बिजली की सी रफ्तार से

दिल्ली की परिवहन अधिकारी निधि सरोहे ने तीन बड़ी बाधाओं का जिक्र किया: गाड़ियों की कीमत ज्यादा होना, कमजोर चार्जिंग ढांचा और ग्राहकों के भरोसे में कमी.

breakaway session: Accelerating Electric Mobility Transition for Viksit Bharat
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेशन में अपनी बात रखती वक्ता अक्षिमा घाटे

ब्रेकअवे सेशन: विकसित भारत के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बदलाव को बढ़ावा

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में भारत में ईवी के क्षेत्र में बदलाव की जरूरत और जटिलता पर फोकस किया गया. सरकार और उद्योग के अग्रणी जन जब साथ बैठे तो बातचीत ईवी अपनाने के आंकड़ों से आगे बढ़ी और इसे लागू करने के दुरुह सवाल पर आ गई: इस बदलाव को बनाए रखने के लिए नीति, उद्योग और उपभोक्ता के बीच किस तरह का तालमेल आवश्यक है?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के महमूद अहमद ने कहा कि सरकार का काम किसी एक टेक्नोलॉजी का समर्थन किए बिना मजबूत नियामकीय व्यवस्था बनाना है.

विनफास्ट इंडिया के सीईओ तपन घोष समेत उद्योग के दिग्गजों ने तेज वृद्धि का जिक्र किया, लेकिन उनका जोर इस बात पर था कि ज्यादा लोकलाइजेशन—खास तौर पर महंगी बैटरियों—से इसकी बढ़ोतरी के रास्ते अधिक खुलेंगे. इन्वेस्ट इंडिया की सुजाता यू.सी. ने निवेश आकर्षित करने के लिए सप्लाइ चेन को स्थानीय करने की जरूरत बताई.

दिल्ली की परिवहन अधिकारी निधि सरोहे ने तीन बड़ी बाधाओं का जिक्र किया: गाड़ियों की कीमत ज्यादा होना, कमजोर चार्जिंग ढांचा और ग्राहकों के भरोसे में कमी. आरएमआइ इंडिया की अक्षिमा घाटे ने युद्ध, टैरिफ और सप्लाइ चेन में दूसरे झटकों के बीच ईवी को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम बताया.ठ्ठ

खास बातें

यह नीति किसी टेक्नोलॉजी की पक्षधर नहीं; इसमें सरकार बिना किसी खास टेक्नोलॉजी का पक्ष लेते हुए प्रोत्साहन और सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल करती है. इसका आकार घरेलू वैल्यू चेन पर निर्भर करता है. महंगे कल-पुर्जों, खासकर बैटरियों को स्थानीय स्तर पर बनाना, ईवी की लागत कम करने और इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए बहुत अहम है.

आरएमआइ इंडिया की प्रबंध निदेशक अक्षिमा घाटे ने कहा कि ईवी को मैक्रो हेज (अर्थव्यवस्था के जोखिमों के प्रति सुरक्षा) के तौर पर देखा जा रहा है. तेल पर निर्भरता घटाना और बाहरी झटकों के असर से बचना अब इसके मूल मकसद का हिस्सा है. 

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