीन स्टोर, छह क्षेत्रीय वैक्सीन स्टोर, 34 जिला वैक्सीन स्टोर, 2,444 कोल्ड चेन पॉइंट और 1,300 एक्वबुलेंस को अपने इस अभियान में लगाया है. राजस्थान के स्वास्थ्य सचिव सिद्धार्थ महाजन बताते हैं, ''हम आशा करते हैं कि पहले चरण के लक्ष्यों को पूरा करने में कोई समस्या नहीं आएगी. उसके बाद, हम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से दूर-दराज की अधिकांश लक्षित आबादी तक भी पहुंचने में सक्षम होंगे.''
बाधाएं और भी हैं
लेकिन इतने विशाल देश में इतने लोगों तक पहुंचना, सिर्फ टीकों की खरीद और वितरण तक की बात नहीं है. एक बड़ी चिंता सही टीका का चयन है. कुछ विशेषज्ञ कोवैक्सीन के कारगर होने को लेकर चिंतित हैं, जो अभी भी चरण 3 ट्रायल में है. 28 जिलों में ड्राई रन के बाद छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कोवैक्सीन पर संदेह जताया है. वे कहते हैं, ''टीकाकरण का प्रभाव कितने समय तक रहता है, इसका कोई डेटा उपलब्ध नहीं है. परिणाम आने तक इंतजार करना बेहतर है.'' पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र दो अन्य राज्य हैं जिन्होंने कोवैक्सीन पर सवालिया निशान लगाया है. डॉ. पॉल का तर्क है, ''म्यूटेशन होने पर भी, कोवैक्सीन पूरे वायरस पर काम करता है. यह अच्छा बैक-अप विकल्प है क्योंकि कोविड के अब कई स्ट्रेन हैं. अधिक आंकड़ों के लिए चरण 3 का ट्रायल चल रहा है.'' वे कहते हैं कि जो भी व्यक्ति इन उपलब्ध दोनों टीकों में कोई भी टीका लेगा, उसे संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी के लिए आधे घंटे के लिए टीकाकरण केंद्रों में रखा जाएगा.
इसके अतिरिक्त, कोविड टीकाकरण कार्यक्रम और इसके प्रबंधन की समीक्षा के लिए 11 जनवरी को दो संसदीय पैनल बनाए गए हैं. पैनल देश के टीके की क्षमता और टीकाकरण के लिए सरकार की योजना के बारे में रिपोर्ट बनाने के लिए टीका-निर्माताओं, स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मुलाकात करेगा.
रूस और जाइडस कैडिला के टीकों का फिलहाल भारत में परीक्षण चल रहा है और आने वाले दिनों में उनके आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी जा सकती है. फाइजर वैक्सीन को भारत में मंजूरी नहीं दी गई, जिसका परीक्षण पूरा हो गया है और अमेरिका में उपयोग भी हो रहा है. यह वैक्सीन 90 प्रतिशत तक कारगर है, जो कोविशील्ड की तुलना में अधिक है. लेकिन भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह महंगा है और उसे अधिक न्यून तापमान में ही रखा जा सकेगा. स्वास्थ्य विशेषज्ञ और अखिल भारतीय ड्रग ऐक्शन नेटवर्क (एआइडीएएन) की सह-संयोजक मालिनी ऐसोला कहती हैं, ''हम साफ-साफ नहीं जानते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सवाल उठाने के बावजूद किस आधार पर कोवैक्सीन को मंजूरी दी गई और अनुमोदन समिति में कौन था. जिन टीकों का ट्रायल पूरा हो चुका है और अन्य देशों में इस्तेमाल भी किया जा रहा है, लेकिन उन्हें भारत में मंजूरी नहीं दी गई है. पता नहीं ऐसा कैसे हुआ जबकि उनकी कारगर होने की क्षमता काफी अच्छी और प्रमाणित है.''
भारत के दो टीकों में से केवल कोविशील्ड का वितरण शुरू हुआ है. प्रत्येक कोविशील्ड शीशी में 10 खुराक है. यह लाइव वायरस वैक्सीन है इसलिए अगर इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच नहीं रखा जाता है तो इसके खराब होने की आशंका रहती है. वैक्सीन वायल (शीली) के अंदर का तापमान बताने वाले वैक्सीन वायल मॉनिटर (वीवीएम) की दुनिया भर में कमी के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि कोई ओपन वायल पॉलिसी नहीं है—वायल का कोई एक्सपायरी डेट या तापमान मॉनिटर नहीं होगा, लेकिन इन्हें खोलने के चार घंटे बाद उपयोग नहीं किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी टीका लगाने वाले की होगी.
हालांकि वैक्सीन की शीशियों का उपयोग करने के लिए टीका लगाने वाले 1,70,000 लोगों और टीकाकरण टीम के 3,00,000 सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन यह चिंता बनी हुई है कि वीवीएम के बिना शीशियों की निगरानी कैसे की जा सकती है. नई दिल्ली स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग ऐंड बायोटेक्नॉलोजी के वैज्ञानिक, वीरेंदर एस. चौहान कहते हैं, ''इतने व्यापक पैमाने पर टीकाकरण पहले कभी नहीं किया गया है, इसलिए नतीजे की भविष्यवाणी करना कठिन है. लाइव टीके के लिए कोल्ड चेन जरूरी है.''
कोविशील्ड और कोवैक्सीन की दो खुराक की आवश्यकता होती है, डेटा रिकॉर्डिंग कोविन ऐप के माध्यम से की जाएगी. कोविड टीकाकरण के लिए पंजीकरण भी इसी प्लेटफॉर्म पर होता है. इससे यह आश्वस्त किया जाएगा कि व्यक्ति समय पर अपनी दूसरी खुराक प्राप्त करें और एक ही टीके की दो खुराक प्राप्त करें. ड्राई रन के दौरान खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में डेटा अपलोड में बहुत समस्याएं देखी गई हैं. बिहार में, कुछ एएनएम को स्मार्टफोन का उपयोग करने और डेटा अपलोड करने में दिक्कत आईं. उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओम प्रकाश और गोवा के स्वास्थ्य सचिव अमित सतीजा ने वैक्सीन केंद्रों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी के मुद्दे उठाए हैं. डॉ. पॉल कहते हैं, ''राज्यों से फीडबैक जुटाया गया है और टीकाकरण अभियान शुरू होने से पहले सारी समस्याओं को दूर कर लिया जाएगा.''
क्या लोग टीका लगवाएंगे?
कई राज्यों ने छह महीने के भीतर स्वास्थ्य सेवा/फ्रंटलाइन वर्कर्स और प्राथमिकता समूहों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है. साल की दूसरी छमाही में कोविड के टीके आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकते हैं. हालांकि, टीका लगवाना स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी स्वैच्छिक है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव कहते हैं, ''किसी को भी टीके के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. जितने लोग स्वेच्छा से तैयार होंगे, हम उतने लोगों का टीकाकरण करेंगे. उद्देश्य कोविड को फैलने से रोकना है.''
सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोकलसर्कल्स के 242 जिलों के 18,000 लोगों के बीच दिसंबर 2020 में कराए गए एक सर्वेक्षण में लगभग 70 प्रतिशत लोग टीका लगाने के लिए तैयार नहीं थे. स्वास्थ्य बिरादरी में भी ऐसे स्वर उभरे हैं. टीका विशेषज्ञ डॉ. गगनदीप कंग कहती हैं कि जब तक कारगर रहने के आंकड़ों का पता नहीं चलता, तब तक वे कोवैक्सीन को नहीं चुनेंगी. शशि थरूर और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने भी ऐसी ही बात कही है. नई दिल्ली की एक स्कूल शिक्षिका चांदनी घोष कहती हैं, ''टीका मंजूरी की प्रक्रिया संदिग्ध है. मैं तो किसी खाड़ी देश की फ्लाइट लेकर, फाइजर या मॉडर्ना की वैक्सीन लूंगी.''
सिटिजंस फाउंडेशन एनजीओ के सचिव गणेश रेड्डी का कहना है कि सरकार ने टीकाकरण की तैयारियां तेज कर दी हैं, उसे टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सामाजिक संगठनों को भी शामिल करना चाहिए. लोगों के संशय को दूर करने के लिए, तेलंगाना ने जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है. पहली खुराक लेने पर, लाभार्थियों को दूसरी खुराक पूरी करने के महत्व के बारे में फोन से संदेश भेजे जाते हैं. उत्तर प्रदेश गलत सूचना को रोकने के लिए कदम उठा रहा है. प्रशांत कुमार कहते हैं, ''सोशल मीडिया पर वैक्सीन के बारे में अफवाह रोकने के लिए जिलों में पुलिस की साइबर टीमें लगाई गई हैं.''
जागरूकता अभियानों से बात नहीं बनने वाली है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि टीकाकरण में निजी अस्पतालों को शामिल किया जाए. एआइडीएएल की डॉ. मीरा शिवा कहती हैं, ''लोगों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा पर बहुत कम भरोसा है. टीका कार्यक्रम में पारदर्शिता की कमी से भी लोगों का विश्वास कम है.'' टीकाकरण के पहले कुछ चरण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में ही चलाया जाएगा ताकि लागत कम रखी जा सके और सबको उपलब्ध हो सके. हालांकि बाद में, निजी खिलाडिय़ों और अधिक टीकों को मंजूरी आवश्यक हो सकती है.
—साथ में अमिताभ श्रीवास्तव, आशीष मिश्र, अमिताभ के. मेनन, रोहित परिहार, राहुल नरोन्हा और रोमिता दत्ता