यह तो चमकता ही रहेगा

स्वर्णिम भारत 2047 पहल के तहत यह उद्योग अपनी भूमिका तय कर रहा है, ऐसे में भारत की लगभग एक तिहाई सोने की मांग अगले दशक में अधिक खनन के जरिए देश में ही पूरी की जा सकती है.

wealth: Gold in an Uncertain World
सचिन जैन, क्षेत्रीय सीईओ (भारत), वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल

सचिन जैन, क्षेत्रीय सीईओ (भारत), वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल

भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बढ़ते वैश्विक कर्ज और निवेश के बदलते व्यवहार से जूझती दुनिया में सोना एक ऐसा दांव है जो आमतौर पर फायदे का सौदा होता है. इस पीली धातु की चमक की चर्चा करते हुए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के क्षेत्रीय सीईओ (भारत) सचिन जैन ने बताया कि पिछले तीन दशक में सोने की मांग का स्वरूप कितना बदल गया है.

पश्चिमी बाजारों में पहले सोने की खरीद काफी हद तक गहनों की मांग से हुआ करती थी, और केंद्रीय बैंक सोने के शुद्ध बिकवाल होते थे. आज वैश्विक सोने की खपत में विकासशील बाजारों की हिस्सेदारी 70 फीसदी से भी ज्यादा है. अब सोने की मांग गहनों, सुरक्षित संपत्ति के तौर पर निवेश, केंद्रीय बैंकों के भंडार और इलेक्ट्रॉनिक्स और अक्षय ऊर्जा प्रणालियों जैसे टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में भी पहुंच गई है.

कीमतों में उछाल के बावजूद जैन ने जोर देकर कहा कि सोने को सट्टेबाजी वाले निवेश के तौर पर नहीं बल्कि पोर्टफोलियो में विविधता लाने और अनिश्चितता से बचाव के तौर पर देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि युवा निवेशक तेजी से ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड) जैसे डिजिटल सोने को खरीद रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस सेक्टर का जीडीपी में लगभग 1.5 फीसदी का हिस्सा है और इसमें लगभग साठ लाख लोग काम करते हैं.

स्वर्णिम भारत 2047 पहल के तहत यह उद्योग अपनी भूमिका तय कर रहा है, ऐसे में भारत की लगभग एक तिहाई सोने की मांग अगले दशक में अधिक खनन के जरिए देश में ही पूरी की जा सकती है. साथ ही, अनुमानित 25,000-30,000 टन घरेलू सोने के कुछ हिस्से का ज्यादा उत्पादक तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे निष्क्रिय पड़ी यह संपत्ति अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में आ जाएगी.

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