ऐ! जरा होश में

मेरिडिथ व्हिटेकर प्रेसिडेंट, सिग्नल फाउंडेशन कहती हैं कि सिग्नल उन गिने-चुने मैसेजिंग ऐप्स में है, जो यूजर्स का कोई डेटा स्टोर नहीं करता. इसलिए जब कानून लागू करने वाली एजेंसियां भी जानकारी मांगती हैं, तो सिग्नल मदद नहीं कर पाता.

AI & CONTROL | Machine vs Mankind: Agentic AI & the Battle for Human Agency
मेरिडिथ व्हिटेकर प्रेसिडेंट, सिग्नल फाउंडेशन

मेरिडिथ व्हिटेकर: प्रेसिडेंट, सिग्नल फाउंडेशन

हम इस वक्त डेटा कलेक्शन और निगरानी के सुनहरे दौर में जी रहे हैं. एआइ मॉडल इस विशाल डेटा के ढेर में पैटर्न ढूंढ़ रहे हैं और उसमें लोगों की पहचान तक कर रहे हैं.

हम नहीं कह रहे कि 'एआइ नहीं चाहिए’. हम कह रहे हैं कि छोटे फायदों की खातिर लिए गए फैसलों की कीमत लंबे समय की सुरक्षा और प्राइवेसी को न चुकानी पड़े.

एआइ की दुनिया पर नियंत्रण किसका होगा? मेरिडिट व्हिटेकर के मुताबिक, इसका जवाब 1990 के दशक में छिपा है, जब इंटरनेट की शुरुआत अमेरिका की यूनिवर्सिटी और सरकारी ढांचे से हुई थी. बाद में यह धीरे-धीरे निजी कंपनियों के हाथ में चला गया, बिना किसी भी तरह के मजबूत नियमों के.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि आज एआइ बनाने में सबसे आगे वही कंपनियां हैं, जिन्होंने इंटरनेट क्रांति की शुरुआत की थी. इसलिए उनके पास हमारे भविष्य को तय करने की असाधारण ताकत है. उनके शब्दों में, ये कंपनियां अब ''हमारी कहानी खुद बताने, हमें और हमारी दुनिया को अपनी तरह से परिभाषित करने की ताकत रखती हैं—जो पारंपरिक डेटा प्राइवेसी की बहस से कहीं आगे की बात है.’’

व्हिटेकर कहती हैं कि सिग्नल उन गिने-चुने मैसेजिंग ऐप्स में है, जो यूजर्स का कोई डेटा स्टोर नहीं करता. इसलिए जब कानून लागू करने वाली एजेंसियां भी जानकारी मांगती हैं, तो सिग्नल मदद नहीं कर पाता. उन्होंने कहा, ''जब आप सिग्नल का इस्तेमाल करते हैं तो मुझे उससे कोई कमाई नहीं होती.’’ लेकिन खतरे खत्म नहीं होते.

सबसे ज्यादा प्राइवेसी देने वाले ऐप भी विंडोज या मैकओएस जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं, जिन्हें हैक किया जा सकता है. इसके अलावा, एजेंटिक एआइ सिस्टम जो आपके निजी डेटा तक पहुंच रखते हैं, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के लिए 'डरावना सपना’ हैं. ''ये बेहद कमजोर होते हैं.’’ वे प्राइवेसी की नाजुकता के बारे में बताते हुए कहती हैं कि एआइ से कोई ट्रिप प्लान करने या कार बुक करने के लिए कैलेंडर और क्रेडिट कार्ड जैसी जानकारी देने सरीखी चीजें प्राइवेसी में दखल देने का बड़ा रास्ता बनती हैं.

व्हिटेकर ने जोर देते हुए कहा, ''आज हालत यह है कि महंगे एआइ मॉडल और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर में जो भारी निवेश हुआ है, उसकी वजह से कंपनियां इस टेक्नोलॉजी को तेजी से लागू कर रही हैं—और कई बार पारंपरिक साइबर सिक्योरिटी और सेफ्टी नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं.’’ रास्ता क्या है? व्हिटेकर के मुताबिक, एआइ को रोकना रास्ता नहीं, बल्कि बिना सोचे-समझे उसे लागू करने पर ब्रेक लगाना है.  

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