आधुनिक भारत के आधार-स्तंभ ओएनजीसीः गैस की आंच

मौजूदा सरकार का लक्ष्य 2022 तक तेल के आयात में 10 फीसदी की कटौती का है. मतलब, ओएनजीसी को अपना उत्पादन बढ़ाना होगा. कंपनी पीएसयू एचपीसीएल के अधिग्रहण पर भी काम कर रही है.

काला सोना  बॉम्बे हाइ में ओएनजीसी का तेलकूप
काला सोना बॉम्बे हाइ में ओएनजीसी का तेलकूप

शुरुआती दिन

 भारत में घरेलू तेल उत्पादन की कमान संभाले हुए है ओएनजीसी. जमीनी सीमाओं में और उससे परे समुद्र में भी इसके पास सबसे बड़े तेल के मैदान हैं जिनमें बॉम्बे हाइ भी शामिल है जो रोजाना 2,85,000 बैरल उत्पादन करता है. बाड़मेर का ब्लॉक रोजाना दो लाख बैरल से ज्यादा उत्पादन करता है. वाणिज्यिक उत्पादन के लिए समर्पित सात बेसिनों में से छह ओएनजीसी के खोले हुए हैं.

1948 की औद्योगिक नीति के मसौदे में पेट्रोलियम क्षेत्र के विकास की बात शामिल थी. आजादी से पहले अविभाजित भारत में केवल दो तेल उत्पादक कंपनियां हुआ करती थीं—असम ऑयल और एटॉक. 1955 में भारत ने सोवियत मॉडल का अनुकरण करने का फैसला किया और तेल और प्राकृतिक गैस निदेशालय की स्थापना की.

जल्द ही जवाहरलाल नेहरू और उनके मातहत प्राकृतिक संसाधन मंत्री केशव दास मालवीय को एहसास हुआ कि यह मॉडल कारगर नहीं है. फिर 1956 में निदेशालय को आयोग का दर्जा दे दिया गया. आयोग का काम पेट्रोलियम संसाधनों के विकास के लिए कार्यक्रम बनाने से लेकर उत्पादों की बिक्री भी था.

 अधिग्रहण

मौजूदा सरकार का लक्ष्य 2022 तक तेल के आयात में 10 फीसदी की कटौती का है. मतलब, ओएनजीसी को अपना उत्पादन बढ़ाना होगा. कंपनी पीएसयू एचपीसीएल के अधिग्रहण पर भी काम कर रही है जिससे तेल कारेाबार के तीनों आयामों में उसे मजबूती मिलेगी.

पिछले तीन साल में तेल के दाम 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों का मानना है कि ऐसा लंबे समय तक बना रहेगा. चूंकि रिफाइनरी कंपनियों के सकल परिशोधन मार्जिन और विपणन मार्जिन में इजाफा हुआ है, लिहाजा ओएनजीसी को अधिग्रहण में अच्छा भविष्य नजर आ रहा है.

—अनिलेश एस. महाजन

क्या आप जानते हैं?

पिछले पांच दशक में ओएनजीसी का ''सी" कमिशन से कॉर्पोरेशन बन गया. अब कंपनी को केवल ओएनजीसी के नाम से जाना जाता है.

 

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