अमेरिका में कानूनी फतह
तीन हाइ-प्रोफाइल मामलों का पटाक्षेप होने से अदाणी ग्रुप को खासी राहत. पिछले साल हुए खुलासों से गिर गई थी उनकी कंपनियों की वैल्यू

अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) ने नवंबर 2024 के 26.5 करोड़ डॉलर (2,568 करोड़ रुपए) के कथित रिश्वतखोरी मामले में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी के सीईओ विनीत एस. जैन और अन्य के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप स्थायी रूप से हटा दिए हैं.
समूह ने अमेरिकी बाजार नियामक सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमिशन (एसईसी) के साथ एक दीवानी मामला भी सुलझा लिया है. गौतम और सागर अदाणी के खिलाफ यह मामला अदाणी ग्रीन एनर्जी के 75 करोड़ डॉलर (7,245 करोड़ रुपए) के बॉन्ड जारी करने के दौरान अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने के आरोपों से जुड़ा था.
इसके अलावा, अदाणी समूह ईरानी तेल की खरीद में कथित प्रतिबंधों के उल्लंघन से जुड़े एक दीवानी मामले को सुलझाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को 27.5 करोड़ डॉलर (2,656 करोड़ रुपए) का भुगतान करने पर भी सहमत हो गया है.
तीन हाइ-प्रोफाइल मामलों का एक के बाद एक बंद होना अदाणी परिवार के लिए बड़ी राहत की बात है. इन आरोपों ने एक साल से ज्यादा समय तक अदाणी ग्रुप को संकट में डाले रखा था, जिससे सूचीबद्ध कंपनियों की मार्केट वैल्यू बुरी तरह गिर गई और उनकी फंड जुटाने की क्षमता पर भी सवाल उठने लगे.
सबसे अहम बात यह रही कि अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी, सागर, जैन और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध भारतीय सौर ऊर्जा निर्माता कंपनी एज्योर पावर के कुछ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को हटा दिया.
अदाणी ग्रीन एनर्जी ने 18 मई को स्टॉक एक्सचेंज को दिए एक नोटिस में कहा, ''अमेरिकी न्याय विभाग ने एक अर्जी दाखिल की है जिसमें गौतम एस. अदाणी, सागर आर. अदाणी, विनीत एस. जैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की गई है. अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोपों की आगे जांच की और अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए आरोपों को खत्म करने का फैसला किया है.'' यह समझौता दो साल की कोशिशों के बाद हुआ है.
पकड़ी रफ्तार
अमेरिकी न्याय विभाग की तरफ से आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप हटाए जाने की खबर के बाद 19 मई को अदाणी समूह के शेयरों में जबर्दस्त उछाल दिखा. अदाणी ग्रीन एनर्जी में 3.5 फीसद की तेजी आई, अदाणी टोटल गैस में 3.3 फीसद, अदाणी एंटरप्राइजेज में 3 फीसद से ज्यादा का उछाल आया जबकि अदाणी एनर्जी सोल्यूशन्स तथा अदाणी पावर में 2.5 फीसद की बढ़त हुई. अदाणी पोर्ट्स में एक फीसद की तेजी आई.
नवंबर 2024 में अमेरिका की एक अदालत—ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क—ने अदाणी, सागर, जैन और अन्य अधिकारियों पर चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश—आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर—की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया था. यह रिश्वत पब्लिक सेक्टर की कंपनी, सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआइ) के साथ एक मैन्युफैक्चरिंग-लिंक्ड प्रोजेक्ट के तहत बिजली बिक्री समझौते को पूरा करने के लिए दी गई थी.
इसके तहत एसईसीआइ अदाणी और एज्योर से बिजली खरीदकर उसे डिस्कॉम को बेचती थी. 26.5 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत में करीब 22.8 करोड़ डॉलर (2,202 करोड़ रु.) आंध्र प्रदेश सरकार के एक अनाम शीर्ष अधिकारी को दिए गए थे, जिसने राज्य की डिस्कॉम के एसईसीआइ से 7 गीगावाट बिजली खरीदने में मदद की थी.
आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट (एफसीपीए) का उल्लंघन किया, जो अमेरिका में काम करने वाली कंपनियों को विदेशी अधिकारियों को रिश्वत देने से रोकता है. इसके अलावा, एसईसी ने अलग से एक दीवानी मामला दायर कर आरोप लगाया कि जांच जारी रहने के दौरान अदाणी समूह ने अमेरिका से अरबों डॉलर जुटाए और निवेशकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी. हालांकि, अदाणी समूह ने सभी आरोपों को निराधार बताया और इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाया.
बहरहाल, ये आरोप समूह के लिए जबर्दस्त झटका ही साबित हुए. ये 2023 में हिंडनबर्ग के आरोपों के कुछ ही समय बाद लगे थे, जिससे बाजार में अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर बुरी तरह गिर गए और उनका मार्केट कैप घटकर लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए रह गया. लेकिन समय के साथ समूह ने शानदार वापसी की और उसका मार्केट कैप फिर बढ़कर लगभग 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया.
अदाणी समूह के करीबी सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप वापस लिए क्योंकि जांच में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले थे जिनसे इन आरोपों को सही ठहराया जा सके. यह मामला क्षेत्राधिकार से बाहर का था. इसके अलावा, आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य भी नहीं थे. अदाणी के वकीलों ने न्याय विभाग के सामने दलील दी कि अमेरिका में कोई अपराध नहीं हुआ है, किसी का कोई पैसा नहीं डूबा है, और अमेरिका को किसी भी तरह से कोई नुक्सान नहीं पहुंचा है.
दूसरे मामले में, अमेरिकी बाजार नियामक (एसईसी) ने गौतम और सागर अदाणी के खिलाफ एक संबंधित दीवानी मामले में धोखाधड़ी के आरोपों को हटाने का फैसला किया. इसके बदले में अदाणी समूह कुल 1.8 करोड़ डॉलर (174 करोड़ रु.) का समझौता शुल्क देने पर सहमत हुआ. सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही एसईसी के साथ समझौता हुआ अमेरिकी न्याय विभाग की तरफ से दर्ज किया गया मामला भी खुद-ब-खुद खत्म हो गया. समझौता इस शर्त पर हुआ कि अदाणी समूह न तो कुछ गलत होना स्वीकार कर रहा है और न ही इससे इंकार कर रहा है.
इसके अलावा, इस मामले को पूर्वाग्रह के साथ खारिज किया गया है, जिसका मतलब है कि इसे दोबारा कभी नहीं खोला जा सकता. ये अमेरिका में किसी मामले को पूरी तरह खत्म करने का सबसे मजबूत कानूनी तरीका है. सूत्रों ने यह भी कहा कि हाल के अन्य मामलों की तुलना में, जिनमें सैकड़ों करोड़ या अरबों डॉलर तक का जुर्माना लगता है, यह समझौता राशि काफी कम है.
लगाया पूरा जोर
अदाणी की कानूनी सुरक्षा टीम में छह बड़ी कानूनी सलाहकार फर्में शामिल थीं, जिन्होंने इस मामले में कई दौर की लंबी और व्यापक बातचीत की. इनमें सुलिवान ऐंड क्रॉमवेल, निक्सन पीबॉडी, हेकर फिंक, नॉर्टन रोज फुलब्राइट, ब्रेसवेल और सिरिल अमरचंद मंगलदास शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि आम सहमति से सुलझाए जाने वाले एसईसी के सभी दीवानी मामलों में एक बात आम होती है—न तो गलती मानना और न ही इनकार करना. इसका मतलब है कि गौतम और सागर अदाणी ने कानूनी लड़ाई से बचने और अपने बिजनेस पर ध्यान देने और वैल्यू बढ़ाने के लिए एक सिविल जुर्माना देने पर राजी होकर इस मामले को सुलझा लिया.
तीसरे मामले में समूह की मुख्य कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) ने ईरान पर लागू प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन की जांच के निबटारे के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को 27.5 करोड़ डॉलर (2,662 करोड़ रु.) देने पर सहमति जताई. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने कहा कि इस भारतीय समूह ने जांच में 'पूरा सहयोग' दिया और 'खुद से' सारी जानकारी दी. अदाणी एंटरप्राइजेज, जो समूह की मुख्य कंपनी है, ने दुबई के एक व्यापारी से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खेप खरीदी थी.
व्यापारी ने दावा किया था कि वह ओमान और इराक से गैस की आपूर्ति कर रहा है लेकिन असल में गैस ईरान से आई थी. सूत्रों के मुताबिक, ओएफएसी ने अब इस मामले को बंद कर दिया है. ओएफएसी ने एईएल पर किसी भी तरह की गलती या गलत काम का आरोप नहीं लगाया है और हर तरह की जवाबदेही से मुक्त कर दिया है.
एईएल समझौते के तौर पर 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगी, जो कि संभावित अधिकतम जुर्माने 38.42 करोड़ डॉलर से कम है. सूत्रों ने आगे बताया, ''यह राशि इसलिए कम की गई है क्योंकि कंपनी ने खुद इस बारे में जानकारी दी, जांच में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और ओएफएसी के साथ पूरा सहयोग किया.''
फिर बनाई साख
अदाणी समूह की भविष्य में पैसे जुटाने की बड़ी योजनाएं हैं, और इन कानूनी राहतों से उन्हें कर्ज और इक्विटी, दोनों तरह से निवेश आकर्षित करने का रास्ता मिल गया है. डीआर चौकसी फिनसर्व के एमडी, देवेन चौकसी का कहना है कि इससे मौजूदा कर्ज की कीमत फिर तय करने की प्रक्रिया में भी आसानी होगी. उन्होंने इंडिया टुडे को बताया, ''ग्रुप की साख फिर से कायम हो गई है, खासकर इसलिए क्योंकि यह एक समझौता है, कोई जुर्माना नहीं. इससे भविष्य में इक्विटी और कर्ज के रूप में पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी.''
नवंबर 2024 में अदाणी ने डोनाल्ड ट्रंप को दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर एक्स पर बधाई देते हुए समूह की ओर से अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा और मजबूत ढांचागत परियोजनाओं में 10 अरब डॉलर का निवेश करने और 15,000 तक नौकरियां सृजित करने की बात कही थी. हालांकि, अदाणी समूह के सूत्रों ने इस बात से इनकार किया है कि अदाणी के उस समय के बयानों और अब ग्रुप के अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाए जाने के बीच कोई संबंध है, जैसा अमेरिका के कुछ मीडिया संगठनों ने प्रकाशित किया था.