आप मानवता एआइ को आउटसोर्स नहीं कर सकते

एकांत और नीरवता थोपे जाने पर भी त्रासद नहीं लगते. हमारी कितनी ही महान किताबें तब लिखी गईं जब उनके लेखक कैद में थे, वे नेहरू की हों या मंडेला की

पीको अय्यर, लेखक

पीको अय्यर, लेखक

जब तमाम देश यहां एक दूसरे के साथ युद्धरत हैं, लोग अपनी धारणाओं और मान्यताओं की वजह से आपस में बंटे हुए हैं, ऐसे में थोड़ा थमते-रुकते हुए ठहराव के ये लम्हे संजोने और अपने आंतरिक संसार को फिर हासिल करने से बेहतर भला क्या है?

इस सफर में हमें रास्ता दिखाने के लिए पूर्व पत्रकार, यायावर, अब जाने-माने लेखक, टेड टॉक्स में नियमित तौर पर शिरकत करने वाले और अपने सबसे नए अवतार यानी जोश सैफ्डी की टेबल टेनिस ड्रामा फिल्म मार्टी सुप्रीम में अदाकार पीको अय्यर से बेहतर भला कौन है? उन्होंने निराश भी नहीं किया.

वे गहरी और ज्ञानवान बातों का खजाना लेकर आए जो बताती हैं कि जब हमारी बाहर की दुनिया बिखरती मालूम दे रही हो तो हम मन की शांति कैसे पाएं.

अय्यर एकांत के पक्के साधक हैं. ईसाई न होते हुए भी वे हर साल कैलिफोर्निया में बिग सुर की बेनेडिक्टीन मोनेस्ट्री में एकांतवास के लिए चले जाते हैं. उन्होंने अपनी पत्नी हिरोको ताकेउची के साथ जापान के उपनगरीय इलाके नारा में घर बसाया है और सेलफोन रखने से साफ इनकार करते हैं क्योंकि ''मैं अपना ध्यान हजार टुकड़ों में बंटने देना नहीं चाहता.''

उनके पाठक उनके लेखन में बार-बार यात्रा पर निकल जाने वाला मुसाफिर देखते हैं, खुद अय्यर के लिए यह विशाल हिमशैल का छोटा-सा ऊपरी सिरा भर है. वे कहते हैं, ''उन्हें तो बस 20 फीसद वाला वह हिस्सा दिखता है, जो ट्रैवल कर रहा है, वह 80 फीसद नहीं जो एक जगह बैठकर बिताया जाता है.''

यात्रा हाट-बाजार जाने की तरह है—आप जड़ी-बूटियां, मसाले, सब्जियां खरीद लेते हैं लेकिन खाना तो आप रसोई में एक जगह ठहरकर ही बना सकते हैं. इतिहास गवाह है कि इनसानों ने टेक्नोलॉजी को उससे कहीं ज्यादा बदला है जितना टेक्नोलॉजी ने इनसानों को.

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