बदलते काल संग कदमताल

अक्षय ऊर्जा के मामले में एटी कैपिटल के चेयरमैन अरविंद टिक्कू ने कहा कि सोलर और बैटरियों के लिए चीन पर निर्भरता से नई तरह की कमजोरी पैदा होती है.

WEALTH: Smart Money Moves—The Global Investor Mindset Across Capital and Manufacturing
अरविंद टिक्कू

अरविंद टिक्कू: संस्थापक और ग्रुप चेयरमैन, एटी कैपिटल

अरविंद टिक्कू के विचार स्पष्ट हैं—अब बिजनेस की योजना बाजारों के हिसाब से नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक अस्थिरता से तय होती है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए एटी कैपिटल के संस्थापक और ग्रुप चेयरमैन ने तर्क दिया कि जहाजों की आवाजाही में अड़चनों, पश्चिम एशिया में जंग और प्रतिबंधों के तत्काल, अप्रत्याशित और दूरगामी असर होते हैं.

उनकी राय  है—हालात के हिसाब से ढल जाना ही एकमात्र टिकाऊ रणनीति है. भारत के लिए इसका मतलब है अपनी सप्लाइ चेन में विविधता लाना, भू-राजनीति में सभी गुटों के साथ अच्छे संबंध रखना और मौकों का फायदा उठाना—रूसी तेल का तेजी से आयात बढ़ाने के मामले से यह जाहिर भी हुआ. उनका कहना था कि रूसी तेल का कोई आसान विकल्प नहीं है, कीमतों और सीमित सप्लाइ के चलते अमेरिकी ऊर्जा भी लंबे समय के लिए भरोसेमंद सहारा नहीं है. 

उन्होंने दलील दी कि अब तो विकसित अर्थव्यवस्थाएं भी निवेश के लिए स्थिर ठिकाना नहीं रह गई हैं. इससे लंबे समय के लिए पूंजी लगाने की लागत बढ़ जाती है और वैश्विक निवेश चक्र धीमा पड़ सकता है. उन्होंने भारत को अपने विशाल घरेलू बाजार, और इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग की वजह से 'उम्मीद की किरण’ बताया. लेकिन भारत का आकर्षण सिर्फ मांग पर ही नहीं, बल्कि इस पर भी निर्भर करेगा कि वह उतार-चढ़ाव के दौर में कारोबारों को किस तरह सहारा देता है. 

अक्षय ऊर्जा के मामले में उन्होंने कहा कि सोलर और बैटरियों के लिए चीन पर निर्भरता से नई तरह की कमजोरी पैदा होती है. रियल एस्टेट और शहरीकरण के मसले पर उन्होंने कहा कि भारत में इसमें निरंतर निवेश होता रहेगा.

टिक्कू का संदेश था—भविष्य सबसे बड़े या सबसे तेज चलने वाले का नहीं, बल्कि उसका है जो हर तरह से ढल सकता है. 

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