पूरी रफ्तार से प्रगति

कारोबार में कोई कदम न उठाना गलती करने से अधिक नुक्सानदेह होता है; निर्णायक कदम उठाना, भले ही वह पूरी तरह से ठीक न हो, संगठन के लिए बेहद जरूरी है

करण अदाणी, प्रबंध निदेशक, अदाणी पोर्ट्स ऐंड एसईजेड लिमिटेड

करण अदाणी, प्रबंध निदेशक, अदाणी पोर्ट्स ऐंड एसईजेड लिमिटेड

करण अदाणी उस समय महज 24 साल के थे, जब वे पहली बार इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल हुए. बारह साल बाद अदाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन के मौजूदा प्रबंध निदेशक 2026 के इस संस्करण में फिर से शामिल हुए. पिछले एक दशक में समूह के शानदार सफर से जुड़े सवाल के जवाब में अदाणी ने कहा कि इसका लक्ष्य कभी भी बाजार पूंजीकरण नहीं था, बल्कि यह ''हम जो कर रहे थे, उसी का नतीजा है.''

अदाणी ने इसके बाद उन तीन मुख्य कारोबारों के बारे में बताया जिन पर समूह ध्यान दे रहा है. पहला क्षेत्र है ऊर्जा, जो 'समूह का मूल आधार' है; इसका लक्ष्य उपभोक्ताओं के लिए सबसे सस्ती ऊर्जा का उत्पादन करना है, साथ ही जिसका भारत के दीर्घकालिक टिकाऊ लक्ष्यों के साथ तालमेल भी हो. इस कारोबार में अब ऊर्जा उत्पादन, पारेषण और वितरण, तीनों शामिल हैं.

दूसरा क्षेत्र बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और परिवहन है; यहां भी उद्देश्य समूह के हितों को राष्ट्रीय हितों से जोड़ना है—यानी भारत की लॉजिस्टिक्स लागत घटाना और देश को समुद्री व्यापार के क्षेत्र में बड़ी ताकत बनाना. तीसरा क्षेत्र मैटेरियल और औद्योगिक विज्ञान है; इस क्षेत्र में समूह सीमेंट, तांबा और एल्युमिनियम के साथ अब रक्षा साजो-सामान के निर्माण में भी सक्रिय है. अदाणी के अनुसार, ये तीनों स्तंभ मिलकर ऐसा केंद्रित और एक दूसरे का पूरक तंत्र बनाते हैं, जिसका मूल बुनियादी ढांचा और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा है.

पिछले 4-5 साल में ग्लोबल सप्लाइ चेन में लगातार आ रही बाधाओं के बारे में अदाणी कहते हैं कि इससे सप्लाइ चेन और घरेलू इन्फ्रास्ट्रक्चर को क्षेत्रीय मिजाज का बनाने की जरूरत और बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि अदाणी पोर्ट्स देश की जरूरत वाले सभी महत्वपूर्ण एनर्जी कार्गो को संभालने के लिए 'पूरी तरह से तैयार' है, चाहे वह एलपीजी हो या कच्चा तेल. मौजूदा संकट ने दिखा दिया है कि ऊर्जा आयात के मामले में एक देश के तौर पर आत्मनिर्भर होना कितना जरूरी हो गया है.

व्यापार मार्गों में विविधता लाने और नए इन्फ्रा प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व पर उन्होंने निकोबार प्रोजेक्ट का जिक्र किया. अदाणी कहते हैं कि अगर मलक्का स्ट्रेट (जलडमरूमध्य)—जो वैश्विक व्यापार के चार संभावित 'चोक पॉइंट्स' यानी संकरे रास्तों में से एक है—प्रभावित होता है, तो सप्लाइ चेन पर निर्भरता में भारत के लिए निकोबार बड़ी भूमिका निभा सकता है. उन्होंने जोड़ा कि भारत के इन्फ्रा निवेश को इस पर ध्यान देना चाहिए कि सप्लाइ चेन भू-राजनीतिक खतरों से 'जोखिम-मुक्त' रहे.

अदाणी समूह खुद भी हर स्तर पर हर तरह के बड़े बदलाव से गुजर रहा है. अगले पांच साल के लिए उसका नियोजित पूंजी खर्च 2 लाख करोड़ रुपए प्रति वर्ष है. समूह हर कारोबार में आगे बढ़ रहा है—अक्षय ऊर्जा 18 गीगावॉट से 50 गीगावॉट तक, बंदरगाह क्षमता 60 करोड़ से 1.2 अरब टन तक, थर्मल क्षमता 17 गीगावॉट से 45 गीगावॉट तक और एयरपोर्ट यात्री क्षमता 10 करोड़ से 20 करोड़ तक. और यह सब 2030-31 तक.

एक अनूठी स्वीकारोक्ति में अदाणी ने माना कि समूह 'अपनी गाथा के बारे में ठीक से बता पाने' से चूक गया, जिससे बाहर का प्रचार लोगों के मानस पर हावी हो गया. भविष्य की उम्मीदों के बारे में, अदाणी का कहना था कि उनकी महत्वाकांक्षा दुनिया का सबसे सस्ता बिजली उत्पादक और लॉजिस्टिक्स प्रदाता बनना है, और यकीनन, दुनिया भर में सबसे अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर समूहों में से एक के तौर पर प्रतिष्ठा अर्जित करना है.

ऐसा कभी नहीं होता कि कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो और उसका इस्तेमाल ही न हो. मेरा मानना है कि एक बार यह बन जाएगा, तो व्यापार अपना रास्ता बना ही लेगा.

हम दुनिया के सबसे सस्ते बिजली उत्पादक और लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर और सबसे अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर समूहों में से एक के तौर पर प्रतिष्ठा अर्जित करना चाहते हैं.

कारोबार में कोई कदम न उठाना गलती करने से अधिक नुक्सानदेह होता है; निर्णायक कदम उठाना, भले ही वह पूरी तरह से ठीक न हो, संगठन के लिए बेहद जरूरी है.

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