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इस्लामी आतंकवाद दुनिया में पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात है. खुलकर जिहाद और शरीयत का समर्थन करने वाली इसकी सरकार से हमें बिल्कुल मेल नहीं रखना चाहिए

लॉरा लूमर, ट्रंप की वफादार; अमेरिकी राजनैतिक कार्यकर्ता

लॉरा लूमर: ट्रंप की वफादार; अमेरिकी राजनैतिक कार्यकर्ता

बेझिझक इस्लाम-विरोधी, ट्रंप की कट्टर समर्थक और वफादार, आप्रवासन की धुर विरोधी लॉरा लूमर ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अपने चिरपरिचित अंदाज में बेबाक राय रखी. शुरुआत उन्होंने मेल-जोल बढ़ाने वाले अंदाज में की और राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश सुनाया: ''मुझे भारत से प्यार है, मुझे मोदी से प्यार है, मुझे भारतीयों से प्यार है.''

इसके तुरंत बाद उन्होंने बताया कि कैसे राष्ट्रपति उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हैं और वे प्रशासन से गलत लोगों को बाहर निकालने में उनकी मदद करती हैं, भले ही उनके पास व्हाइट हाउस में कोई आधिकारिक पद नहीं है. उन्होंने कहा, ''कोई पद न होने के कारण मुझे अपनी बातों को सेंसर नहीं करना पड़ता. मैं बदलाव के लिए अपनी बात ज्यादा कड़े, सीधे और स्पष्ट शब्दों में रख पाती हूं.''

जब उनसे यह पूछा गया कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध छेड़ना चाहते हैं तो पाकिस्तान के इतने करीब कैसे हैं, इस पर लूमर का कहना था कि वे प्रशासन के पाकिस्तान या अन्य इस्लामी देशों के साथ नजदीकी रिश्ते रखने के खिलाफ हैं, ''मैंने राष्ट्रपति को यह स्पष्ट कर दिया है कि मैं ओवल ऑफिस में अरब या इस्लामी नेताओं को नहीं देखना चाहती.'' लेकिन साथ ही जोड़ा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति को यह बताने में असमर्थ हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए.

भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए उन्होंने कहा कि भारत को तो हर रोज ही इस्लामी जिहाद की वास्तविकता से जूझना पड़ता है, ''जहां 1.4 अरब की आबादी में 20 करोड़ से ज्यादा मुसलमान हैं.'' राजनैतिक कार्यकर्ता लूमर ने कहा कि अमेरिका, इज्राएल और भारत इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ सशक्त ताकत की तिकड़ी वाली एक रणनीतिक सुरक्षा दीवार हैं.

सोशल मीडिया पर 'गो बैक टु इंडिया' हैशटैग के साथ भारत विरोधी पोस्ट करने को लेकर घिरीं लूमर ने सफाई देते हुए कहा कि वे एच1बी कार्यक्रम के खिलाफ थीं. उन्होंने सवाल उठाया, ''आपको क्या लगता है, युवा अमेरिकियों को कैसा लगता होगा जब बड़ी टेक कंपनियां उनसे कहती हैं कि वे सबसे प्रतिभाशाली नहीं हैं और उन्हें चीन और भारत से लोगों को बुलाना होगा?''

इस्लामी आतंकवाद दुनिया में पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात है. खुलकर जिहाद और शरीयत का समर्थन करने वाली इसकी सरकार से हमें बिल्कुल मेल नहीं रखना चाहिए. 

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