"दुनिया भर के आर्टिस्ट्स को सुनते हैं, लेकिन अपनी जड़ें कभी नहीं भूलते"

अरुणाचल प्रदेश की ऑल गर्ल पॉप बैंड की मेंबर्स ने इंडिया टुडे से बात की. उन्होंने कहा, "नॉर्थईस्ट में बहुत सारी विविध संस्कृतियाँ हैं. हमें उम्मीद है कि संगीत और कला के जरिए इस विविधता के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ेगी."

(बाएं से क्रमश:) पाबे, मोयोन, सासुम और लूमी गिलितिग्रीम्स, अरुणाचल प्रदेश का ऑल गर्ल पॉप बैंड

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026: नॉर्थईस्ट का नया अंदाज 

आपने ईटानगर से सफर शुरू किया और आज आपके गाने नेशनल प्लेलिस्ट में हैं. यह सब किस तरह से हुआ?
लूमी: छोटी परफार्मेंस से शुरुआत हुई और फिर हमने इसे ऑनलाइन शेयर किया ताकि अरुणाचल प्रदेश से बाहर के लोगों तक पहुंच सके. धीरे-धीरे हमारे संगीत पर लोगों की नजर पड़ी और हम देशभर के श्रोताओं के शुक्रगुजार हैं जो हमें ढूंढ़कर सुन रहे हैं.

के-पॉप और दूसरे इंटरनेशनल ट्रेंड्स से तुलना किए जाने पर आपका क्या कहना है?
सासुम और मोयोन: संगीत में इन्फ्लुएंस (असर आना) स्वाभाविक है और हम दुनिया भर के आर्टिस्ट्स को सुनते हैं. लेकिन अपनी जड़ें कभी नहीं भूलते. हमारे गाने अंग्रेजी, हिंदी और हमारी नीशी जबान का मिक्स हैं, जिससे हमारी पहचान जिंदा रहती है. मकसद है कि कुछ ऐसा क्रिएट किया जाए जो हमें ऑथेंटिक लगे.

आपका यह ऑल-गर्ल बैंड है और संगीत जगत पर आजकल एल्गोरिद्म, ट्रेंड और सोशल मीडिया हावी है. ऐसे माहौल में टिके रहना कितना कठिन है?
लूमी और मोयोन: सबसे बड़ी चुनौती टिककर काम करते रहना है. एल्गोरिद्म और ट्रेंड तो रोज बदलते रहते हैं लेकिन जो बात मायने रखती है वह है जुनून और मेहनत.

ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना युवा कलाकारों के लिए काफी भारी पड़ सकती है. क्या इससे सार्वजनिक जीवन के बारे में आपकी सोच में बदलाव आया है?
लूमी और मोयोन: पहली बात, नकारात्मक टिप्पणियां हतोत्साहित करती हैं लेकिन आखिरकार यह महसूस होता है कि जब आप सार्वजनिक रूप से दिखते हैं तो आलोचना होती है. हम लोग रचनात्मक फीडबैक पर ध्यान देते हैं.

नॉर्थईस्ट बहुत विविधतापूर्ण है. क्या मुख्यधारा का भारत इसे अब भी पूरी तरह नहीं समझ पाया?
मोयोन: जी बिल्कुल. बाहर के बहुत सारे लोग इसे नहीं जानते. नॉर्थईस्ट में बहुत सारी विविध संस्कृतियां हैं. हमें उम्मीद है कि संगीत और कला के जरिए इस विविधता के प्रति लोगों की उत्सुकता बढ़ेगी.

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