संकट सीधे चूल्हे पर
भारत के लिए सप्लाइ में रुकावट अब ऊर्जा की लागत बढ़ा रही है. इससे आयात पर उसकी गहरी निर्भरता खुलकर सामने आ गई. कीमतों और सप्लाइ पर लंबे दबाव का खतरा भी बढ़ा.

पश्चिम एशिया का टकराव 20 आउटलेट्स वाली रेस्तरां चेन 'पाइरेट्स ऑफ ग्रिल’ चलाने वाले इंदरजीत सिंह बंगा के लिए बिना किसी चेतावनी के आया. उनके रेस्तरांओं में तेज आंच पर खाना बनता है और हर आउटलेट पर रोज करीब तीन एलपीजी सिलेंडर खप जाते हैं. जैसे ही सप्लाइ कसी, कुछ ही दिनों में दिक्कत शुरू हो गई. बंगा कहते हैं, ''शुरुआती कुछ दिनों में एलपीजी की कमी की वजह से हमें 40 फीसद बिजनेस छोड़ना पड़ा.’’
भारत पर इस युद्ध का असर सिर्फ हालात की वजह से नहीं, उसकी बुनियादी ऊर्जा संरचना की वजह से भी है. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश भारत अपनी जरूरत का 85 फीसद कच्चा तेल, 50 फीसद नेचुरल गैस और 60 फीसद एलपीजी आयात करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे दुनिया के तेल और गैस प्रवाह का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है, वहां से होने वाली शिपिंग की गति काफी धीमी हो गई है.
खाड़ी देशों के ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने सप्लाइ को और तंग कर दिया है. भारत के लिए इसके नतीजे बढ़ती लागत के तौर पर सामने आ रहे हैं—भारत का क्रूड बास्केट, यानी जिन तेलों का वह आयात करता है उनका औसत मूल्य, फरवरी के औसतन 69 डॉलर (6,400 रुपए) प्रति बैरल से बढ़कर मार्च में 120 डॉलर (11,150 रुपए) प्रति बैरल के पार चला गया. ये कीमतें शिपिंग और बीमा से पहले निर्यात बिंदु की कीमतों पर आधारित हैं. भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाली लागत 19 मार्च को 156 डॉलर (14,500 रुपए) रही, जो ऊंचे जोखिम प्रीमियम को दिखाती है.
ऐसा ही दबाव गैस सप्लाइ में भी दिख रहा है. बड़े शहरों में एलपीजी वितरण प्रभावित हुआ है और जमाखोरी की खबरों के बीच 15 दिन से ज्यादा की देरी सामने आई है. आइसीआरए के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और कॉर्पोरेट रेटिंग्स के को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ कहते हैं, ''भारत में एलपीजी सप्लाइ का करीब 60 फीसद हिस्सा प्रभावित हुआ है.’’ अब इसका असर ग्राहकों तक पहुंचना शुरू हो गया है.
दिल्ली में गैर-रियायती घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपए महंगा होकर 913 रुपए का हो गया है. कमर्शियल सिलेंडर 142.5 रुपए बढ़कर 1,883 रुपए पर पहुंच गया है. इंडस्ट्रियल डीजल 21.92 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है, यानी 25 फीसद की बढ़ोतरी. प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़े हैंं, हालांकि सामान्य पेट्रोल-डीजल कीमतें फिलहाल जस की तस हैं.
क्या किया जा रहा
दस मार्च को केंद्र ने गैस उत्पादन और वितरण के नियंत्रण के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया. अब चार-स्तरीय प्राथमिकता व्यवस्था के तहत सबसे पहले घरों फिर ट्रांसपोर्ट फ्यूल, एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन ऑपरेशन को सप्लाइ प्राथमिकता दी जा रही है. इसके बाद ऊर्वरक क्षेत्र, फिर इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूजर्स आते हैं. वशिष्ठ कहते हैं, ''रिफाइनरियां अब पहले के मुकाबले 30-40 फीसद ज्यादा एलपीजी उत्पादन कर रही हैं, लेकिन क्षमता बढ़ाने की भी एक सीमा है.’’
आयात के मोर्चे पर भारत ने अपने जहाजों को रास्ता देने के लिए ईरान से बातचीत की. मध्य मार्च तक शिवालिक और नंदा देवी नामक दो टैंकर 92,000 टन से ज्यादा एलपीजी लेकर वहां से गुजरे. 24 मार्च को ईरान ने सभी ''नॉन-हॉस्टाइल’’ जहाजों को सख्त ''समन्वय’’ के साथ जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत दे दी. अमेरिका की ओर से भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीद के लिए दी गई 30 दिन की छूट से भी आयात बढ़ाने में मदद मिली. 22 मार्च को एक्का टाइटन 1,10,000 टन रूसी कच्चा तेल लेकर मंगलूरू पोर्ट पर पहुंचा.
और क्या करने की जरूरत?
अभी देश में रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व करीब 74 दिन की खपत के बराबर है. यह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सुझाए 90 दिन के मानक से कम है. अगर रुकावट लंबी चली, तो भारत की गुंजाइश और कम हो जाएगी. ईंधन विकल्प की क्षमता भी सीमित है.
हालांकि एलपीजी कनेक्शन करीब 33 करोड़ हैं, लेकिन सिर्फ 1.65 करोड़ घरों तक ही पीनएनजी की पहुंच है. इस फासले में कमी लाने के लिए पीएनजी नेटवर्क का ज्यादा तेजी से विस्तार करना होगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बड़े और निर्णायक पैमाने पर बढ़ाना ही होगा.