मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर फटाफट
अक्सर मुंबई-पुणे के पुराने राजमार्ग पर जाम लगा रहता था. पुणे तक वाया बोर घाट पहुंचने में सड़क की क्षमता 10,000 वाहनों की थी लेकिन प्रायरू इस पर 60,000 वाहन होते थे.

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवेः स्थापनाः 1999
नई राह, पुराना सफर
अक्सर मुंबई-पुणे के पुराने राजमार्ग पर जाम लगा रहता था. पुणे तक वाया बोर घाट पहुंचने में सड़क की क्षमता 10,000 वाहनों की थी लेकिन प्रायरू इस पर 60,000 वाहन होते थे. इस 180 किमी की यात्रा में कम से कम पांच घंटे लगते थे क्योंकि चार लेन की रोड केवल 30 किलोमीटर तक ही थी.
अगर बीच में कोई गाड़ी खराब हो गई तो दोनों ओर कई किमी तक जाम लग जाता था. महाराष्ट्र सरकार ने 1990 में रेल इंडिया टेक्निकल ऐंड इकोनॉमिक सर्विसेज (राइट्स) को नया राजमार्ग बनाने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए कहा. 1997 में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री नितिन गडकरी ने राइट्स की सिफारिशों को लागू करते हुए पनवेल के करीब कोण से पुणे के करीब देहू रोड तक राजमार्ग बनाने का फैसला लिया. इसकी अनुमानित लागत 1,400 करोड़ रु. थी.
इसका ठेका महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम को दिया गया क्योंकि निजी कंपनियां 3,000 करोड़ रु. यानी दोगुने से भी ज्यादा रकम मांग रही थीं. गडकरी कहते हैं, ''मैं जब कहता था कि निजी क्षेत्र के अनुमान से कम राशि में मैं परियोजना को पूरा कर दूंगा तो विपक्षी दल और मीडिया मेरे ऊपर हंसते थे." इस 94 किमी लंबे एक्सप्रेसवे की अंतिम लागत 1,600 करोड़ रु. बैठी. इसे तीन साल में पूरा कर दिया गया.
अप्रत्यक्ष लाभ
इस सड़क के निर्माण में नई प्रौद्योगिकी जैसे रेडीमिक्स कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ. आज करीब एक लाख लोग रोजाना एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे रियल एस्टेट का विकास भी हुआ है जिससे पनवेल, पिम्परी-चिंचवाड़ और वाकड़ जैसे कस्बे शहर बन रहे हैं.
आगे क्या
फिलहाल एक्सप्रेसवे के उन्नयन के तहत पहाड़ों से भूस्खलन रोकने के लिए एमएसआरडीसी सुरक्षा जाल लगाया जा रहा है. हादसे रोकने के लिए सड़क के किनारे लचीले तारों के बाड़ लगाए जा रहे हैं. खालापुर से पुणे तक एक बाइपास बन रहा है जो यात्रा समय को कम करेगा. इस बाइपास में एक पुल, दो सुरंगें और एक स्टेड केबल पुल होंगे. एक सुरंग जो 8.9 किलोमीटर लंबी है, लोनावाला झील के नीचे से निकलेगी. शिंदे के मुताबिक ''यह भारत मे अपने किस्म की पहली सुरंग होगी."
पहली बार
शुरुआत 1999 में. भारत का पहला एक्सप्रेसवे. समय पर पूरी पहली सड़क परियोजना. यात्रा समय 5 घंटे से घटकर 2 घंटे हुआ.
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पहली परियोजना थी जो निजी क्षेत्र की अनुमानित लागत से कम में पूरी कर ली गई.