सदाबहार हीरो

अक्षय कुमार ने कहा, "मैं साल में चार फिल्में कर पाता हूं. मैं रविवार की छुट्टी लेता हूं और हर तीन महीने में एक हफ्ते की लंबी छुट्टी भी.’’

THE Khiladi:  Method Behind the Hit Machine
अक्षय कुमार

अक्षय कुमार, अभिनेता-निर्माता

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अक्षय कुमार हमेशा की तरह शांत और बेफिक्र नजर आए, जहां उन्होंने हर विषय पर बात की: समसामयिक विषयों (''हमने घर में राजनीति पर बात करना करीब पांच साल पहले ही बंद कर दिया था”) से लेकर सिक्स-पैक (''जो लोग सिक्स-पैक बनाते हैं, वे या तो वीएफएक्स के जरिए बनाते हैं या शरीर में गलत चीजें डालकर”) तक.

तीन दशकों के दौरान 150 से ज्यादा फिल्मों में काम करने के बाद उन्होंने अपने उस सफर की तरफ मुड़कर देखा जिसमें वे कई उतार-चढ़ावों से गुजरे और यहां तक कि कनाडा में कार्गो बिजनेस शुरू करने की आकस्मिक योजना भी बनाई.

उन्होंने कहा, ''जब मैं कोई फिल्म शुरू करता हूं, तो उसकी स्क्रिप्ट कम से कम 100 बार पढ़ता हूं. इसीलिए फिल्म का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ता है, और वे 50-55 दिनों में पूरी की जाती हैं. इसीलिए मैं साल में चार फिल्में कर पाता हूं. मैं रविवार की छुट्टी लेता हूं और हर तीन महीने में एक हफ्ते की लंबी छुट्टी भी.’’
जब उनसे उनकी ऊर्जा और शक्ति का राज पूछा गया, तो उन्होंने जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत के अलावा फिटनेस, खानपान और मेडिकल चेकअप आदि की जरूरतों पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि 50 साल से ऊपर के पुरुषों को हर साल प्रोस्टेट कैंसर की जांच जरूर करवानी चाहिए क्योंकि हर तीन में से एक पुरुष इससे प्रभावित है. उन्होंने कहा, ''मैंने अपनी जिंदगी के सबसे अहम व्यक्ति, अपने पिता को 67 की उम्र में (इस बीमारी की वजह से) खो दिया. आप अपनी और अपने परिवार की जान बचा सकते हैं.’’

कुमार के नाम क्राइम थ्रिलर फिल्म रुस्तम (2016) के लिए एक राष्ट्रीय अवार्ड दर्ज है. साथ ही एयरलिफ्ट (2016), गोल्ड (20218) और केसरी (2019) सरीखी फिल्मों की वजह से भले उन्हें भारत के राष्ट्रवादी नायक के तौर पर जाना जाता है लेकिन वे अपनी पहचान सबसे ज्यादा 'व्यावसायिक अभिनेता’ के तौर पर ही करते हैं, ''जो कामयाब फिल्में करके खुश रहता है.’’

इससे पता चलता है कि उन्हें हाउसफुल सरीखी कॉमेडी फ्रेंचाइजी क्यों पसंद हैं. बॉक्स ऑफिस पर क्या कामयाब होता है, इसका तर्क अलबत्ता बदलता रहता है. कुमार ने माना कि दर्शक क्या चाहते हैं, इसका अंदाजा लगाना नामुकिन है. उन्होंने कहा, ''फिल्म इंडस्ट्री एक पहिए की तरह है. हर दो-तीन साल में बदलती रहती है.

मारधाड़ और खून-खराबे से भरी ऐक्शन फिल्म धुरंधर को लीजिए, लोगों ने इसे हाथो-हाथ लिया. कुछ वक्त पहले पैडमैन और टॉयलेट: एक प्रेम कथा  सरीखी मेरी सामाजिक फिल्मों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था. अब स्त्री जैसी हॉरर-कॉमेडी फिल्मों का दौर आ गया है.’’

कुमार ने अपनी नागरिकता और भारत के प्रति अपनी वफादारी को लेकर चल रहा विवाद भी सुलझा दिया. एक के बाद एक कई फ्लॉप फिल्मों के बाद कुछ वक्त उन्होंने कनाडा में गुजारा, फिर 2023 में उन्हें नागरिकता के दस्तावेज मिले और 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार वोट डाला.

एक संदर्भ में वे बोले, ''कई अच्छे पहलू होंगे लेकिन टीआरपी के लिए किसी एक परेशानी को उछाला जाएगा और तोड़-मरोड़कर पेश किया जाएगा. मैं हिंदुस्तानी हूं और हमेशा रहूंगा.’’ 

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