आपसी समृद्धि में भागीदार

राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में भारत-अमेरिका संबंध ऐतिहासिक ऊंचाइयां छू सकते हैं. इन संबंधों के ऐसे चमत्कारी नतीजे देखने को मिल सकते हैं जो पहले कभी देखने में नहीं आए

सार्जियो गोर, भारत में अमेरिका के राजदूत

भारत में अमेरिकी राजदूत के तौर पर अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के मंच पर सार्जियो गोर ने भारत-अमेरिका रिश्तों की मजबूती पर जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर राजनीतिक तालमेल बना हुआ है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच निजी दोस्ताने ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई. गोर ने यह भी कहा कि व्यापार, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक समन्वय भारत-अमेरिका संबंधों के तीन प्रमुख आधार हैं.

गोर ने हाल ही व्यापार समझौते पर बनी सहमति को पारस्परिक हितों पर आधारित और 'दोनों पक्षों के लिए लाभकारी' बताया. उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देश एक महत्वपूर्ण खनिज समझौते पर हस्ताक्षर करने के करीब हैं. उनका कहना था कि ''महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विश्वसनीय और विविध आपूर्ति शृंखलाएं आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए अपरिहार्य हैं.''

अमेरिकी पैक्स सिलिका एक अहम पहल रही जो कच्चे माल से लेकर बुनियादी एआइ ढांचे तक संपूर्ण सिलिकॉन पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित करने का रणनीतिक प्रयास है. इसमें भारत पहले ही एक विश्वसनीय भागीदार है. गोर ने कहा कि भारत का वैश्विक एआइ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना 'बहुत कुछ कहता है'.

साथ ही उन्होंने भारत को डेटा संप्रभुता बरकरार रखते हुए उन्नत अमेरिकी तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया. उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति, क्वाड में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका और इसे पुनर्जीवित करने के अमेरिकी इरादे का भी उल्लेख किया. उन्होंने असैन्य एटमी ऊर्जा, एलएनजी, कोयला और कार्बन कैप्चर जैसी नई तकनीकों में संभावित ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की. रक्षा संबंधों पर उन्होंने पारंपरिक व्यापार से हटकर अब साझा-उत्पादन, साझा अनुसंधान और साइबर तथा अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग की ओर ध्यान आकृष्ट किया.

ईरान संघर्ष को गोर ने तेहरान को गोपनीय तौर पर एटम बम बनाने से रोकने के वास्ते जरूरी बताया और कहा कि इससे दुनिया में स्थिरता आएगी. रूसी तेल पर अमेरिकी रुख में बदलावों—पहले प्रतिबंध और फिर उसमें ढील—का बचाव करते हुए गोर ने तर्क दिया कि ये कदम बदलती भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाते हैं. वे अब दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत भी हैं. उनकी दोहरी भूमिका एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत है और यह बदलाव भारत को क्षेत्रीय कूटनीति के केंद्र में लाता है.

राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में भारत-अमेरिका संबंध ऐतिहासिक ऊंचाइयां छू सकते हैं. इन संबंधों के ऐसे चमत्कारी नतीजे देखने को मिल सकते हैं जो पहले कभी देखने में नहीं आए. पारस्परिकता का अर्थ है संतुलित व्यापार, आपसी सम्मान और साझा समृद्धि. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मूल में यही सिद्धांत काम कर रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप जब व्हाइट हाउस से बाहर हो गए थे, पीएम मोदी से उनकी दोस्ती बनी रही...दोनों संपर्क में थे. यह कुछ ऐसी बात है जिसे राष्ट्रपति खासी अहमियत देते हैं. 

Read more!